
!! राम !!
!! हरि ॐ !!
जय श्री गणेश !!!!!!!!!!!!!!!!
सनातन धर्म के अनुसार वंशावली समझने के लिए समय और इससे जुड़े कुछ वंशो के बारे में संक्षेप में पता होना बहुत जरुरी है । जैसे कल्प , अयन ,चन्द्रवंश और सूर्य वंश । इन्ही वंशो में सारे देवी देवताओं , राजे महाराजों का वर्णन आ जाता है । यह पोस्ट कई भागो में होगी क्योंकि इसमे बहुत जटिल सबंध हैं। मैं पूरी कोशिश करूँगा कि सरल तरीके से एक एक वंश का वर्णन करूँ । यह पहला भाग है । पहले समय की गणना को लेते हैं ।
गीता के अनुसार और प्रमाणिक ग्रंथो के अनुसार हमारे चोबीस घंटे या आठ पहर का एक दिन होता है । हमारे छः महीने के समय में देवताओं का एक दिन या एक रात होता है । उत्तरायण और दक्षिणायन को देवताओं का क्रमशः देवताओं का दिन और रात माने जाते हैं । अभी कलयुग चल रहा है इसका काल चार लाख बत्तीस हज़ार साल के बराबर होगा । भगवन कृष्ण के स्वधाम गमन के बाद कलयुग शुरू हुआ है । पहला युग सतयुग होता है जिसका समय दूसरे युग त्रेता युग से दुगना होगा । त्रेता का तीसरे युग द्वापर युग से दुगना और द्वापर युग का चौथे युग कलयुग से दुगना होगा।
अब सृष्टि कालऔर वंश की बात अगली पोस्ट में करुगा ..