गुरुवार, 11 नवंबर 2010

प्यार ( soulmate ) पर लिखी एक ईश्वर प्रेरित कविता

बीच में समय नहीं मिला , वैसे मिल भी जाता तो क्या होता एक खस्सी सी कविता ही लिख देता जिसे मेरे अलावाएक दो लोग पढ़ लेतेईश्वरीय प्रेम एक वरदान हैं , उसे soulmate concept से जोड़कर एक कविता बनायीं हैंआशा हैं आपको अच्छी लगेगी


राधा सीता या मीरा जैसी ना कोई आराधक चाहिए
लैला हीर जूलियट जैसी के गीत भी क्या गाईये
आधुनिक फिल्मो की भी ना दास्ताँ होगी
शायद मेरी प्रेमिका कुछ ऐसी होगी

जिसके आंसू भी मेरी आँखों से बह जाये
बोल उसके हो और होंठ मेरे कह जाये
जब प्यार करू उसको तो मर्यादा बह जाये
ब्रह्मचर्य की बात नहीं बस गोपिभाव रह जाये

जिसके हिस्से के दुःख मेरी किस्मत बन गयी हो
दू अब उसको पूर्ण भक्ति जो वासना में भी लुट गयी हो
धोखा जिसे सारे जहाँ से मिलता रहता हो
बहुत बुरी गालिया जिसका दिल सदा सहता हो

भाव की उलझनों में खोयी हुई वो पागल बहुत प्यारी हो
अपने जीवन में सारी उम्मीदे वो खो चुकी सारी हो
तब कही से उसके भाग्य का भास्कर बनकर आऊंगा
छुपी हुई उसकी प्रेमाभक्ति तब कृष्ण से मांग लाऊंगा

बिन फेरे ही वो अर्धांगिनी बनकर जी लेगी
दुनिया जिसकी बस एक झलक देखने को तरसेगी
दहेज़ में जो बस मुझे खोयी हुई अमानत देगी
पुण्य से भरी उसकी झोली परिवार में खुशिया भर देगी

सारे जीवन का वो आधार उसके कदम बड़े शुभ होंगे
सबको सुलभ रही पर फिर देवताओ को भी दर्शन दुर्लभ होंगे
वही तो प्रेरणा बनी सारे नए इतिहास लिखने को
बाल्मीकि या तुलसीदास के नए ग्रन्थ की रचना करने को

जहा वो मौत मांगती थी वहा से जीवन की शुरुवात होगी
उन्ही गलत कदमो से तो उसके सही होने की बात होगी
तब खुलेगा एक नए युग के राज का परदा
जैसे पूर्णब्रह्म जन्म लेता हैं यदा यदा

बहुत समय हो चला है
जिन्दगी को बर्बाद होते होते
अपनी आत्मा के उस टुकडे को बस प्रभु अब मिला दो
गुरुमंत्र बापूजी आपका दिया हैं बस कृपापात्र बना दो

नयी धर्म कि एक परिभाषा लिखने का वक्त आया हैं
बापूजी , सरल और चरम बिंदु का मिलना ईश्वर को भाया हैं
कुछ कुछ आकाशवाणी जैसा हो जाने का प्रारब्ध हैं
अद्भुत संयोग हो जाने का बस एक दौर आरंभ हैं

पिता हो या परमपिता हो अब तो सब मिल ही सकते हैं
दीपक को भले तरस जाये पर सूरज उसके चमक सकते हैं

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...