हम सभी ने थोडा बहुत नरसी भगत या नरसी मेहता के बारे में सुना हैं । सौराष्ट्र गुजरात में इन्होने पंद्रहवी सदी में जन्म लिया था । इन्हें सूर्यवंशी भगवान् श्रीराम के पूर्वज राजा मुचुकंद का पुनर्जन्म माना गया । भगवान् कृष्ण ने इनके वरदान के प्रभाव से कालयवन जैसे राक्षस को भस्म किया था । फिर भगवान् कृष्ण ने अगले जन्म में भक्ति का वरदान दिया जिससे यही राजा मुचुकंद भक्त नरसी मेहता के रूप में आये । इनके भजन बहुत लोकप्रिय हैं । " वैष्णव जन तो तेने रे कहिये जे पीर परायी जाने रे " वाला भजन तो महात्मा गाँधी जी ने आत्मसात किया था । इनके ऊपर जो 1957 में "नरसी भगत फिल्म बनी थी जिसमे ये नीचे वाला भजन लिखा गया था । कुछ लोगों ने "slumdog millionarie" फिल्म देखने के बाद इसे सूरदास जी का भजन मान लिया जो एक गलत तथ्य हैं । नरसी भगत फिल्म का भजन ये हैं :-दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे
मन मंदिर की जोत जगा दो घटघट बासी रे
मन्दिर मन्दिर मूरत तेरी ,फिर भी दिखे ना सूरत तेरी
युग बीते ना आई मिलन की पूरनमासी रे ,दर्शन दो ...........
द्वार दया का जब तू खोले पंचम सुर में गूंगा बोले
अँधा देखे लंगड़ा चलकर पहुंचे काशी रे ,दर्शन दो ..........
पानी पीकर प्यास बुझाऊ नैनों को कैसे समझाउं
आँख मिचौनी छोडो अब मन के बासी रे ,दर्शन दो .....
निर्बल के बल धन निर्धन के तुम रखवाले भक्त जनो के
तेरे भजन में सब सुख पाऊ मिटे उदासी रे , दर्शन दो ......
नाम जपे पर तुझे ना जाने उनको भी तू अपना माने
तेरी दया का अंत नहीं हैं हे दुःख नाशी रे , दर्शन दो .........
आज फैसला तेरे द्वार पर मेरी जीत हैं तेरी हार पर
हर जीत हैं तेरी मैं तो चरण उपासी रे , दर्शन दो ......
द्वार खड़ा कब से मतवाला मांगे तुमसे हार तुम्हारी
नरसी की ये विनती सुनलो भक्त विलासी रे , दर्शन दो ...
लाज ना लुट जाये प्रभु तेरी नाथ करो ना दया में देरी
तीन लोक छोडो अब कर दो गंगा निवासी रे
दर्शन दो घनश्याम नाथ
मोरी अँखियाँ प्यासी रे .................