हरि शरणम् लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
हरि शरणम् लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 3 अप्रैल 2010

जिंदगी में सब इतना ख़राब लगता हैं कि जीने का मन नहीं करता ।

मेरे पोस्ट ज्यादातर यथार्थ , दुःख और धर्म से जुड़े होते हैंअसल में जीवन में यही सब देखा हैं इसीलिए क्रिकेट ,फ़िल्मी मस्ती , राजनीति में अब मजा नहीं आता हैंबीस साल ( अभी तीस ) तक कि उम्र तक ही सब देखकर लगा कि दुनिया में कही गड़बड़ हैंमाया मोह समाज धर्म को समझने कि कोशिश कि तो थोडा थोडा वैराग्य आयाइंजीनियरिंग पूरी करते करते दोस्त तो प्रोफेशनल हो चुके थे पर मैं एक सन्यासी जैसे साधारण हो चुका थाकोई ज्यादा अच्छा बुरा सोचा नहीं हर चीज़ को गहरे में उतरने नहीं दिया सिवाय धर्म और वैराग्य के

खैर मैं ये सब बाते इसीलिए लिख रहा हूँ आप में से बहुत से लोग सच में बहुत अच्छे हैं जो टिपण्णी भी देते हैं जबकि मैं खुद किसी को टिपण्णी नहीं देता हूँसारे समाज को देखकर लगता हैं कि जैसे हम सब मदहोश से जी रहे हैं बिना किसी मार्गदर्शन केबस शायद सत्तर अस्सी साल कि उम्र तक होकर मर जाने के लिए सारा संघर्ष हैंसाथ के कई दोस्त देहांत को प्राप्त हो चुके हैंअभी कल ही मेरी एक एक्स क्लास मेट (MBA में ) कि मृत्यु का पता चलासारा प्रोफेशनल और इंजीनियरिंग प्रोफाइल धडाक धूमसब इतना ख़राब लगता हैं कि जीने का मन नहीं करता

कहाँ
हम सरकारों में कमी निकालते हैंपर घर में एक साथ कुछ दुर्घटना हो जाये तो बस सब ख़त्मफिर आप समाज से लगभग पांच साल पीछे चले जाते हो क्योंकि आपको भावनाए समाज के साथ संतुलन नहीं बनाने देतीसांसारिक काम इतने मुश्किल लगते हैं कि लगता हैं क्यों हम सब जैसे जिंदगी को बोझे कि तरह ढोए जा रहे हैंजैसे एक सच्चा उदहारण बताता हूँमेरे पिता जी 2004 में मेरे इंजीनियरिंग के आखिरी साल में स्वर्गवासी हुएअब क्योंकि मेरे अकेले के लिए तो एग्जाम डेट बदलेंगी नहींसाल ख़राब होगा , यहाँ जिंदगी ख़राब हो गयी और प्रोफेशनल सोच कह रही हैं कुछ और

उस
महीने में हम दूरसंचार इंजिनियर के लिए G P S तकनीकी कि ट्रेनिंग भी मिली और मैंने उसमे अच्छे नम्बर भी लायेपर क्या ये सही लगता हैं कि जिंदगी कि मूलभूत चीजों को छोड़कर हम बेमतलब कि तथाकथित वैज्ञानिक जानकारी और भी ना जाने क्या क्या प्रोफेशनल एप्रोच जैसे भंवर जहाँ एक आदमी खो जाता हैं
सब कहते हैं कि ईश्वर दयालु हैंऔर वो वास्तव में हमारी अपेक्षा से ज्यादा दयालु हैंफिर भी हम उसकी तरफ जाने में क्यों आलसी हो जाते हैं

मेरी
तो उम्र खैर तीस साल ही हैं पर मैंने साठ सत्तर साल के लोगो को दुनिया के मामलो में बुरी तरफ फंसे देखा और ऊपर से मुझ जैसे बन्दों को भी नसीहते देते सुना कि बेटा अपने कम धंधे करो परिवार से निभाओ आदि आदि बातेये सब बाते तो हम कर ही रहे हैंपर दिक्कत यही तो हैं कि हमसे ये दुनिया ये जिंदगी कभी भी छीन सकती हैं , और बस कुछ व्यावहारिक लोग हमारी मृत्यु पर बाते ही बनाते दिखेंगे कि बंदा अच्छा था बुरा , ऐसे हुआ वैसे हुआऔर फिर पंद्रह दिन बाद फिर जिंदगी वही

अभी जैसे ब्लॉग को ही लेमुझे किसी ने पिछले साल कहा था कि ये एक अच्छा मंच हैंपर अब यहाँ भी वही अखबार और मीडिया के लोगो ने गन्दगी फैलाकर हिन्दू मुस्लिम माहौल तैयार कर दिया हैं
पता नहीं छः सो ग्राम के दिमाग से उस ईश्वर को जज करते हैं जो खुद कहता हैं कि मुझे कोई नहीं जनतावैसे एक दो पोस्ट मैंने इस पर भी लिखी थी पर कुछ ज्ञान शिरोमणि मुझे सीख देने गए कि ये तो सरल रस्ते हैं और आपकी ये बाते तो पहले भी लिखी हैंबड़ी मुश्किल से ऐसे लोगो से चरण वंदना करके बचता हूँइनमे से दो के लिंक ये हैं
ईश्वर को कैसे जाने
http://saralkumar.blogspot.com/2010/03/blog-post_06.html
ईश्वर प्राप्ति के सरल साधन
http://saralkumar.blogspot.com/2010/03/blog-post_19.html
जीवन का उद्देश्य
http://saralkumar.blogspot.com/2010/03/blog-post_1312.html

हर बात के बात मेरे कहने का मतलब यही हैं क्यों नहीं हम सब एक दुसरे को प्यार करते , क्यों नहीं मदद करते एक दुसरे कि , समर्थन क्यों नहीं करतेपता नहीं कितने दिन कि जिंदगी हैं सब क्यों बरबाद करे ऐसी बातो में कि हिन्दू बड़े या मुस्लिमकांग्रेस या भाजपा , अमेरिका या चीन

सारा
संक्षेप तो यही हैं कि व्यवहार के लिए थोडा थोडा तो करें पर व्यर्थ समय ख़राब करके एक एक घंटे न्यूज़ वालो से बहस करना ठीक नहीं हैं । हमने बस टाइम पास करना होता हैंकभी उस ईश्वर से भी पूछे कि तू क्या चाहता हैंतेरे इस एक तरफा प्यार पर हमें अपनी शरण में ले क्यों हम डरे और डरे , फंसे और फंसाए .

गुरुवार, 25 मार्च 2010

हरि चरणों में अंतिम प्रार्थना ( आर्त भक्त )

हे मेरे इष्टदेव ! हे हरि , हे गुरुदेव!

अब इस संसार कि मुझे कोई चाह नहींहर तरफ तो तेरे प्रोफेशनल लोगो कि भीड़ हैं जिसे आपसे प्रेम करने में भी मतलब चाहिएमुझे तो इन्होने मानसिक रोगी ही समझ रखा हैंऔर इनकी इस समझ को प्रभु आपने भी तो इतना सहारा दिया हैंजब भी ये दुनिया मुझे नोच रही होती हैं तो मैं अंदर से रो रहा होता हूँ , उस वक्त प्रभु आप भी उसी भीड़ का एक हिस्सा होते हैं , और छोटे बच्चे बनकर मेरे हालात पर ताली पीट रहे होते हैंमैं क्या करू प्रभु अपने इस एकतरफा प्यार पर

मेरी बेबसी देखिये प्रभु आपके चतुर्भुजी रूप को देखता हूँ चित्र में कि कहीं से आप साकार होकर जायेंगेपर आप तो उन महंगे महंगे मंदिरों में माता लक्ष्मी के साथ संगमरमर के महलो में रह रहें हैंमेरे साथ यहाँ कुछ भिखारी भी हैं जो बस थोडा खाना खाकर सो गए हैं पर आपको सुना हैं कोई छप्पन भोग चखाया जा रहा हैंमैं कैसे मानु कि इतने अमीर बाप का मैं बेटा हूँतुम तो हर पल सत्ताधीशो को सत्ता देने वाले हो मैं तो सवा गज में सिकुड़ा बैठा हूँ
मुझसे अच्छे तो भ्रष्ट और चरित्रहीन लोग ही हैं जो कम से कम तसल्ली से जी तो रहें हैंमेरा इधर तो जीना हराम हैं ही ऊपर से आपके धाम में भी पता नहीं हमसे आई कार्ड माँगा गया तो उस पर आपके हस्ताक्षर नहीं मिलेंगेवो तो आपके इमानदार पार्षद हैं मुझे धक्का देने में पल कि भी देरी ना लगायेंगेआपने पता नहीं अपना ऑफिस कहाँ खोला हैं कि मैं वही भीख मांग लूचाहे आप ना देखे , प्रभु आप चाहे झिड़क देपर उस मुक्ति के एक रुपये के सिक्के पर मेरे जीवन का सार हैं
मैं पहले समाज में धार्मिक माना जाने लगा थाइसीलिए यहाँ कि दुनिया ने मुझसे थोड़े व्यावहारिक काम छीन लिए । आपके धाम में जाने कि अब ओकात रही नहींबस इसी चिंता में रात दिन घुलते घुलते अधमरा सा हो गया हूँ कि बस " बैकुंठ " एम्बुलेंस बस गयी हैं लेने मैं गुरुमंत्र जपने का नाटक करता हूँ और बेहोश हो जाता हूँले जाओ प्रभु मुझे यहाँ से , मुझमे ताकत और बुद्धि नहीं बची हैंयहाँ तो बस सारे दिमाग वाले प्रोफेशनल लोगों का काम हैं मेरे जैसे दिल से सोचने वाला बुद्धिहीन का नहीं

हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् ,
हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् ,

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...