वेदव्यास और वशिष्ठ जी के बीच सबंध
ब्रहमाजी के नौ मानस पुत्रों में से एक है वाशिष्ठ जी । इनकी पत्नी न का नाम अरुंधती है।इनके शक्ति आदि चार पुत्र हुए । शक्ति जी के पुत्र हुए पराशर जी जिनके बाद की पीढियां पाराशर गोत्र से परिभाषित की गई
पराशर जी बहुत ही ऊंचे संत थे । उनको एक अद्भुत संयोग का पता था, वो संयोग था कि अगर वो किसी स्त्री से विशेष समय पर विवाह करते हैं तो वो स्त्री इश्वर का जन्म देगी । इसीलिए उन्होंने उस पल का इंतज़ार किया और खास समय पर एक अति निर्धन कन्या मत्स्यगंधा ( सत्यवती ) से विवाह के लिए उसके पिता का सामने प्रस्ताव रखा । धीवर पिता ने आज्ञा दे दी। सत्यवती के गर्भ धारण के बाद मुनि पराशर चले गए ।
इन्ही सत्यवती ने कालांतर में भगवन वेदव्यास को जन्म दिया ।
वेद व्यास जी के पुत्र हुए :: प्रसिद्ध भागवत भास्कर श्री शुकदेव मुनि जो दिगम्बरी थे । और ख़ुद भी जो पूर्ण ब्रह्म परमात्मा का साक्षात्कार कर गए । इन्होने ही परीक्षित को सात दिन के लिए श्रीमद भागवत सुनाई थी .