
इससे पहली पोस्ट में मैं संक्षेप में काल गणना के बारे में बता चुका हूँ ।
अब थोड़ा सा पहले मनु महाराज को भी शामिल करना होगा क्योंकि सृष्टि क्रम उनसे ही बनता है ।
चारों युग मिलकर एक चतुर्युग बनता है । इन एक हज़ार चतुर्युग को मिलाकर एक कल्प बनता है । ये ब्रह्माजी का एक दिन होता है । ब्रह्माजी जी की आयु सौ वर्ष की होती है । उनके एक वर्ष में 365 दिन होते है । कल्प का परिमाण मैं आपको पहले ही बता चुका हूँ ।
मनुजी का कल ही वास्तव में समय की कुंजी है । एक कल्प में चौदह मनु होंगे । तो अब एक हज़ार चतुर्युग को चौदह हिस्सों में बाँट लीजिये , एक मनु जी का कल होगा। लगभग 71 या 72 चतुर्युग हो सकता है एक मनु का कल। अब तक सात मनु हो चुके हैं । सबसे पहले मनु थे स्वयम्भुव मनु और अब सातवे मनु है वैवस्वत मनु , उनका नाम उनके पिता विवस्वान ( जो इस बार के सूर्य हैं ) के कारन है । वैसे उनका नाम सत्यव्रत मनु है।
इन्ही सातवे मनु के कारन भगवान् ने मत्स्यावतार लिया था जो इनका इस कल्प का पहला पूर्ण अवतार था ।
तो अब जितनी भी वंशावली होंगी मैं उन्हें मनु से जोड़ कर दिखाऊंगा या ब्रह्म जी से जिससे सृष्टि क्रम को आपको सटीक पता चलेगा की हम मनुष्यों और देवताओं के लिए ये दोनों सबसे जरुरी हैं ।