हालाँकि बापूजी की कृपा से सभी साधक शांतचित स्वाभाव के हैं । गुजरात पुलिस के गुंडा राज में पिछले हफ्ते जिस प्रकार से सिर्फ़ सामान्य साधक ही नही बल्कि कई हफ्ते एकांत साधना का व्रत लेकर मौन मन्दिर में साधना करने वाले पवित्र साधक अन्यायपूर्ण ,बर्बर हिंसा का शिकार हुए , अब पता चला कि कैसे रावन ने ऋषि मुनिओं पर अत्याचार करने का साहस किया होगा क्योंकि जब अपना धर्म कर्म से बिल्कुल नाता तोड़ लेता तो सबसे पहले वो धार्मिक बन्दों में दोष देखेगा और उनसे वैर करेगा , हिंसा पर उतारू हो जाएगा ।
कुछ साधकों का यह वर्णन है कि थाने जो व्यवहार हुआ वह सरकार कभी आतंकवादियों से भी नही करती है । एक सिपाही ने शराब पी पी कर जो तांडव किया वो गालियाँ और हिंसा अगर देश द्रोहिओं के ख़िलाफ़ की जाती तो दोष में क्षेत्रवाद , आतंकवाद और संसद पर हमले जैसे घटनाये न होती । शायद राज्य और केन्द्र सरकार सो रही है । पर इतना अन्याय किसी का भी दिल तोड़ देने के लिए काफी है ।
पहले सत्य साईं बाबा फ़िर शकाराचार्य जी और अब बापूजी , कितनी घृणित मनोदशा है कई लोगों की जिससे वो संतो को भी अपने हिसाब से मापने लग जाते हैं । बापूजी की सहनशीलता भी अतुलनीय है । वो तो अपने उच्च समाधी सुख को छोड़कर संसार में आए हैं। मीडिया और कुछ गिने चुने लोग शायद गुरु की महत्ता से अनभिग्य है । जिन साधकों ने इश्वर प्राप्ति के लिए अपना सर्वस्व छोड़कर साधना का मार्ग पकड़ा , क्या प्रभु उन्हें ऐसे हालात में देखकर द्रवित नही हुआ होगा ।
!! राम !!
!! हरि ॐ !!
बापूजी सबका भला करें ।