hai vahi bhagyan jo bhagwan ko chahe gore chaam me bhule sureshanand ji bapuji ashram bhajan hindu hindi blog virender saral zte ishwar krishan ram bhakti saadhak लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
hai vahi bhagyan jo bhagwan ko chahe gore chaam me bhule sureshanand ji bapuji ashram bhajan hindu hindi blog virender saral zte ishwar krishan ram bhakti saadhak लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 22 नवंबर 2009

है वही भाग्यवान जो भगवान् को चाहे-स्वर श्री सुरेशानंदजी




यह भजन मैंने 2002 में सुना था और पहली बार में इतना अच्छा लगा याद कर लिया । आशा है कि सभी गुरु भाईओं को यह पसंद होगा । यह भजन आश्रम के कैसेट "भक्ति अमृत " में है ।



है वही भाग्यवान जो भगवान् को चाहे ,भगवन को चाहे
विद्वान होके नित्य विद्यमान को चाहे विद्यमान को चाहे
हरि हरि हरि हरि

भोगी सदा ही भोग के सामान को चाहे ,
अभिमानी सदा अपने ही सम्मान को चाहे
वह त्यागी तपस्वी भी कीर्ति दान को चाहे ,
वह देव पुजारी भी तो वरदान को चाहे
कोई चाहे पुराण या कुरान को चाहे , हरि हरि ........है वही
कितने ही अपने भले बुरे काम में भूलें,
कुछ नाम में भूलें है कोई नाम में भूलें
कोई हज़ार लाख जोड़ दाम में भूले ,
जो रूप के मोहि है गोरे चाम में भूले ,
भूले नही वो जो दयानिधान को चाहे , हरि हरि .......है वही
रहता है भिखारी सदा धनवान के पीछे ,
मोहि भूला करता है संतान के पीछे
दुर्बल रहा करता है बलवान के पीछे ,
खोता है मुरख सब कुछ अज्ञान के पीछे
पर बुद्धिमान प्रभु के ही विधान को चाहे , हरि हरि .......है वही
जो नित्य विद्यमान है वह दूर नही है ,
वह सर्वमय है साक्षी है और यही है
सब उसी के भीतर है जो कुछ भी कहीं है ,
हम भूले हुए जहाँ भी है वह भी वही है
यह पथिक किसी विधि उन्ही महान को चाहे , हरि हरि .....है वही

भगवान् वही जिससे सब पूरे होते काम ,
भगवान् से प्रकाशित है सारे रूप नाम
भगवान् में ही जीव को मिलता परम विश्राम ,
सबके वही परम आश्रय है सतचित आनंद धाम
जो ज्ञान में है इसी अधिष्ठान को चाहे .
हरि हरि हरि हरि !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...