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रविवार, 7 मार्च 2010

दूरदर्शन के पुराने धारावाहिकों के ना भुलाये जाने वाले शीर्षक गीत

अस्सी और नब्बे के दशक जिन्होंने अपनी किशोरावस्था गुजारी हैं वे दूरदर्शन के सीरियल्स नहीं भूल सकते हैं
इनमे शायद अथाह मानवीय भावनाए थीथोड़े साफ़ सुथरे भी होते थेमेरा मतलब आज कल जैसी द्विअर्थी बोरिंग कोमेडी तब नहीं होती थीभारत एक खोज जैसी श्याम बेनेगल कि कालजयी रचनाये थी

कुछ नाटको के शीर्षक गीत मुझे अब भी याद हैं

जैसे एक स्कूल के लडको का नाटक था नीव , जिसका शीर्षक गीत था
धरती पर सूरज की किरणे, रखे नीव उजाले की
विद्या के प्रकाश से रोशन नीव रहे विद्यालय की
नीव अगर मजबूत हो मानव धरती पर इंसान बने
कोई गांधी कोई नेहरु कोई वीर सुभाष बने

एक चैम्पियन नाटक था जो क्रिकेट पर बना था जिसमे आसिफ शेख और मामिक मुख्य कलाकार थेउसका शीर्षक गीत था

माना की हैं गम की धूप कड़ी मायूस मगर तू ना होना
जितनी आग में तपता हो उतना ही निखरता हैं सोना
ये रात अभी ढल जाएगी मंजिल तुझको मिल जाएगी
जो आगे बढ़ते जाते हैं वो लोग यहाँ कहलाते हैं , चैम्पियन

एक इम्तिहान नाटक आता था जिसमे रेणुका शहाने, अलोक नाथ और सचिन खेडेकर थे ,
इसका शीर्षक गीत

आँखों में रोक ले तू ये आसुओं का तूफ़ान
लेती हैं जिंदगानी हर कदम पे एक इम्तिहान

बहुत लम्बे चलने वाले जूनून सीरियल का

किसी को मोहब्बत का हैं जूनून, किसी को अदावत हैं जूनून
कोई मुफुलसी का मारा हुआ , किसी को दौलत का हैं जूनून
जूनून जूनून जूनून जूनून
ना जाने ये कैसी हैं दीवानगी काँधे पे लादे हुए जिंदगी
भटकता हूँ मैं बेसबब बेनिशान मेरे साथ हैं मेरी आवारगी
जहाँ दिल जले तो सुकून चाहिए जूनून के लिए बस जूनून चाहिए
जूनून जूनून

भारत एक खोज का शीर्षक गीत भी बिलकुल अद्भुत था , गीत ये था

सृष्टि से पहले सत नहीं था असत भी नहीं
अन्तरिक्ष भी आकाश भी नहीं था
छिपा था क्या कहाँ किसने ढका था
उस पल अचल अटल अतल भी कहा था
सृष्टि का कौन हैं कर्ता , कर्ता हैं व् अकर्ता
ऊंचे आकाश में रहता सदा अदृश्य बना रहता
वही सचमुच में जानता , या नहीं भी जानता
हैं किसी को नहीं पता , नहीं पता नहीं हैं पता

ऐसे और भी अनेक गीत थेजो भी याद आते जायेंगे पोस्ट करता जाऊंगाअसल में वो सीरियल ही इतने अच्छे थे की बाते सांझा किये बिना रहा नहीं गयाआजकल तो सीरियल कम बनते हैं , पूरे झूठे रिअलिटी शोज़ ज्यादा बनते हैं , कम से कम पब्लिसिटी की भूखी बडबोली राखी सावंत और छिछोरे राहुल महाजन की झूठी शादिया को देखकर तो ऐसा ही लगता हैंऊपर से सीरियल से सम्बन्धित सारे काम सीरियल किलर के रूप में न्यूज़ चैनल पर ज्यादा दिखाए देते हैंवैसे हमारे न्यूज़ चैनल भी किसी सीरियल से कम नहीं हैं

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...