मै यहाँ कमेन्ट करने गया था
http://kavyawani.blogspot.com/2011/02/blog-post_13.html
फिर कविता बन गयी , आशा हैं आप लोगो को पसंद आये
अब मेरी कविता आगे पढ़े
बूँद बूँद जिसका मै अमृत समझकर गटक गया
मन मेरा उस विष को पीकर भटक गया
क्या प्यार क्या कसमे क्या वादे कोई झटक गया
ना राम ना काम बस मन कही अटक गया
अब तू ही बचाए तो मै जिन्दा रहूँगा
आखिरी साँस तक वर्ना मरता रहूँगा
एक सुख तेरे प्यार का जिस्म कि नस नस में हैं
और कहा कुछ अब दुनिया मेरे बस में हैं
मुझे नहीं पता कि ये मधु था या विष था
प्यार था या मुझे मिटाने कि साजिश था
दुनिया के लोग कहेंगे कि मै नशा करता था
चुपके से तेरी आँखों में जिया करता था
सांसो का तेरी हर पल अंदर भरता था
तू बता क्यों "वीरेन " तुझ पर मरता था
मेरी ऐसी हालत तेरे नशे से थी या खुद का अहम् था
प्यार मेरा सच्चा था या किसी वासना का वहम था
रग रग में दौडती पीड़ा की सुइया गया मै सहम था
मुझ साधक को रुला दिया कैसा ईश्वर का रहम था
हर दर्द हर चीज़ की एक सीमा होती हैं
ताकत मदिरा के नशे की भी कभी धीमा होती हैं
फिर क्यों ना मेरे लिए साकी को तरस आया
नैनो में क्यों ना उसके प्यार का सावन बरस आया
क्यों झूठे प्यार के इतिहास लिखे जाते हैं
जब पूरे सच्चे लोग तरसाए जाते हैं
क्यों मधुशालाये ही बस बदनाम होती हैं
साजिशो की क्यों राहे ना हराम होती हैं
मै रहू ना रहू पर क्या मेरे ना रहने से सब लुट नहीं जायेगा
कभी मधुशाला ना गया मै पर अतीत मुझे नशेडी कहायेगा
इतिहास ना जाने की हर नशे में झूमता शख्स शराबी नहीं हैं
भुन दिया गया जिसे तंदूर में वो सदा कबाब कही हैं
जिसकी आँखों में सपने सदा के लिए चूर चूर हो गए हो
प्याले से भी कही ज्यादा कांच के टुकड़े दिल में टूट गए हो
परम ब्रह्म के प्रारब्ध के लायक पर जीवत्व सांचे भी फूट गए हो
इंद्र को हराने वाले महाभारत के अर्जुन को जैसे भील लूट गए हो
वही वीरेन जो ज्ञान में कभी रमा करता था
उद्धव सी छटा का स्वामी कृष्ण पर हंसा करता था
गोपियों को परम निर्गुण जो बनाने जो कभी कृष्ण से अड़ा था
वही लुटकर अब वृन्दावन के नशे में मिटटी पोत खड़ा था
क्या नशा प्यार का और क्या मधुशाला में रखा हैं
हाथ जोड़ लो परमात्मा को सब उसने रचा हैं
मै उसका और वो अब मुझे अपनाने जुटा हैं
परमात्मा "वीरेन " को बस अब बुलाने उठा हैं .
रविवार, 13 फ़रवरी 2011
शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011
कृष्ण प्रेम को समर्पित एक साधिका के शब्द
ये कविता वैसे तो एक कृष्ण साधिका को समर्पित हैं पर बीच में मुझ बेवक़ूफ़ से एक प्रेमिका के भाव भी लिखे गए . सभी परम भक्त जन मेरी धृष्टता को क्षमा करे और इसे राधा जी द्वारा लिखी गयी कृष्ण को प्रेमपाती समझे या फिर एक सरल साधिका का अपने प्रेमास्पद को अपनी व्यथा कहना . मार्गदर्शन दे
तू गया हैं भूल कि तुने ही ये दिल चुराया हैं
भगवान प्रार्थनाओ से मिला तू मेरा हमसाया हैं
मन समय के इस दौर में शांत और बिलकुल मौन हैं
तू बता तेरा अलावा मेरे आंसू पीने वाला कौन हैं
हालातो को समझने का कुछ मुझे भी समय दे
मै परेशान हू बहुत अपनी बाहों में बस आश्रय दे
आत्मा तुझमे मिल चुकी बस शरीर लगता बोझ हैं
ना इलाज दुनिया में नस नस में चुभता ये रोग हैं
मै तेरी अब सदा के लिए फिर क्यों मुझे विरह से मार देता हैं
जब तुझसे सुकून माँगा अनोखी बातो से बांध देता हैं
अगर तू ही नहीं समझेगा तो फिर तो कुछ आशा नहीं
तू ना सहारा देगा फिर क्या बचा दूसरा भगवान कही
मेरी बातो का भी क्या बुरा मानना सब तेरा ही तो दिया हुआ हैं
जिम्मेदारियो में मर गया तन मेरा सिर्फ तेरी आस से जिया हुआ हैं
क्या मेरे हालात तुझे साफ़ साफ नहीं दिखाई देते
किस्मत के चुभे ये नश्तर क्या मदद की दुहाई नहीं देते
तुम कहाँ मै कहाँ बस मै तो वैसे ही मरी हुई हैं
तुम्हारा दुःख कैसे दूर करू जब अपनों में ही घिरी हुई हू
आँखे भी मुझसे कहती हैं पहचान लिया ना तुने अपना
तेरी दुआओ से देख सच हो गया "वीरेन " जैसा भी सपना
तुम क्यों नहीं कर देते ये प्यार का मौसम सुहाना
समां लो अपने आप में मुझे चाहे रूठ जाये जमाना
अपनी आत्मा से कोई भला नाराज़ होता हैं
तुम्हे परेशान करने की सोचना भी भगवान से धोखा हैं
मै ही तेरी राधे प्रिया फिर भी क्यों मुझे तंग करता हैं
मेरे आंसू पोंछ दे क्यों मुझे अलग समझता हैं
मै बहुत मजबूर हू कभी तो समझा करो
बस तुझसे ही आशा हैं इतना तो साथ दिया करो
मुझे मौका मिलेगा तो मै अपनी साँस साँस तुझे दे दूंगी
तेरे सारे दुखो को अपने दिल में लेकर सच में जान दे दूंगी
बस सिर्फ इस अंतिम दौर में मुझे तुम्हारी जरुरत हैं
कृष्ण तुम मेरी आत्मा हो भविष्य की भी ये एक हकीकत हैं
--
!! श्री हरि : !!
बापूजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे
तू गया हैं भूल कि तुने ही ये दिल चुराया हैं
भगवान प्रार्थनाओ से मिला तू मेरा हमसाया हैं
मन समय के इस दौर में शांत और बिलकुल मौन हैं
तू बता तेरा अलावा मेरे आंसू पीने वाला कौन हैं
हालातो को समझने का कुछ मुझे भी समय दे
मै परेशान हू बहुत अपनी बाहों में बस आश्रय दे
आत्मा तुझमे मिल चुकी बस शरीर लगता बोझ हैं
ना इलाज दुनिया में नस नस में चुभता ये रोग हैं
मै तेरी अब सदा के लिए फिर क्यों मुझे विरह से मार देता हैं
जब तुझसे सुकून माँगा अनोखी बातो से बांध देता हैं
अगर तू ही नहीं समझेगा तो फिर तो कुछ आशा नहीं
तू ना सहारा देगा फिर क्या बचा दूसरा भगवान कही
मेरी बातो का भी क्या बुरा मानना सब तेरा ही तो दिया हुआ हैं
जिम्मेदारियो में मर गया तन मेरा सिर्फ तेरी आस से जिया हुआ हैं
क्या मेरे हालात तुझे साफ़ साफ नहीं दिखाई देते
किस्मत के चुभे ये नश्तर क्या मदद की दुहाई नहीं देते
तुम कहाँ मै कहाँ बस मै तो वैसे ही मरी हुई हैं
तुम्हारा दुःख कैसे दूर करू जब अपनों में ही घिरी हुई हू
आँखे भी मुझसे कहती हैं पहचान लिया ना तुने अपना
तेरी दुआओ से देख सच हो गया "वीरेन " जैसा भी सपना
तुम क्यों नहीं कर देते ये प्यार का मौसम सुहाना
समां लो अपने आप में मुझे चाहे रूठ जाये जमाना
अपनी आत्मा से कोई भला नाराज़ होता हैं
तुम्हे परेशान करने की सोचना भी भगवान से धोखा हैं
मै ही तेरी राधे प्रिया फिर भी क्यों मुझे तंग करता हैं
मेरे आंसू पोंछ दे क्यों मुझे अलग समझता हैं
मै बहुत मजबूर हू कभी तो समझा करो
बस तुझसे ही आशा हैं इतना तो साथ दिया करो
मुझे मौका मिलेगा तो मै अपनी साँस साँस तुझे दे दूंगी
तेरे सारे दुखो को अपने दिल में लेकर सच में जान दे दूंगी
बस सिर्फ इस अंतिम दौर में मुझे तुम्हारी जरुरत हैं
कृष्ण तुम मेरी आत्मा हो भविष्य की भी ये एक हकीकत हैं
--
!! श्री हरि : !!
बापूजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...
-
सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...
-
सुबह सुबह लोग भक्ति के संगीत में डूबने का नाटक करते हुए उस भगवान् को बेवक़ूफ़ बनाते हैं जो हम सबसे ज्यादा चालाक हैं और...
-
सबसे पहले तो आप का धन्यवाद जो आपने अपना कीमती समय ख़राब करने की ठान ही ली हैं । दूसरा सरल कुमार जी बेचारे महत्वाकांक...