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रविवार, 23 मई 2010

रूठी दोस्त को मनाने के लिए एक कविता

दोस्ती ईश्वर का सबसे नजदीक का भाव हैं . मुझे अपने सारे दोस्तों में ईश्वर दीखता हैं इसीलिए उनसे कुछ भी छिपा नहीं सकतादोस्त इसीलिए भी थोड़े पास होते हैं क्योंकि जो बात कुछ लोग घर में नहीं बता सकते वो दोस्त के सामने दिल खोलकर बता सकते हैं और हर सच्चा दोस्त कभी भी आपकी गलती तक पर शर्मिंदा नहीं होने देगा ओर बोल देगा की हालात ऐसे हैं तुम्हारी गलती नहीं हैंमेरी एक सहृदय और परम विदुषी दोस्त हैं जो आजकल मुझसे बहुत नाराज़ चल रही हैं , जो गलती मैंने की ही नहीं हैं वो कुछ अपनी समझ से मानकर मुझसे बात करना बंद कर चुकी हैंअब ऐसे हालात में पिटी पिटाई जिंदगी में कविता के अलावा कुछ सूझा ही नहींअब सरल मन को जटिल समाधान समझ नहीं आतेउसकी नाराज़गी को समर्पित एक कविता हैंआप भी कभी नाराज़ दोस्त को मनाना चाहो तो मेरी रचित इस कविता को अपने दोस्त को मोडिफाई करके सुना सकते हो , कोई कोपी राइट नहीं हैंकिसीकी जिंदगी बच जाये इससे बड़ी रोयलिटी कुछ नहीं हैंऔर देखो मेरा क्या हैं मन बुद्धि परमात्मा ने दिए , तन मातापिता ने तो मेरा अपना क्या हैं जो मैं हकदार बनूकाश वो दोस्त इसे पढ़े और मुझे उस गलती के लिए माफ़ कर दे जो मैंने की ही नहीं हैं .


तेरी आंख में आंसू हो तो मनाऊंगा
जो तुझे पसंद वही शब्द कह पाउँगा
तुम्हे रूठना ही हैं तो मुझे एक बार बोलो तो सही
भड़ास अपने मन की तुम मुझ पर खोलो तो सही

मुझसे तुम बात ना करो तो तुम्हारा क्या जायेगा
पर पहले ही उजड़ी इस दुनिया में सरल मर जायेगा
तुम्हारे उस प्रिय को मैं कहा जानता हूँ
बस तुम्ही से जो सुना वो ही मानता हूँ

मेरे साथ सारे अन्यायों की तुम्हे तो हर बात पता हैं
जिसने सबकी जिंदगी जोड़ी उसका भी भाग्य खफा हैं
ईश्वर के विधान से मैंने कहाँ कुछ पाया हैं
जीना तो दूर रहा मरना भी नहीं हो पाया हैं

तुम्हारे लिए तो मैं पूरी खुली किताब हूँ
तुम्हारी ना पढ़ पाया बस इसीलिए ख़राब हूँ
तुम ही कह दो की मैं नालायक हूँ
दुखो को निभाने में महानायक हूँ

जिंदगी जब मेरी मेरी बनते बनते टूट गयी थी
मंजिल जब हाथ में आते ही किस्मत रूठ गयी थी
उन्ही घडी में तो तुमसे थोडा सहारा माँगा था
तुने भी बस सबकी तरह आवारा माना था

दुःख तुने दिया तभी सहन कर पाया था
एक तू थी सिर्फ जिसे बहन कह पाया था

मुझे तो पता नहीं की इसके बाद वो और नाराज़ तो नहीं होगी इस विवाद को सार्वजानिक करने के लिए । अब तो मैं साबित कर ही रहा हूँ कि मुझमे सब ब्लैक होल की तरह समाता नहीं हैं कुछ प्रगट भी तो होता हैं । मैंने ख़ास ध्यान उसी बिन्दु पर दिया जिसको लेकर हमारा झगडा हुआ हैं ।

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...