सारा दिन हर चीज़ में जिस ढोंग के साथ जिंदगी बितायी जाती हैं । सरल जी उसे प्रोफेशनल सोच समझते हैं ।
इनकम नहीं हैं पर टैक्स काटा जा रहा हैं । कर्मचारियो में इज्ज़त बचाने के लिहाज़ से कस्टमर केयर लम्बे लम्बे फोन करता हैं कि ये 80 C में कोई नया झोल आया हो तो बताये । इन्वेस्ट कुछ करना नहीं , पैसा नहीं हैं तो निवेश क्या ख़ाक होगा । पच्चीस तारिख के बाद सौ सौ रुपये के U A ( उधार अलाउंस ) की EMI पर खर्चा चलने की कहानी सरल के लिए बिलकुल आम हैं ।
कहने भर को क्रेडिट कार्ड हैं पर सारे समाज में उसे कोई क्रेडिट नहीं मिला हैं । रिक्शा में बैठना अपने आप में उसके लिए स्टेटस सिम्बल से कम तो नहीं हैं क्योंकि रिक्शा वाला सरल से भी महंगा फोन रखता हैं । ऊपर से रिक्शा वाला भी उत्साह ख़तम करने में एक पल नहीं लगाता . " बाबूजी हम तो शौकिया रिक्शा चलाते हैं " सरल सोचता अगर यही काम मेरी मजबूरी बन जाए तो कम्पनी वाली नौकरी से ज्यादा कमाई हो ।
सरल के सारे बड़े बड़े नोट राशन की दूकान वाला पूरी जांच पड़ताल के बाद ग्रहण करता हैं । सरल झेंप जाता हैं कि कहीं अखबार में खबर में ना आ जाये कि सत्रह सौ रुपये के नकली नोटों के साथ रंगे हाथ एक एजेंट गिरफ्तार । मम्मी पापा का खूब नाम रोशन होने के सदमे में सरल नोटों कि परीक्षा तो पास कर लेता हैं । नहीं तो एक बार तो इतनी आत्म ग्लानी हुई कि क्या सारे नकली नोटों को भारत में फ़ैलाने कि फ्रान्चैज़ी कही मेरे नाम तो नहीं हो जाएगी और मेरा नाम कोई सरल कुमार से "सरल खान " रखकर क्रेडिट ले जाएगा ।
अभी सत्तासी रुपिए बचे हैं सोचा सरल ने कि सब्जी खरीद ली जाये । तीन चार आलू , दो टमाटर , एक गोभी , एक पेठा दुकानदार तौल देता हैं । और हाथ में बिना पोलिथीन के थमाता हैं । सरल झगडा करता हैं कि भैया पोलिथीन तो दे दो । वो सब्जी वाला कुछ " ग्लोबल वार्मिंग " जैसा अग्रेज़ी का भारी भरकम शब्द बाण मरकर सरल को बेहोश कर देता हैं । बेचारे सरल को समझ नहीं आया कि अपने चार चार इंच कि हथेलियो पर वो अठारह चीज़ें कैसे रखे। पडोसी सोचेंगे कि भीख मांगकर लाया हैं । फिर भी सरल बहस करता हैं । सब्जी वाला थोड़ी रणनीति से काम लेता हैं । एक कैप्री में घूम रही लड़की को बुलाता हैं कि बेटा इनको बताना । लड़की अपने कुरकुरे के पैकेट को ख़त्म करके और उसकी पोलिथीन को फेंक कर अपनी पतली सी आवाज़ में कहती हैं " he ! u dont know about the whole stuff of hollywood movie day after tomorrow . " सरल को अंग्रेजी तो खैर कहाँ समझ आनी थी । कुछ थोडा समझदार होने कि एक्टिंग करते हुए बोला " o yes , yes " और पेंटो कि जेब में आलू भरकर चल पड़ा ।
नमी दोनों जगह थी आँखों में आंसू और जेबों में फूटे टमाटर की। गरीब होना शायद आज सबसे बड़ा अभिश्राप हैं ।
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