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गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

वैराग्य पूर्ण भजन - एक खुद मस्ती बिन और मस्त ............

यह थोडा वैराग्य जगाने वाले भजनों में से एक हैं । इसके मूल लेखक और मूल स्रोत का मुझे अभी पता नहीं हैं । आप में किसी को पता हो तो कृपया मुझे बताये जिससे मैं वो भी यहाँ लिख सकू ।
ये भजन मैंने बापूजी के सत्संग में सुना हैं । मूल भजन में कई शब्द कठिन हैं । इसीलिए उनकी जगह पर मैंने साधारण शब्द डाल दिए हैं । इस भजन में बताया गया हैं की हम सब बस किसी ना किसी चीज़ को एक तरह से अपनी जिम्मेदारी बनाकर या समझकर पूरी जिंदगी बना लेते हैं । कुछ ना कुछ बहाना सा बना ही रहता हैं जीवन का । फिर भी संत हमें बताते हैं की थोडा अपने जीवन के मूल उद्देश्य को प्राप्त करने पर भी ध्यान देना चाहिए । उस मूल को प्राप्त ना करने के कारन हम अविद्या रूप फांसी में फंस कर मार जाते हैं ।
आशा हैं ईश्वर यात्रा के पथिको को यह पसंद आएगा

कोई अकल मस्त कोई शकल मस्त कोई चंचलताई हांसी में
कोई वेद मस्त कितेब मस्त कोई मक्के में कोई काशी में
कोई ग्राम मस्त कोई धाम मस्त कोई सेवक में कोई दासी में
एक खुद मस्ती बिन और मस्त सब बन्दे अविद्या फांसी में

कोई हाल मस्त कोई माल मस्त कोई तूती मैना सुए में
कोई खान मस्त पहरान मस्त कोई राग रागिनी दोहे में
कोई अमल मस्त कोई रमल मस्त कोई शतरंज चौपड़ जुए में
एक खुद मस्ती बिन और मस्त सब बन्दे अविद्या कुए में

कोई पाठ मस्त कोई ठाठ मस्त कोई भैरो में कोई काली में
कोई ग्रन्थ में कोई पंथ मस्त कोई श्वेत पीत रंग लाली में
कोई काम मस्त कोई खाम मस्त कोई पूरण में कोई खाली में
एक खुद मस्ती बिन और मस्त सब अविद्या जाली में

कोई हाट मस्त कोई घाट मस्त कोई वन पर्वत उजाड़ा में
कोई जात मस्त कोई पांत मस्त कोई तात भ्रात सूत दारा में
कोई कर्म मस्त कोई धर्म मस्त कोई मस्जिद ठाकुर द्वारा में
एक खुद मस्ती बिन और मस्त सब बहे अविद्या धारा में

कोई रिश्तो में मस्त कोई ख़ाक मस्त कोई खासे में कोई मलमल में
कोई योग मस्त कोई भोग मस्त कोई स्थिति में कोई चलचल में
कोई ऋद्धि मस्त कोई सिद्धि मस्त कोई लेन देन की कलकल में
एक खुद मस्ती बिन और मस्त सब फंसे अविद्या दलदल में

कोई उर्ध्व मस्त कोई अधः मस्त कोई बहार में कोई अंतर में
कोई देश मस्त विदेश मस्त कोई औषध में कोई मंतर में
कोई आप मस्त कोई ताप मस्त कोई नाटक चेटक तंतर में
एक खुद मस्ती बिन और मस्त सब बन्दे अविद्या अंतर में

कोई खाली पेट मस्त कोई भरे पेट मस्त कोई दीर्घ में कोई छोटे में
कोई गुफा मस्त कोई सूफा मस्त कोई तुम्बे में कोई लोटे में
कोई ज्ञान मस्त कोई ध्यान मस्त कोई असली में कोई खोटे में
एक खुद मस्ती बिन और मस्त सब रहे अविद्या टोटे में

ऐसी ही कुछ हमारी दशा होती हैं और हम कोई ना कोई बहाना बना ही लेते हैं पर जब तक ईश्वर की कृपापूर्ण आत्मस्ती या भक्ति का प्रसाद नहीं मिलता तब तक तो सब कुछ पाया अनपाये के समान ही हैं ।
धन्यवाद
वीरेन्द्र

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...