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शनिवार, 27 मार्च 2010

दैनिक कड़िया भाग चार

टी वी पर एक एड आती हैं कोलगेट पेस्ट कि जिसमे लारा दत्ता पूछती हैं " क्या आपके टूथ पेस्ट में नमक हैं " । मतलब वह यही कहना चाहती हैं कि टूथपेस्ट में नमक जरुरी हैं
अब इसका प्रासंगिक पहलु यह हैं कि चीजों को बेचने में सारी समझ और नैतिकता परे कर देना किसी कि जवाबदेही क्यों नहीं बनतापिछले शायद चालीस साल से यही कम्पनी बिना नमक के पेस्ट खिला रही थीतब ये क्यों जरुरी नहीं था ये हिंदुस्तान का सबसे पुराना नुस्खा जिसमे दंतमंजन के तौर पर समुद्री नमक इस्तेमाल किया जाता था

हमारे यहाँ लोकतंत्र हैंइसका सबसे बड़ा मजाक हैं कि हमारे लोकतान्त्रिक पद पर बैठे सर्वोच्च पदाधिकारी प्रधानमंत्री जी लोगो द्वारा चुनकर नहीं आये हैंसंविधान का इससे बड़ा अपमान क्या होगा कि छोटे से छोटा जनप्रतिनिधि भी लोगो से चुनकर आता हैं लेकिन जो इन सबसे ऊपर हैं वो खुद वास्तव में जन प्रतिनिधि हैं ही नहींपता नहीं खुद तो कहते हैं कि जनता चुनती हैं फिर क्यों एक ही परिवार के लोग सर्वेसर्वा हैं इस पार्टी के और फिर हम ये भी चाहते हैं कि छोटे स्तर या अधिकारी स्तर पर भाई भतीजावाद ख़त्म होये कैसे खत्म हो सकता हैं जब सारा कुछ ऊपर से ही गड़बड़ हैं

महिलाओ के लिए तैतीस प्रतिशत आरक्षण करने वाले शायद भूल गए कि हमारे यहाँ सरपंच का चुनाव भी पति कि छवि से ही जीतती हैंहमारे यहाँ ढांचा ही हैं कि चुनाव जीतने के बाद कागज पत्नी के नाम होंगे पर निर्णय सारे पति के होंगेअसल में यह काम कभी कभी ( तैंतीस प्रतिशत ) वाला मुझे लगता हैं कि सारे सांसद अब अपनी पत्नी बहु और बेटी को लड़वाएंगे । कुल मिलाकर फिर छियासठ प्रतिशत भागीदारी पारिवारिक रहेगीइससे तो एक फायदा होगा कि अगर कोई ताकतवर नेता होगा तो इससे तो चार पांच सांसद तो उसके खुद के घर के होंगे
खैर

मैं इंजीनियरिंग क्षेत्र से सम्बन्ध रखता हूँ , सबसे ज्यादा आजकल जो कॉलेज खुले हुए हैं वो इंजीनियरिंग के ही हैं
सारे नियम कायदे तक पर रखकर सरकार और AICTE ने जो भ्रष्टाचार मचाया हैं पता नहीं उसकी छानबीन क्यों नहीं होतीइनको कौन बताये कि इंजीनियरिंग करने के बाद नए पास आउट छात्रो को कितना भटकना पड रहा हैंआप कुछ इंजीनियरिंग कॉलेज को देखेंगे तो दिल टूट जायेगा कि कैसे कुछ मुर्गी फार्मो को हॉस्टल का रूप दिया गया हैंऔर खेतो में कॉलेज खुले हैं जहाँ दूर दूर तक कोई दुनिया ही नहींहमारे जो नए जूनियर रहे हैं वो बेचारे कोलेज में इतनी महँगी फीस देने के बाद कम्पनी में आठ आठ हज़ार कि नौकरी भी करने को विवश हैंक्योंकि इंजिनियर ही इतने पैदा हो गए हैंइसमें सबसे बुरा तो हमारे हरियाणा , खासकर गुडगाँव और फरीदाबाद में हो रहा हैंजरा आंकड़े देखिये हरियाणा में 1995 में सिर्फ छः इंजीनियरिंग कोलेज हैं और अब 125 हैंइसमें हालाँकि कुछ लोग तो MBA कोलेज जोड़कर कुल दो सौ से ऊपर के आंकड़े बताते हैंकुछ पैसो के लालच में सरकार और तकनिकी रणनीतिकारो ने देश के साथ घोर अन्याय किया हैं

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...