
पुरानी फिल्मो के गीतकारों में इन्दीवर मुझे सबसे अच्छे लगते हैं । उनकी कुछ कृतियाँ अगली पोस्टों में डालूँगा । इन्ही में से एक हैं लता जी का "सफ़र " फिल्म का शर्मीला टैगोर पर फिल्माया ये गीत
हम थे जिनके सहारे वो हुए ना हमारे
डूबी जब दिल की नैया सामने थे किनारे
क्या मुहब्बत के वादे क्या वफ़ा के इरादे
रेत की हैं दीवारें जो भी चाहे गिरा दे
हम थे जिनके सहारे .................
हम थे जिनके सहारे वो हुए ना हमारे
डूबी जब दिल की नैया सामने थे किनारे
क्या मुहब्बत के वादे क्या वफ़ा के इरादे
रेत की हैं दीवारें जो भी चाहे गिरा दे
हम थे जिनके सहारे .................
है सभी कुछ जहाँ में दोस्ती हैं वफ़ा हैं
अपनी ये कमनसीबी हमको ना कुछ भी मिला हैं
हम थे जिनके सहारे .................
यूँ तो दुनिया बसेगी तन्हाई फिर भी डसेगी
जो जिंदगी में कमी थी वो कमी तो रहेगी
हम थे जिनके सहारे .................