bhagwaan bhagwaan avtar avtaar vishnu ansh narayan balram chaitanya mahaprabhu prishni sutapa shri hari hans haygreev madhu kaitabh लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
bhagwaan bhagwaan avtar avtaar vishnu ansh narayan balram chaitanya mahaprabhu prishni sutapa shri hari hans haygreev madhu kaitabh लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 10 जनवरी 2010

वंशावली भाग ग्यारह - भगवान् विष्णु के चौदह अंशावतार ( हयग्रीव , हंस आदि )

बारहवां अवतार ( हयग्रीव अवतार )

यह सतयुग का अवतार माना जाता हैं । भगवान् विष्णु ने ये जन्म मधु कैटभ आदि राक्षसों का वध करने और वेदों की रक्षा करने के लिए ये जन्म लिया था । कही कही वैसे इससे अलग भी वृतांत हैं जैसे कि एक हयग्रीव राक्षस हुआ उसने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान माँगा । ब्रह्मा जी ने असंभव वरदान को बदलने के लिए कहा तो उसने वर माँगा कि मेरे जैसा ही दूसरा हो तो वो ही बस मेरा वध कर सके तो भगवान् विष्णु ने उस जैसा बनकर उसका वध किया ।
भगवान् विष्णु का स्वरुप इसमें सिर घोड़े जैसा और पूरा शरीर मानव जैसा था । इस अवतार का अभी बस इतना सा ही वर्णन ही प्राप्त हुआ ।

तेरहवां अवतार ( भगवान् हंस ) :-
भगवान् ने यह अवतार एक बार फिर धर्म के उत्थान के लिए हंस के रूप में लिया । इसका जब पूरा वर्णन मिल जायेगा तो मैं यहाँ पोस्ट कर दूंगा ।

चौदहवां अवतार :-
अब इसी अवतार को लेकर सबसे ज्यादा विवाद हैं । प्रमाणिक अगर कोई अवतार हो सकता हैं तो सुतपा और प्रिशनी के दाम्पत्य से उतपन्न हुए प्रिश्निगार्भा । ये भगवान् ही चौदहवे अवतार माने जा सकते हैं ।
जो अवतार कई शास्त्रों में आया हैं वो हैं भगवान् कृष्ण के भाई बलराम । पर क्योंकि वो शेषनाग ही थे तो इसमें संदेह हो सकता हैं । चैतन्य महाप्रभु को भी कुछ लोगों ने अवतार माना हैं पर हर विवाद में संप्रदाय विशेष अपने समुदाय में उत्पन्न महापुरुष को अवतार घोषित करता हैं । कुछ लोगो ने पूर्ण ब्रह्म परमात्मा के सगुन रूप आदि नारायण भगवान् को भी एक अवतार मान लिया हैं ।
इसमें मैं बस यही कहना चाहता हूँ , तेरह अवतार तक तो कोई विवाद नहीं हैं पर चौदहवे में प्रिशनी गर्भा के अतिरिक्त भी दावे किये गए हैं । पर श्री हरि सबमे हैं और हमें तो बस भक्ति रस में जीना चाहिए । वैसे भी इश्वर तो नित्य प्रगट अवतार हैं , सिर्फ हमारे हित के लिए वो अवतार लेता हैं । तो इसीलिए " हरि अनंत " ।

अब भगवान् के दस पूर्ण अवतार और चौदह अंश अवतारों का कार्य समाप्त हुआ । आप सभी मेरा मार्गदर्शन करें अगर कही कोई गलती हो गयी हो

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...