poem on love hindi hindu blog saralkumar saral zte virender लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
poem on love hindi hindu blog saralkumar saral zte virender लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 1 मई 2010

सच्चा प्यार - मेरी पांचवी कविता

इस कड़ी में मेरी ये पांचवी कविता हैं । प्यार आपको ईश्वर से हो सकता हैं । अपने किसी परिवार के सदस्य से या किसी मित्र से हो सकता हैं । मुख्य बात समर्पण और त्याग की हैं । दुःख तो प्यार में हमेशा मिलेगा क्योंकि आप इसमें हमेशा अपने सुख को त्याग देते हो और सारा सुख अपने प्रियतम के लिए ही चाहते हो । हालाँकि प्रेम करना बहुत मुश्किल हैं । सच में प्रेम कभी किया नहीं जाता ये तो बस हो जाता हैं । प्रेम को कभी भी शारीरिक संपर्क की भी चाह नहीं होती । सिर्फ आपकी फीलिंग ही आपके प्रेमी में प्यार के भाव जगा देती हैं ।
प्रेम में आप अपने साथी को उसकी सारी बुराई और अच्छाई से सच्चे मन से स्वीकार कर लेते हो । बस प्रेम के लिए शब्दों की कमी पड़ जाती हैं ।
इसका थीम प्यार ही हैं और जो आज पहली बार पढ़ रहे हैं वो इसका चौथा भाग पड़े , उसमे इससे भी पिछले भाग की कविताओं का लिंक दिया हैं .
http://saralkumar.blogspot.com/2010/04/blog-post_14.html

अब आप मेरी नयी कविता को पढ़े जो कभी मेरे जीवन में घटी थी .


क्या करू जब मेरी किस्मत सोयी, तेरे दर्शन को मेरी अंखिया रोई
पिछला जब मुझे चिंतन आता हैं, तेरा हँसता चेहरा याद आता हैं
दिल के तारो में संगीत आता हैं , जब तेरा खिलता होठ दिख जाता हैं
पतझड़ भी सावन लग जाता हैं जब तुझसा साथी मिल जाता हैं

वर्तमान का जब सुख ठुकराता हूँ , तब तुझे याद कर पाता हूँ
जब प्यार की हद खो जाता हूँ , सारी रस्मे बस तोड़ आता हूँ

प्रकृति के नियम में मैंने बदलाव किया
अपने कर्तव्य को प्यार का भाव दिया
अपनी मुक्ति खोकर तेरा बंधन थाम लिया
सिर्फ हरि के लिए सारा जीवन तेरे नाम किया

इश्वर की दया से सब वही हुआ
जैसा मैंने सोचा वो तो सही हुआ
भूत के गर्भ को भविष्य से बदल पाया था
जब तुझमे मेरी ही चेतना बनकर आया था

तेरे अपराधो की सजा मुझे गयी
तेरे आंसुओ को मेरी आँख भा गयी
पर मैं तुझे कभी समझा नहीं पाउँगा
प्रकृति के सारे रहस्य ना खोल पाउँगा
क्योंकि यहाँ ज्ञान जैसी कोई बात ही नहीं हैं
बिना शर्तो पर जो होता हैं प्यार बस वही हैं

बस इतनी सी बात पर मेरे सारे गम मिट जाते हैं
हरि इच्छा से लिपटे तेरे स्वर जब ये कह पाते हैं
"इतनी सच्चाई से तुम वीरेन सब कह जाते हो
अपने दर्द को बस तुम शांत सह जाते हो
मेरे मन को कैसे पढ़ पाते हो
जो मैंने सोचा वही कैसे बातो में ले आते हो
तुम ईश्वर का कोई रहस्य सा लगते हो
इसीलिए वीरेन तुम सबसे अच्छे लगते हो "

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...