टी वी पर एक एड आती हैं कोलगेट पेस्ट कि जिसमे लारा दत्ता पूछती हैं " क्या आपके टूथ पेस्ट में नमक हैं " । मतलब वह यही कहना चाहती हैं कि टूथपेस्ट में नमक जरुरी हैं ।
अब इसका प्रासंगिक पहलु यह हैं कि चीजों को बेचने में सारी समझ और नैतिकता परे कर देना किसी कि जवाबदेही क्यों नहीं बनता । पिछले शायद चालीस साल से यही कम्पनी बिना नमक के पेस्ट खिला रही थी । तब ये क्यों जरुरी नहीं था ये हिंदुस्तान का सबसे पुराना नुस्खा जिसमे दंतमंजन के तौर पर समुद्री नमक इस्तेमाल किया जाता था ।
हमारे यहाँ लोकतंत्र हैं । इसका सबसे बड़ा मजाक हैं कि हमारे लोकतान्त्रिक पद पर बैठे सर्वोच्च पदाधिकारी प्रधानमंत्री जी लोगो द्वारा चुनकर नहीं आये हैं । संविधान का इससे बड़ा अपमान क्या होगा कि छोटे से छोटा जनप्रतिनिधि भी लोगो से चुनकर आता हैं लेकिन जो इन सबसे ऊपर हैं वो खुद वास्तव में जन प्रतिनिधि हैं ही नहीं । पता नहीं खुद तो कहते हैं कि जनता चुनती हैं फिर क्यों एक ही परिवार के लोग सर्वेसर्वा हैं इस पार्टी के और फिर हम ये भी चाहते हैं कि छोटे स्तर या अधिकारी स्तर पर भाई भतीजावाद ख़त्म हो । ये कैसे खत्म हो सकता हैं जब सारा कुछ ऊपर से ही गड़बड़ हैं ।
महिलाओ के लिए तैतीस प्रतिशत आरक्षण करने वाले शायद भूल गए कि हमारे यहाँ सरपंच का चुनाव भी पति कि छवि से ही जीतती हैं । हमारे यहाँ ढांचा ही हैं कि चुनाव जीतने के बाद कागज पत्नी के नाम होंगे पर निर्णय सारे पति के होंगे । असल में यह काम कभी कभी ( तैंतीस प्रतिशत ) वाला मुझे लगता हैं कि सारे सांसद अब अपनी पत्नी बहु और बेटी को लड़वाएंगे । कुल मिलाकर फिर छियासठ प्रतिशत भागीदारी पारिवारिक रहेगी । इससे तो एक फायदा होगा कि अगर कोई ताकतवर नेता होगा तो इससे तो चार पांच सांसद तो उसके खुद के घर के होंगे ।
खैर ।
मैं इंजीनियरिंग क्षेत्र से सम्बन्ध रखता हूँ , सबसे ज्यादा आजकल जो कॉलेज खुले हुए हैं वो इंजीनियरिंग के ही हैं ।
सारे नियम कायदे तक पर रखकर सरकार और AICTE ने जो भ्रष्टाचार मचाया हैं पता नहीं उसकी छानबीन क्यों नहीं होती । इनको कौन बताये कि इंजीनियरिंग करने के बाद नए पास आउट छात्रो को कितना भटकना पड रहा हैं ।आप कुछ इंजीनियरिंग कॉलेज को देखेंगे तो दिल टूट जायेगा कि कैसे कुछ मुर्गी फार्मो को हॉस्टल का रूप दिया गया हैं । और खेतो में कॉलेज खुले हैं जहाँ दूर दूर तक कोई दुनिया ही नहीं । हमारे जो नए जूनियर आ रहे हैं वो बेचारे कोलेज में इतनी महँगी फीस देने के बाद कम्पनी में आठ आठ हज़ार कि नौकरी भी करने को विवश हैं । क्योंकि इंजिनियर ही इतने पैदा हो गए हैं । इसमें सबसे बुरा तो हमारे हरियाणा , खासकर गुडगाँव और फरीदाबाद में हो रहा हैं । जरा आंकड़े देखिये हरियाणा में 1995 में सिर्फ छः इंजीनियरिंग कोलेज हैं और अब 125 हैं । इसमें हालाँकि कुछ लोग तो MBA कोलेज जोड़कर कुल दो सौ से ऊपर के आंकड़े बताते हैं । कुछ पैसो के लालच में सरकार और तकनिकी रणनीतिकारो ने देश के साथ घोर अन्याय किया हैं ।
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