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बुधवार, 22 दिसंबर 2010

एक कविता - माँ को समर्पित

हर माता पिता को बुढ़ापा देखना पड़ता हैं । ऐसी ही एक कविता लिखी हैं जिसमे संताने अपनी माँ को बताना चाहते हैं कि वो बुढ़ापे को कैसे संभाले । . मैंने प्रेरित होकर अपनी मम्मी के लिए लिखी हैं . हर किसी माता पिता की तरह ही सबको एक उम्र के बाद शरीर कमजोर महसूस होता हैं तो अनेक चिंताए घेर लेती हैं की बेटो को क्या होगा . कैसे ये रहेंगे अगर मै ना रही तो या दुनिया बड़ी तेज़ हैं आदि आदि बाते .

मेरी माँ तू आजकल इतनी उदास क्यों हैं
तेरे माथे पर बुढ़ापा लाई झुर्रिया ख़ास यो हैं

जीवन के हर दौर को मानव झेल सकता हैं
बचपन में जैसे हर बच्चा खेल सकता हैं
हर इन्सान जवानी में जो ताकत से लड़ पाता हैं
वही मानव रुपी फल बुढ़ापे में झड़ जाता हैं .

सब फल तो पक कर मीठे बन जाते हैं
जिंदगी में बुढ़ापे के साल फीके रह जाते हैं
यह ही तो परमात्मा का विधान हैं
झुक जाता इसके पीछे हर इन्सान हैं

जब तुने तो सब कुछ अपना कर्तव्य निभा दिया
अपने बेटो में जीने का सच्चा हौसला सिखा दिया
क्या उनकी आत्माए तेरे सफल होने कि गवाही नहीं देती
प्रकृति क्या रह रह कर सारा श्रेय इसका तुझे नहीं देती

ऐसा कौन सा काम रह गया जो तू चिंता करती हैं
तू तो अज़र आत्मा हैं सिर्फ शरीर की परते मरती हैं
गुरुओ से पाया वो ज्ञान तेरी सच्ची धरोहर हैं
ना अब तू कुछ पिछला सोच तेरा भविष्य मनोहर हैं

तेरे बेटे कभी तेरे लिए पुत्रवधू भी लायेंगे
भाग्य जिन देवियों के सब लोग सराहेंगे
पर इन चीजों का एक निश्चित समय होता हैं
फिर क्यों तेरा कोमल मन धीरज खोता हैं

क्या चीजों के देरी होने में तू कही दोषी हैं
तेरा क्या बस जब तू हमेशा कर्मयोगी हैं
शरीर के धर्म में बुढ़ापा भी तो जरुरी हैं
भगवान को भी पता हैं तू अपने प्रयासों में पूरी हैं

फिर एक बात बता क्या तेरे करने से ये दुनिया चलती हैं
इसका प्रबंधन प्रभु के हाथो तो उसी लगाम से दुनिया बढती हैं
बेमतलब की मानी हुई जिम्मेदारियों से क्या हो जायेगा
बस इतना जरुर हैं तेरा मूल आत्मा इसमें फिर खो जायेगा

तुने अपने सारे फ़र्ज़ निभाए बस अब शांति से आगे निभाती चली जा
शरीर से अपनी आसक्ति मिटाकर मन बुद्धि को आत्मा में समाती चली जा
तेरे सारे कर्तव्यों का निर्वाह हो चुका हैं
आज्ञा तेरी मानने को शीश हमारा झुका हैं
ईश्वर सारे पुण्यो का फल बेटे के रूप में भेज देते हैं
तभी स्नेह की लता से उपजे "वीरेन" जैसे तेरे बेटे हैं

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...