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बुधवार, 24 मार्च 2010

प्रभु से मन को लेकर प्रार्थना

हे हरि !

जब एक हाड़ मास का पिता अपने बच्चो के अपराधो को ना देखकर सिर्फ उन्हें वात्सल्य भाव से गले लगा लेता हैं तो फिर क्यों आप परमपिता होते हुए भी हमारी योग्यता को हिसाब से दर्शन देने को इंतज़ार करवा रहे हैंहम जैसे हैं प्रभु तेरे हैंअगर मिटटी से सने हैं हमारे पाँव तो प्रभु ये मिटटी बनाने वाला भी तू ही हैं

अगर हमारे मन कमजोर हैं तो प्रभु हम क्या करेंहमें तो ये भी नहीं पता कि इस शरीर में मन किस जगह होता हैंइसको आप वश में करने को कहते हैं पर हमें तो बेचारे मन के सहारे हमने सारे सुख महसूस हुए हैंहमें तो आपका सहारा हैं पर इस बेचारे मन को तो बस हमारा ही हैं नासंस्कृत के बड़े बड़े श्लोको में इसके पीछे सारे ऋषि डंडा लेकर पड़े रहते हैंपर मेरे तो आनंद का जरिया ही यही हैंइसने ही मुझे आपसे प्यार करना सिखायावृन्दावन के मंदिरों में , तीर्थयात्रा कि धक्का मुक्की में भी बेचारे इसी ने तो हौसला दिया और कहा कि ईश्वर जरुर तुझे दर्शन देंगेबुद्धि तो तब भी तीर्थयात्रा और धर्मशाला और खाने के खर्चे का हिसाब लगा रही थीऔर दो दिन के समय को टाइम वेस्ट मान रही थी

उम्र का हवाला दे रही थी की अभी से क्योंबुढ़ापे में शायद बुद्धि मुझे वृन्दावन लेकर जाएगी
और आत्मा तो अभी मिली नहीं जो कुछ था सारा मन ही तो झेल रहा थाकिस बुद्धि के भरोसे मैं बैठ जाऊ प्रभु जो मेरे पिता की मृत्यु के समय कोई तिकड़म भी नहीं लगा पाई थी। अकेला मन था जिसने कहा कुदरत एक रास्ता बंद करती हैं तो दूसरा खोल भी देती हैं तू हिम्मत मत हार तेरे लिए तेरे इष्टदेव सहायता करेंगे वो आपकी इतनी बड़ाई करता हैं और आप उसे ही छोड़ने को कहते हैं । मेरे दोस्तों के असमय छूट जाने के समय भी तो मन ने ही सहारा दिया कि और अच्छे मिल जायेगे

हमेशा बुरे हालत में ये मुझे कहता हैं कि आने वाला समय अच्छा होगामेरी आँख में आंसू हो तो ये उदास होता हैंबुद्धि तो तब भी कोई प्रोफेशनल सोच में उलझी रहती हैं कि कैसे झूठे तरीके से प्रोमोशन लिया जाए और कैसे फ्रौड़ तरीके से इनकम टैक्स बचाया जायेसरकारों की टैक्स थोपने और कीमते बढ़ाने को चल रही मनमर्जी , क्रिकेट की चकाचौंध में व्यस्त समाज में ये एक अकेला मेरी दुनिया में हौसला भरता हैं की तू अपने से नीचे वालो को देख वो भी तो कितने अभावो में जी रहें हैं

फिर क्यों आप सब मुझे इस मन को छोड़ने के लिए कहते हैंजिसने मेरा हमेशा साथ दिया और हौंसला भी यही देता हैं आपसे मिलने का मैं उसे कैसे छोड़ दू प्रभुमुझे तो आपका धाम चाहिए मेरे इस मन के साथ

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...