शनिवार, 20 मार्च 2010

सरल्कुमार को किराये के मकान की किल्लत ( हास्य व्यंग्य )

सुबह सुबह लोग भक्ति के संगीत में डूबने का नाटक करते हुए उस भगवान् को बेवक़ूफ़ बनाते हैं जो हम सबसे ज्यादा चालाक हैं और हर लिहाज़ मसलन दिमाग , ताकत और हर चीज़ में हमारे बापों का भी बाप हैं पर सरल तो ठहरा थोडा भावुक बंदा जो हमेशा सोचता हैं की इन सब औपचारिकताओ में कुछ पैसे नहीं आते इसीलिए आज वो बेखौफ होकर सुबह सुबह गाना गा रहा था " आवारा राही बंजारा , बन के क्यों घूमे लापता , मुस्करा मेरे दिल ले जिंदगी का मज़ा " कुल मिलकर सरल जी आज हवा से बातें करते हुए जा रहें हैं

कि अचानक सीढ़ी से उतरते हुए मकान मालकिन क़ी आवारा मुस्कान ने सारा दिन के लिए लापता होते सरल को स्वरों में मूर्त रूप दिया कि क़ी बेटा जॉब कैसी चल रही हैं । ये बड़ा ही धर्मसंकट में डालने वाला प्रश्न हैं अगर हाँ कहा तो बेटा जी का किराया बढ़ना तय हैं और अगर ना कहा तो इमेज घटनी तय हैं कि इस बुद्धू को कम्पनी बस झेल रही होगी

अब
सरल को जवाब तो देना ही था उसने बड़े ही धांसू तरीके से बताया , आंटी जी वो कम्पनी के मैनेजर ने घोटाला कर दिया जिससे हमारी सबकी सेलरी तो इस साल नहीं बढ़ेगी वैसे सरल ने सोचा था कि अगर आंटी ने महंगाई का ब्रह्मास्त्र मारा तो वो recession जैसी आर्थिक मंदी का "वीटो " पॉवर इस्तेमाल करेगा पर आजकल ये बहाना इतना आम हैं कि प्रधानमंत्री से लेकर झाड़ू वाले तक इसे इस्तेमाल करके अपनी रोजी रोटी चला रहे हैं

खैर अब मकान मालिक ने कह ही दिया बेटा इस बार से किराया बढेगा सरलकुमार ने मुस्कान में असहमत होने का भाव लाया और गेट खोलकर चल दिया अपने रोज के पिटे पिटाए काम पर कम्पनी पहुँचते ही कुछ गूगल सर्च इंजन टाईप दोस्तों से शहर के " To LET " विकल्पों के बारे में पुछा और सारा दिन में एक लिस्ट तैयार कर ली की आज यहाँ यहाँ मकान ढूंढना हैं वैसे भी ऑफिस में तो वो सिर्फ पांच बजाने जाता हैं कम्पनी उसे काम के पैसे नहीं देती , वो तो काम तमाम करने से रोकने के लिए पैसे देती हैं

शाम को एक और खिज्जू दोस्त को साथ लेकर एक मोहल्ले में अपनी आउट डेटेड मोटर सायकल को स्टैंड पर लगा कर एक मकान में घुसते हैं मकान पसंद जाता हैं जब मकान मालिक किराया बता देता हैं तो सरल को मकान मालिक को स्पष्टीकरण देना ही पड़ता हैं कि आपको ग़लतफ़हमी हो गयी हैं थोड़ी सी किराये पर लेना हैं खरीदना नहीं हैं इतनी महँगी E M I पर बस मकान मालिक का गुस्सा अब उनके जर्मन शेफर्ड डौगी के चेहरे पर जाता हैं धरमेंदर की तरह बेडियो में जकड़ा डौगी इससे पहले कि सरल और खिज्जू की पैंट पर चार घाव के निशाँ बनाये दोनों पतली गली से हो लेते हैं

खैर अब थोड़ी सस्ती रिहायश और सुरक्षित विकल्प (या यु कह ले कि वो लोग जो गरीब होने की वजह से " धरमेंदर " afford नहीं कर पाते ) कि वजह से सस्ती बस्ती में घुसता हैं और जब देखता हैं जगह का सही प्रयोग करना तो इनसे सीखे आठ बाई आठ के कमरे में सात प्लाई डालकर चार कमरे भी बनाये जा सकते हैं मकान मालिक ने कहा कि बेटा लगभग सेक्टर जैसे मकान हैं पर बाद में मकान मालिक ने खंडन किया कि ये बयान सिर्फ किराये की के लिया था , सुविधा के लिहाज से नहीं । सुविधा तो वहां इतनी अच्छी की मकान मालिक ने कह ही दिया , कभी कभी तो छत भी नहीं टपकेगी असल में छत तो कभी टपकेगी ही नहीं छत जैसा तो वहां कुछ था ही नहीं बस एक संदूक बनाने वाली पतली सी लोहे की चादर को छत का पर्यायवाची बनाये की गहरी विदेशी साजिश हो रही थी यहाँ से भी यही सोचकर निकले की "अब इस अस्तबल को खरीदने का या स्लमडॉग बनने का कोई इरादा नहीं हैं "

अब हारकर सोचा यारा छोडो सारी बातें मध्य मार्ग अपना लेते हैं ना बहुत महंगा ना सस्ता , ना एकांत वाला ना भीड़ वाला , बस जहाँ थोड़ी शांति बनाने वाले पारिवारिक लोग हो वही ले लेंगे घुसे एक पारिवारिक घर में एक अम्मा ने receive किया , एक ग्लास पानी दिया मामला जमने लगा टू रूम सेट का वो स्वप्निल शब्द बिलकुल यथार्थ हो गया था किचन अलग , अंग्रेजी वाली सीट ( समझ गए आप , ) बस हो गया बाबा काम इसके तो किराये के लिए सरल बजट बना लेगा सारी बात तय हो गयी .

फायनल
टच देने से पहले अम्मा ने पूछा बेटा कितने बच्चे हैं सरल ने कहा जी बस हम दो मैं और खिज्जू अम्मा ने क्लियर किया तुम्हारे बीवी बच्चे अब सरल की सहमने की बरी थी - जी ...जी ............... वो असल में आप हमें रूम दोगे तो हम ठीक ठाक काम धंधे पर लगेंगे और फिर शादी के बाद बीवी और फिर बच्चे थोडा माहौल को सामान्य करने के लिए खिसियानी से मुस्कान भी दी

अब
अम्मा ने शुरू किया , बेटा हमारा तो परिवार हैं बहु बेटियों का घर हैं कुंवारों को हम मकान नहीं देते कल को कोई उक चूक हो गयी तो , ना बाबा ना सरल ने कहा आंटी जी मेरे पास दसवी की मार्कशीट में अच्छे चरित्र का प्रमाण दिया गया हैं अगर आप चाहे तो मैं एक फोटोकॉपी दे सकता हूँ पर माता जी जुबान तो अंगद का पाँव थी और सब स्वाहा मन में मंथन चल रहा था की भगवान् ने हमें तो जैसे बिना परिवार के ही उतारा हैं सीधे जुपिटर गृह से आया हैं हमारा जोड़ा ( सरल और खिज्जू का ) पर इतनी वैज्ञानिक बात अनपढ़ अम्मा को कौन समझाए

आधे प्रतिभाशाली लोग तो इन बहु बेटियों क़ी वजह से अपने कैरियर नहीं बना पाते इस वजह से कुंवारों को रूम मिलता नहीं फिर ये अपने hometown लौट जाते हैं और एक सम्भावना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ देती हैं

अब इसके बाद का सीन ये हैं
" सरल और खिज्जू दोनों अपनी वर्तमान मकान मालकिन के चरणों में पड़े हैं और धन्यवाद दे रहें हैं ऊपर खुदा नीचे तू जितना किराया बढ़ाना हैं बढ़ा ले आज की चप्पल घिसाई से थकने के बाद वो सोचते हैं की रोटी , कपडा और मकान में रोटी और कपडा कोई ज्यादा जरुरी नहीं क्योंकि अगर भरे पेट और कपड़ो में रोड पर सलमान खान की कार या किसी B M W के नीचे मर सकते हैं तो हेड लाइन होगी की फूटपाथ पर लेते मजदूर की कुचलने से मौत " घर वाले शायद प्रतिष्ठा के चलते आपकी लाश पहचानने से मन कर देंगे , वैसे भी इसमें आधी मदद तो कर के कुचलने से हो ही जाएगी

लेकिन
अगर आप अपने घर में भूखे नंगे , मरे पाए जाते हैं तो कई सेलेब्रिटी जैसी सी मौत आपको मिल सकती हैं क्योंकि वो हमेशा बस ऐसे ही सुने जाते हैं की अपने फलां फलां बंगले में मृत पाए गए फिर भी इज्ज़त की मौत हैं "

तो अपने वर्तमान मकान मालिक की जय बोलिए क्योंकि वो ही आखिरी संकटमोचक हैं .

8 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

जय हो मकान मालिक की!!

जय हो संकट मोचन की!!

Udan Tashtari ने कहा…

वर्ड वेरिपिकेशन हटा लें तो टिप्पणी करने में सुविधा होगी. बस एक निवेदन है.

डेश बोर्ड से सेटिंग में जायें फिर सेटिंग से कमेंट में और सबसे नीचे- शो वर्ड वेरीफिकेशन में ’नहीं’ चुन लें, बस!!!

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

badhiya hasy vyang...pahali baar aaya aapke blog par sach me padh kar ekdam maja aa gaya..

dhanywaad swikaare...aage bhi aur rachanaonn ki ummid hai...

वीरेंद्र रावल ने कहा…

@ udan tastari ,
sir , i am quite happy to get comment from you.
i have changed settings for the word
verfication. You can test

@ vinod
thanks vinod bhai for your positve response .

vk ने कहा…

Delhi Daredevils skipper Dinesh Karthik said losing quick wickets in the middle overs proved to be his team’s undoing in their five wicket loss to Chennai Super Kings in the Indian Premier League (IPL) here Friday.

vk ने कहा…

Delhi Daredevils skipper Dinesh Karthik said losing quick wickets in the middle overs proved to be his team’s undoing in their five wicket loss to Chennai Super Kings in the Indian Premier League (IPL) here Friday.

कुलवंत हैप्पी ने कहा…

आपके किस्से से मैं भी गुजर चुका हूँ मेरे दोस्त। आपने शब्दों का सही प्रयोग करते हुए सच में व्यंगमयी माहौल बना दिया।

लेकिन मुझे निम्न बात बुरी लगी।

आधे प्रतिभाशाली लोग तो इन बहु बेटियों क़ी वजह से अपने कैरियर नहीं बना पाते । इस वजह से कुंवारों को रूम मिलता नहीं फिर ये अपने hometown लौट जाते हैं । और एक सम्भावना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ देती हैं।

यहाँ पर कहूँगा.. जब मैंने भगवान से बुद्धि मांगी तो उसने कुछ समस्याएं खड़ी कर दी सामने। बस इतना ही कहूँगा।

वीरेंद्र रावल ने कहा…

dear kuldeep,
It was just a comment for fun . I suggest read it complete like ( jaise hum to jupitar grah se aaye matalab hamare kya ghar pariwar nahi hai , hamare pariwaro me bhi bahu beti hoti hai .) Any way the matter of text is quite critical as it always raise/decrease the emotions of different persons in unique way as per his perception. It might be the angle by which you consider and may be not in my perception. I hope you will be able to get me.

about GOD,
I think ( I may be 100% wrong as per your perception) your attitude towards god is little bit enthusiastic but not oriented. You want to get him but due to lack of proper sources you want him to be get him default.

I am considering you as a amateur guy whose mind is not allowing him to free from conceptions raised by argues of same age friends. I will only suggest you to keep patience and will deeply suggest to avoid judge other spiritual devotees like me .I dont want to stir your perception but your yesterday's comment is totally a non-blessed devotee who think that he can get anything from real religious people with arguments. With arguments and long discussions, You will only get some words by which you can make your image as philosopher.
I had passed a long long years of journey to get devotion of GOD. We the dedicated devotees of shri hari , only pray for your peak future but if you think by judging our posts, blog and long discussions you can defeat or then you will be considered superior then might we will praise you but you will get nill output.

last not but least " first please be simple and keep patience to understand. In one day or in one blogpost you will not be able to judge the effort of years .

thanks
VIRENDER

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...