सोमवार, 30 नवंबर 2009

वंशावली -भाग चार ( भगवन कृष्ण और अर्जुन वंश )


वैसे तो भगवान् कृष्ण और अर्जुन चन्द्रवंश में ही आते है परन्तु कालांतर में कृष्ण जी यदुवंश और अर्जुन पुरुवंश या कुरुवंश में माने जाते हैं । परन्तु कौरव और पांडव भरत के वंशज माने जाते हैं ।

ब्रह्मजी के नौ मानस पुत्रो में से एक ऋषि अत्री को हम सब जानते हैं । उनकी पत्नी सती अनसूया को भी सभी धार्मिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति जानते ही हैं । इनमे ब्रह्म जी के अंश से चंद्रमा का जन्म हुआ । देवगुरु ब्रहस्पति की पत्नी तारा और चन्द्रमा से बुध का जन्म हुआ । बुध और इला से पुरुरवा का जन्म हुआ ।
इला एक शापित स्त्री थी । जो वास्तव में एक पुरूष था । वो महाराजा मनु का पुत्र था और उसका नाम था राजा सुद्युम्न । वो राजा एक बार एक वन में शिकार खेलने गया । शिव जी और माता पार्वती उस वन में विहार कर रहे थे । माता पार्वती के संकोच को दूर करने के लिए शिव जी ने कहा कि शिव जी के अलावा कोई भी पुरूष इस वन में प्रवेश करेगा वो स्त्री हो जाएगा ।
तब भगवन शिव के श्राप से राजा सुद्युम्न एक स्त्री हो गए और इनका पड़ा इला । इला और बुध का पुत्र हुआ -पुरुरवा । पुरुरवा और अप्सरा उर्वशी के विवाह से विजय आदि छः पुत्र हुए

अब यहाँ से यदुवंश और पुरुवंश शुरू होता है
पुरुरवा और उर्वशी के विजय और आयु आदि छः पुत्र हुए ,
आयु के पुत्र हुए नहुष जो एक बार इंद्र भी बन गए थे पर देवी शची और सप्तर्षि के श्राप के कारन पदच्युत हो गए थे । नहुष के बेटे हुए ययाति , ययाति के देवायनी से दो पुत्र हुए यदु और तुर्वशु । ययाति के शर्मिष्ट से पुरु आदि तीन पुत्र हुए । पुरु सबसे छोटे थे । यदुवंश में श्री कृष्ण हुए और पुरुवंश में अर्जुन हुए ।

यदुवंश
यदु से बारहवी पीढ़ी में में विदर्भ हुए । विदर्भ से इक्कीसवीं पीढ़ी में सात्वत्त हुए । सात्वत्त के पुत्र हुए वृशनी और अन्धक । अन्धक पीढ़ी में देवकी जी हुई । वृशनी के पड़ पोते का नाम भी वृशनी ही था । इस पडपोते के दो बेटे हुए । चित्ररथ और श्वाफल्क । श्वाफल्क से तीन पीढ़ी बाद सत्यकी हुए ।
चित्ररथ से आठ पीढ़ी बाद वासुदेव जी हुए और उनके पुत्र हुए
भगवान् श्री कृष्ण
भगवन श्री कृष्ण >प्रद्युम्न >अनिरुद्ध >वज्रनाभ
अब इससे आगे का आप ख़ुद भी ग्रंथों से सन्दर्भ ले सकते हैं । वैसे यदुवंश अभी भी चल रहा है यादवों या अहीरों के नाम से ।

अर्जुन वंश
राजा पुरु से ही शुरू करते हैं । पुरु की उन्नीस वे पीढ़ी में रैभ्य का जन्म हुआ । रैभय से दुष्यंत , और फ़िर दुष्यंत
और शकुन्तला से राजा भरत । भारत ने दत्तक पुत्र भरद्वाज को राजा बनाया जो बहुत विवादस्पद था राज परिवार के लिए , परन्तु भारत ने योग्यता के अनुसार चुनाव किया ।
भरद्वाज के ब्रह्तक्ष्त्र ,उनके हस्ती ( हस्तिनापुर इन्ही के नाम से बना ) हस्ती के अज्मीध फ़िर चार पीढ़ी बाद कुरु
जिनके नाम से आगे वाली सारे पीढ़ी कुरुवंश या कौरव कही जाने लगी । फ़िर कुरु से चौदह पीढ़ी बाद शांतनु और देवापी दोनों भाई हुए । देवापी बड़े थे पर वो तपस्या के लिए चले गए । जब भगवान् कल्कि जन्म लेंगे तब वे फ़िर प्रगट होंगे। शांतनु के बेटे भीष्म पितामह ,चित्रांगद और विचित्रवीर्य हुए ।
विचित्रवीर्य >पांडू >अर्जुन >अभिमन्यु >परीक्षित >जन्मेजय
फ़िर जन्मेजय के बाद छब्बीसवीं पीढ़ी में रजा क्षेमक अन्तिम राजा हुए .

रविवार, 29 नवंबर 2009

वंशावली भाग तीन ( भगवन राम का वंश )



राम जी का वंश या सूर्य वंश भी कह सकते हैं क्योंकि सातवे मनु सूर्य के पुत्र थे।
इनका वंश सतयुग से प्रारम्भ होता है । जो राम के जन्म के बाद महाभारत के युद्ध यानी कलियुग के शुरू तक रहता है । कृपया देखे

महाराजा मनु के पुत्र हुए राजा इक्ष्वाकु । इक्ष्वाकु के एक भाई थे राजा नृग जो अपनी दानशीलता के कारन प्रसिद्ध थे । हालाँकि उन्हें एक बार दान दोष के कारन गिरगिट बनाना पड़ा और फ़िर भगवन कृष्ण ने उनका उद्धार किया।
राजा इक्ष्वाकु की पंद्रहवी पीढ़ी में युवनाश्व हुए । उनके पुत्र मान्धाता हुए, मान्धाता के पुत्र मुचुकंद हुए । ये वोही मुचुकंद है जिनका भगवन कृष्ण ने कालयवन को मारने के लिए प्रयोग किया था ।
मुचुकंद की पांचवी पीढ़ी में प्रसिद्ध सत्यवादी राजा हरीश चन्द्र हुए। उनके बेटे रोहिताश्व हुए ।

फ़िर रोहिताश्व के आठ पीढ़ी बाद राजा सगर हुए जिनके पुत्र असमंजस फ़िर अंशुमन फ़िर दलीप फ़िर भागीरथ क्रमशः चार पिता पुत्र हुए । भागीरथ वही हैं जो गंगा जी को पृथ्वी पर लेकर आए ।


भागीरथ की पाँच पीढ़ी बाद ऋतुपूर्ण हुआ । ये नल का दोस्त था , वही नल जिनके पत्नी दमयंती थी। नल का पोता सौदास हुआ । सौदास की छटी पीढ़ी में राजा खट्वांग हुए जिन्हें घोड़े के रकाब में पैर डालते डालते इस्वर की प्राप्ति हो गई थी । अब पिता पुत्र के क्रम से पढ़िए ....


खट्वांग > दीर्घबाहु >रघु >अज >दशरथ >श्री राम चन्द्र




श्री राम के पुत्र कुश की सोलहवी पीढ़ी में राजा मरू हैं । ये आज भी जीवित हैं। भगवन कल्कि के जन्म के समाये ये प्रकट है । अभी ये कलाप ग्राम में अज्ञात रहकर तपस्या कर रहे हैं । ये भीष्म पितामह के समकालीन हैं तथा भीष्म के चाचा देवापी के साथ रह रहें हैं । राजा मरू के छः पीढ़ी बाद ब्रह्द्व्ल हुए जिसे महाभारत में अभिमन्यु ने मारा था । ब्रह्द्व्ल की 31 वीं पीढ़ी में राजा सुमित्र अन्तिम राजा हुए ।




उम्मीद है मेरा प्रयास आपको सहायक होगा .

वंशावली - भाग दो .. मनु जी के बारे में


इससे पहली पोस्ट में मैं संक्षेप में काल गणना के बारे में बता चुका हूँ ।
अब थोड़ा सा पहले मनु महाराज को भी शामिल करना होगा क्योंकि सृष्टि क्रम उनसे ही बनता है ।
चारों युग मिलकर एक चतुर्युग बनता है । इन एक हज़ार चतुर्युग को मिलाकर एक कल्प बनता है । ये ब्रह्माजी का एक दिन होता है । ब्रह्माजी जी की आयु सौ वर्ष की होती है । उनके एक वर्ष में 365 दिन होते है । कल्प का परिमाण मैं आपको पहले ही बता चुका हूँ ।
मनुजी का कल ही वास्तव में समय की कुंजी है । एक कल्प में चौदह मनु होंगे । तो अब एक हज़ार चतुर्युग को चौदह हिस्सों में बाँट लीजिये , एक मनु जी का कल होगा। लगभग 71 या 72 चतुर्युग हो सकता है एक मनु का कल। अब तक सात मनु हो चुके हैं । सबसे पहले मनु थे स्वयम्भुव मनु और अब सातवे मनु है वैवस्वत मनु , उनका नाम उनके पिता विवस्वान ( जो इस बार के सूर्य हैं ) के कारन है । वैसे उनका नाम सत्यव्रत मनु है।
इन्ही सातवे मनु के कारन भगवान् ने मत्स्यावतार लिया था जो इनका इस कल्प का पहला पूर्ण अवतार था ।
तो अब जितनी भी वंशावली होंगी मैं उन्हें मनु से जोड़ कर दिखाऊंगा या ब्रह्म जी से जिससे सृष्टि क्रम को आपको सटीक पता चलेगा की हम मनुष्यों और देवताओं के लिए ये दोनों सबसे जरुरी हैं ।

वंशावली ( सृष्टि क्रम )-भाग एक -


!! राम !!
!! हरि ॐ !!
जय श्री गणेश !!!!!!!!!!!!!!!!



सनातन धर्म के अनुसार वंशावली समझने के लिए समय और इससे जुड़े कुछ वंशो के बारे में संक्षेप में पता होना बहुत जरुरी है । जैसे कल्प , अयन ,चन्द्रवंश और सूर्य वंश । इन्ही वंशो में सारे देवी देवताओं , राजे महाराजों का वर्णन आ जाता है । यह पोस्ट कई भागो में होगी क्योंकि इसमे बहुत जटिल सबंध हैं। मैं पूरी कोशिश करूँगा कि सरल तरीके से एक एक वंश का वर्णन करूँ । यह पहला भाग है । पहले समय की गणना को लेते हैं ।

गीता के अनुसार और प्रमाणिक ग्रंथो के अनुसार हमारे चोबीस घंटे या आठ पहर का एक दिन होता है । हमारे छः महीने के समय में देवताओं का एक दिन या एक रात होता है । उत्तरायण और दक्षिणायन को देवताओं का क्रमशः देवताओं का दिन और रात माने जाते हैं । अभी कलयुग चल रहा है इसका काल चार लाख बत्तीस हज़ार साल के बराबर होगा । भगवन कृष्ण के स्वधाम गमन के बाद कलयुग शुरू हुआ है । पहला युग सतयुग होता है जिसका समय दूसरे युग त्रेता युग से दुगना होगा । त्रेता का तीसरे युग द्वापर युग से दुगना और द्वापर युग का चौथे युग कलयुग से दुगना होगा।

अब सृष्टि कालऔर वंश की बात अगली पोस्ट में करुगा ..

रविवार, 22 नवंबर 2009

है वही भाग्यवान जो भगवान् को चाहे-स्वर श्री सुरेशानंदजी




यह भजन मैंने 2002 में सुना था और पहली बार में इतना अच्छा लगा याद कर लिया । आशा है कि सभी गुरु भाईओं को यह पसंद होगा । यह भजन आश्रम के कैसेट "भक्ति अमृत " में है ।



है वही भाग्यवान जो भगवान् को चाहे ,भगवन को चाहे
विद्वान होके नित्य विद्यमान को चाहे विद्यमान को चाहे
हरि हरि हरि हरि

भोगी सदा ही भोग के सामान को चाहे ,
अभिमानी सदा अपने ही सम्मान को चाहे
वह त्यागी तपस्वी भी कीर्ति दान को चाहे ,
वह देव पुजारी भी तो वरदान को चाहे
कोई चाहे पुराण या कुरान को चाहे , हरि हरि ........है वही
कितने ही अपने भले बुरे काम में भूलें,
कुछ नाम में भूलें है कोई नाम में भूलें
कोई हज़ार लाख जोड़ दाम में भूले ,
जो रूप के मोहि है गोरे चाम में भूले ,
भूले नही वो जो दयानिधान को चाहे , हरि हरि .......है वही
रहता है भिखारी सदा धनवान के पीछे ,
मोहि भूला करता है संतान के पीछे
दुर्बल रहा करता है बलवान के पीछे ,
खोता है मुरख सब कुछ अज्ञान के पीछे
पर बुद्धिमान प्रभु के ही विधान को चाहे , हरि हरि .......है वही
जो नित्य विद्यमान है वह दूर नही है ,
वह सर्वमय है साक्षी है और यही है
सब उसी के भीतर है जो कुछ भी कहीं है ,
हम भूले हुए जहाँ भी है वह भी वही है
यह पथिक किसी विधि उन्ही महान को चाहे , हरि हरि .....है वही

भगवान् वही जिससे सब पूरे होते काम ,
भगवान् से प्रकाशित है सारे रूप नाम
भगवान् में ही जीव को मिलता परम विश्राम ,
सबके वही परम आश्रय है सतचित आनंद धाम
जो ज्ञान में है इसी अधिष्ठान को चाहे .
हरि हरि हरि हरि !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

मीरा जी का अविस्मर्णीय एवं प्रेमाभक्ति पूर्ण गीत

जिनको कृष्ण की भक्ति सुहाती है उन्हें मीरा जी की श्रेष्ठता कहने की आवशयकता नही है। दुर्गम परिस्थितिओं के होते हुए भी उन्होंने ईश्वर प्रेम को नही त्यागा और हमारे जैसे सरल साधकों के लिए एक अद्भुत उदहारण बनकर चली गयी । अभी भी वृन्दावन और द्वारिका जैसे कृष्ण लीलास्थालों पर मीरा जी के काल की झलकियाँ मिल ही जाती हैं । उनके भजन इतने प्यारे और सरल है जो सदा प्रासंगिक लगते हैं । उन्ही में से एक भजन है जो काफी अच्छा है ।

जगत के रंग क्या देखू तेरा दीदार काफी है,
चली जाऊ मैं वृन्दावन तेरा दरबार काफी है
करूँ मैं प्यार किस किस से , तेरा एक प्यार काफी है
नही चाहिए ये दुनिया के निराले रंग ढंग मुझको ,
चली जाऊँ मैं वृन्दावन तेरा दरबार काफी है
दुनिया के साजे बाजों से हुए है कान अब बहरे ,
कहा जाके सुनु अनहद तेरी झंकार काफी है ,
चली जाऊँ मैं वृन्दावन तेरा दरबार काफी है
जगत के रिश्तेदारों ने बिछाया जाल माया का ,
बुला लो बैकुंठ में मुझको तेरा परिवार काफी है ,
चली जाऊँ मैं वृन्दावन तेरा दरबार काफी है

गुरुवार, 19 नवंबर 2009

महाभारत के युद्ध के बाद भीष्म जी का स्वर्गारोहण

हम सबको धन्यवादी होना चाहिए बी आर चोपड़ा जी का और रामानंद सागर जी का जिन्होंने दोबारा से भारतीय संस्कृति के पुरातन काल को बिल्कुल जीवंत कर दिया था । अब जैसे महाभारत के इस आखिरी दृश्य को ही लें।नितीश भारद्वाज बिल्कुल ऐसे लग रहे हैं जैसे वास्तव में कृष्ण ही खड़े हो । भीष्म या मुकेश खन्ना जी इस मौके पर भगवन से विदा मांगते है । नीचे वाला चित्र इसी को चित्रित करता है । सभी शोकाकुल हैं पर अर्जुन तो बिल्कुल ही टूट जाते हैं और फूट फूट कर रोने लगते हैं और हृदय से निकले ये बोल बोलते हैं
" पितामह मैं आपको नही जाने दूँगा "


अब आखिरी चित्र के आने से पहले जो आवाज गूंजती है वो हम कभी नही भूल सकते
"महाभारत सा युद्ध न हो , न हो अन्याय की कोई बात
चलो हम हो ले उसके साथ, करें जो कृष्ण के जैसी बात
कर्म है गीता का उपदेश ,महाभारत है शान्ति संदेश

बापूजी के दो भजन - श्री सुरेशानंदजी के स्वर में

हम बापूजी के साधको को सुरेशानंद जी के भजन हमेशा बहुत ही अच्छे लगते हैं ।
  1. मैं पूरी कोशिश करूँगा की हर भजन को हिन्दी में टाइप करके यहाँ पोस्ट कर दूँ। इन्ही में से एक भजन जो बहुत ही प्यारा लगता है । ये भजन है " साधारण जन जानते भये चोबीस अवतार" और सीडी/कैसेट का शीर्षक है गुरु चालीसा । इस कसेट में गुरु चालीसा और इस भजन के अलावा भी एक भजन है जिसका शीर्षक है " जीवमात्र के कल्याण हेतु गुरुवार ने पृथ्वी स्वीकारी "
पहला भजन
साधारण जन जानते भये चौबीस अवतार ,
अंशरूप में आ ही चुके है कई बार करतार
ज्ञानी और अवतार में भेद एक है यह जान ,
ज्ञानी बरते दैव ते अवतार को न कछु आन
योगी को दे योग या दे ज्ञानी को ज्ञान ,
भक्ति पावे भक्त जन वो जिज्ञासु महान
विरले ही देखे यहाँ ऐसे संत सुजान ,
हमको तो भई मिल गए साईं आषाराम!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

दूसरा भजन
जीव मात्र के कल्याण हेतु गुरुवार ने पृथ्वी स्वीकारी ,
लखा पुत्र को गुरु रूप में माता मह्न्गीबा न्यारी
लाखो वर्ष बाद में देखि माता ऐसी सुविचारी
सांख्य शास्त्र के जनक कपिल मुनि की थी ऐसी महतारी
पुत्र को लाख गुरु रूप में ब्रह्म ज्ञान को पाया था
गिरते हुए मानव समाज के हित में लाल जनाया था
ब्रह्म रूप उन कपिल मुनि को पुत्र रूप में पाया था
देवहूति ने तज स्वार्थ को जनकल्याण कराया था
माँ की मंशा पूर्ण कपिल प्रभु ने ऐसे करवाई थी
नव कन्यो के के बाद में आकर नवधा भक्ति जगाई थी
त्रय बहनों के बाद में आकर गुरु ने ये दर्शाया है
द्वार भक्ति और ज्ञान कर्म का हमने खुल्ला पाया है ।

रविवार, 15 नवंबर 2009

सरल कुमार की सफल या असफल शादी : आप निर्णय ले



जिसका सबको यकीन था वो नही हो पाया , सरल कुमार को एक लड़की ने पसंद कर ही लिया ।
हम लोगो से ज्यादा सरल कुमार को हैरानी हो रही थी । आख़िर लंगूर के हाथ एक हूर जो लग गई थी । पर कुछ सालो बाद पता नही क्या हुआ , हमें तो बस इतना ही पता चला कि बस एक एक लेटर ने दोनों को जुदा कर दिया । आइये एक एक करके इन दोनों को पढ़ते हैं । पहला लेटर सरल कुमार की पत्नी ने लिखा था उसका मसाला ये हैं :-
......
प्रिय सरल ( Ex-पतिदेव ),
मैं आपको आखिरी पत्र लिख रही हूँ । मैंने तुम्हारे साथ सात साल तक बहुत निभाया पर दो हफ्तों से मेरी जिंदगी नरक हो गई थी , इसीलिए मैंने तुमसे अलग होने का फ़ैसला ले लिया हैं , कई वजहे हैं जैसे :::
पिछले हफ्ते तुम्हारे बॉस ने बताया कि तुम बिना वजह अपनी जॉब छोड़ रहे हो ,भला इस recession में पाँच हज़ार कि जॉब कौन छोड़ देता हैं , जबकि लोग बिना तनख्वाह के जॉब कर रहे हैं । तुमने मेरे नए हेयर स्टाइल को देखा ही नही और मेरी नई ड्रेस को देखकर तो ऐसे भाव तुमने चेहरे पर लाये जैसे इसके पैसे तुमने दिए हो । उस दिन मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे प्रिय खास राजमा चावल बनाये थे । बिना कुछ कहे तुम सोने चले गए ।
धन्यवाद
तुम्हारी
प्रिया ( और हाँ मुझे ढूँढने कि कोशिश मत करना , क्योंकि मैं और हमारा नौकर रामू एक नई
जिंदगी कि शुरुवात करने जा रहे हैं । रामू कह रहा हैं कि सारा इंतजाम वो पिछले हफ्ते ही
कर चुका हैं , इसीलिए पैसे कि कोई दिक्कत नही होगी ।)
............................................................

अब सरल कुमार जी का जवाब पढ़ा तो समझ में आया , मसाला ये हैं
प्रिय प्रिया ,
तुम नही जानती इस पत्र ने मुझे कितनी खुशी दी हैं ।असल में पिछले दो हफ्ते से मेरे साथ बहुत कुछ अजीब हो रहा था , दिमाग ही काम नही कर रहा था । रामू ने पिछले हफ्ते दो हज़ार रुपये उधार मांगे थे । तुम्हारे ड्रेस पर दो हज़ार का टैग देख कर मैं तो पागल हो गया था । तुम्हारा नया हयेर स्टाइल लड़को जैसा था ।
ऊपर से तुम भूल गई कि राजमा चावल मुझे नही हमारे नौकर रामू को पसंद था । बताओ, इस बात पर मैं चुपचाप सोने चला गया तो मैंने क्या गलती की ।
पिछले दो हफ्ते से मेरे तीनो क्रेडिट कार्ड नही मिल रहे थे । तुम्हारे पत्र के बाद मैंने बंद करवा दिए हैं। शायद रामू के पास अब बस पैसे नही होंगे । कोई बाद नही तुम दोनों पति पत्नी किसी भी घर में नौकर और बाई बनकर खूब ऐश कर सकते हो।
जहाँ तक मेरी जॉब की बात हैं , पाँच करोड़ कि लॉटरी लगने के बाद कौन बुद्धू पाँच हज़ार के लिए जॉब करेगा । खैर मैं तुम्हे खुश देखकर खुश हूँ .
तुम्हारा Ex-पति
सरल कुमार
( और हाँ इस रामू के बारे में तरह तरह की अफवाह हैं , सबसे पहली तो ये हैं कि ये पहले "रीमा "
थी )





एक कविता /कंपनी/ ऑफिस आदि कि टुच्ची राजनीति / सरल कुमार को गुस्सा क्यों आता है



सरल कुमार एक कम्पनी कर्मचारी भी है । कई कंपनियों के कर्मचारिओं के आपसी सबंधो से सबको परेशानी होती है । इसी माहौल को चरितार्थ करती है ये कविता । आशा है आपको पसंद आएगी

धन्यवाद भेज देना नही तो हो सकता है कि एक प्रतिभाहीन कवि समय से पहले निराश हो जाए । फ़िर आप क्यों जिम्मेदार रहे किसी को हतोत्साहित करने के लिए । ये काम तो सरल कुमार के लिए उसके हालत ही कर देंगे। तो कविता का झूठा आनंद उठाये और अपने कीमती समय को इस बोरिंग कविता से अर्थहीन बनायें , तो यहाँ से शुरू होती है कविता ----

उनकी उलझी गुत्थी को सुलझाने में हमारा माथा दुःख जाता है

सबके उल्टे कामो से हमारा कोमल दिल टूट जाता है

और फ़िर उनको लगता है कि मुझे गुस्सा बहुत आता है ..

उनकी टेढी चालों से बस उनका हित सध जाता है

उनके स्वार्थ में लिप्त हर काम प्रोफेशनल कहलाता है

कोई किसी का नही यहाँ पर बस पैसों का ही नाता है

गुस्सा ही दीखता उनको प्यार मेरा छुप जाता है

उनकी हर गलती पर मैं हैरान कभी नही होता हूँ

बस उनके बुरे वक्त के आ जाने से मैं डरता हूँ

जब हंस के हिस्से कि खुशी कौवा लूट ले जाता है

पता नही तब उनको लगता है कि मुझे गुस्सा बहुत आता है।

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दूसरी कविता है , हालाँकि ये थोडी inspired है ( चोरी कि हुई है जसपाल भट्टी जी के फ्लॉप शो से ,आख़िर सरल कुमार कोई अनु मलिक से कम थोड़े ही है inspiration लेने में ) अपनी नासमझी की वजह से शायद सरल कुमार उपहास का पात्र तो बन ही जाता है

ये ऑफिस है बेईमानो का हैवानो का , इस ऑफिस का यारों क्या कहना

घूमे निठ्ठले यहाँ सारे बारों में , खड़े सीधे बेचारे बेकारों में

क्रेडिट सारा झूठे ले जाते हैं , सच्चे तो काम कि कीमत भी नही पाते हैं

चमचों कि तरक्की मिनटों में , सीधो को पेनाल्टी सेकंडों में

यहाँ काम की कीमत जीरो है , यहाँ बॉस का चमचा हीरो है ,


वो नटखट विद्यार्थी जीवन और बहाने





1 जिस दिन काम न किया हो तो उस दिन का सॉलिड बहाना

सर कॉपी घर रह गई ,काम तो किया था

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२ जिस दिन छुट्टी कर लेते थे उससे अगले दिन का बहाना

सर बुखार था । ( आज तक ऐसा कोई thermometer नही बना जो आपका बीते

हुए कल का बुखार चेक कर सके।

इस बहाने पर अक्सर टीचर कुछ नही कहते थे पर कई कमीने फ़िर भी धुनाई कर ही देते थे.

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३ जब क्लास में किसी प्रश्न का उत्तर नही पता होता तो सिर्फ़ नही में सिर हिला देते थे

तो सर हमेशा कहते थे " दस किलो का सर हिला दिया , दस ग्राम की जीभ नही हिला सकता "

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४ पिटाई से बचने का रामबाण तरीका

सर इसको डॉक्टर ने पीटने से मन किया है । ये वाकई सबसे सॉलिड बहाना था।

शनिवार, 14 नवंबर 2009

अच्छे लोग




अच्छे व्यक्ति ही धर्म को परिभाषित करते हैं । उन्हें बड़े बड़े कर्मकांड करके इश्वर को मनाने में दिलचस्पी नही है बल्कि अपने अपने आस पास के लोगो की सेवा करके भी धर्म को निभाना तो कोई उनसे सीखे।

"ऐसे लोगों की वजह से ही धर्म अभी जीवित है। "

एक कविता

सरल कुमार के हृदय से निकली ये आधी अधूरी कविता आपको ज्यादा पसंद नही आएगी ।
क्योंकि उसकी प्रतिभा पर आपसे ज्यादा उसे शक है । पर खाली पीली दिमाग का दही करने की बात ही और है
बधाई लिख कर न भेजे नही तो सरल कुमार समझ जाएगा की आप झूठ बोल रहे है




सरल कुमार - एक परिचय


मैंने एक पात्र चुना है जो बहुत धार्मिक है , शिक्षित है इंजिनियर और एम् बी ऐ दोनों है । उसे हर तरह की पूरी जानकारी है जैसे राजनीतिक , धार्मिक ,विज्ञान आदि । शायद कोई क्षेत्र उससे अछूता नही है । दूसरे को फायदा
पहुंचाने के लिए वो ख़ुद दुःख उठाने को तैयार है । इन सबके बाद भी वो ख़ुद को एक अति साधारण व्यक्ति महसूस करता है । वो एक हमारे जैसा कंपनी में काम करने वाला सामान्य सा व्यक्ति है । बहुत हद तक वो मेरे जैसा है ।
जैसे जैसे पोस्ट बढती जाएँगी वो हर माहौल को जियेगा चाहे वो सुख का हो दुःख का हो , व्यंग्य हो या सामाजिक अवहेलना हो आर्थिक तंगी या कोई भी आयाम । पारिवारिक पृष्ठभूमि में देखे तो उसे शहरी और गाँव दोनों तरह की
अच्छी जानकारी है
धन्यवाद्
वीरेन्द्र रावल

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...