सभी युवा भारतीयों में अपने पढ़ाई के आखिरी सालों में अपनी मातृभाषा से गद्दारी करने की बड़ी भयंकर लाइलाज बीमारी पायी जाती है । इसे कभी सुधारी हुई भाषा में इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स या ग्रुप डिस्कशन या Personality Development से भी परिभाषित किया जाता है । सभी कहते हैं की नोकरी और शादी दोनों बंदोबस्त करने हो तो फलां फलां संसथान के लेबल से आपके मार्केट वैल्यू में सेंसेक्स की तरह उफान आ सकता है । हालाँकि कोर्स पूरा करते ही पता नही क्यों "recession" नाम की विदेशी बीमारी आ धमकती है ।
हाँ तो बात सरल कुमार की करें । अपने इंजीनियरिंग फायनल साल में तीन चार होलीवुड फ़िल्म देखने के बाद इंग्लिश के दीवाने दोस्तों ने सरल का भी मन बना लिया की सिर्फ़ छत्तीस घंटे में रोज़गार की अपार संभावनाओं के रस्ते खुलना तय है। वैसे भी इंजीनियरिंग के चार साल लगाने के चार पैसे की नौकरी न मिलने के बाद तो घर बैठना तय था । कम से कम इस इंग्लिश कोर्स से बाद में जो आय होगी उन पाँच छः सौ रुपये में घर में काम करने वाली बाई तो रख सकेंगे ।
फीस के लिए घर में विश्वास मत सर्व सम्मति से पास हो गया पर बड़ी शर्त ये की छोटे भाई बहनों की इंग्लिश बिना कोर्स कराये ठीक होनी चाहिए । आख़िर कितनी सही सोच थी की जो छोटे भाई बहन अभी रो पीट कर ढंग से हिन्दी बोलना भी नही सीखें है अब इंग्लिश सीखेंगे। पहले दिन ही सारे ओजार खरीद लिए गए , मसलन पेन और नोट बुक क्योंकि इंजीनियरिंग में तो दोस्तों के पेन मारकर और पन्ने फाड़कर ही कम चल गया था । पर यहाँ तो कुछ प्रोफैशनल एप्रोच जैसा ड्रामा करना जरुरी था । impression बनने की बात थी पता नही किसके सामने , या तो मोहल्ले के उन लोगों के सामने जो सरल कुमार की प्रतिभा पर हमेशा शक करते थे या फ़िर कोर्स की उन लड़किओं के सामने जो rejected लड़कों को कभी भी भइया की संज्ञा देकर एक अच्छा भला करियर चौपट कर सकती थी ।
फ़िर धीरे धीरे क्लास जमनी शुरू हो गई । देर रात तक उलटे सीधे अंग्रेज़ी अखबार और पत्रिकाएं जिनके हर शब्द के लिए सरल को "advanced learner oxford dictionary " सर पर रखकर तांडव करना पड़ता है। कोर्स फीस के साथ बिजली बिल को जोड़ लेने को माता पिता का सुझाव कितना पारदर्शी था। पर अभी भी शब्दों की कमी साफ़ थी । किसी नए नए इंग्लिश टीचर ने शब्दों को सीधे अनुवाद की राय देकर जब सरल कुमार की नोट बुक देखि तो अपना ही माथा पकड़ लिया । शब्दों का अर्थ अनर्थ कर रहा था । कुछ शब्दों का अर्थ तो महा -dictionary में भी नही मिला फ़िर हारकर सरल के ही पैर पकड़े और अर्थ पूछा , कुछ शब्द ये है :-
आलूबुखारा :- potato fevera ( पोटेटो फीवरा )
कान्खाजूरा - ear data ( इयर डेटा )
मोरी ( नाली ) -peacocki (पिकोकी )
फ़िर वो टीचर उस इंस्टिट्यूट में फ़िर दिखाई नही दिया । सरल को अब काफी संभावनाएं नज़र आने लगी थी जैसे अब वो आईएस के पेपर दे देगा , एक आईएस पूरे जिले का हेड होता है । हर साल सिर्फ़ चार सौ भाग्यशाली युवा ही इसे पास करते हैं । एक राज्य में सिर्फ़ सो या डेढ़ सो आईएस होते हैं । कितना सम्मान और ये सब इंग्लिश के कारन । क्या पता क्रिकेट में किस्मत खुल जाए कम से कम ढंग की स्पीच तो हो जाएगी क्रिकेटर इंजमाम उल हक के जैसी ।
आज आखिरी दिन ख़त्म करके वो घर आया तो छोटे भाई से टीवी का रिमोट छीनकर इंग्लिश न्यूज़ चैनल देखने लगा । ठेठ हरयाणवी में हरियाणा के मुख्यमंत्री जी भाषण दे रहे थे जो सिर्फ़ उनके कार्यकर्ताओं के अलावा किसी को समझ नही आ रहा था । सारे आईएस वहां सिर्फ़ सलामी देने का काम कर रहे थे । या फ़िर बुत की तरह खड़े थे । एक सरपंच आकर धक्का देकर आईएस को कुछ %&#*&*#$#%$ शब्दों का आदान प्रदान करके मुख्यमंत्री जी के गले मिलता है ।
दुःख में आकर सरल ने हिन्दी न्यूज़ चैनल पर लगाया , वहां लालू यादव जी की रेल बजट पेश हो रहा था । इंग्लिश देखकर सरल के सपने हवा हो गए आईएस बनने के । फ़िर दूसरे चैनल पर महाराष्ट्र को देश से भी बड़ा बताने वाली एक पार्टी के लोगो द्वारा हिन्दी भाषी नेता की पिटाई देखी
बस सरल को लगा सब बातें है । पर इतना तय है को सरल कुमार के तीन हज़ार रुपये , बिजली बिल , नौकरी और शादी सब तबाह हो गए.
हाँ तो बात सरल कुमार की करें । अपने इंजीनियरिंग फायनल साल में तीन चार होलीवुड फ़िल्म देखने के बाद इंग्लिश के दीवाने दोस्तों ने सरल का भी मन बना लिया की सिर्फ़ छत्तीस घंटे में रोज़गार की अपार संभावनाओं के रस्ते खुलना तय है। वैसे भी इंजीनियरिंग के चार साल लगाने के चार पैसे की नौकरी न मिलने के बाद तो घर बैठना तय था । कम से कम इस इंग्लिश कोर्स से बाद में जो आय होगी उन पाँच छः सौ रुपये में घर में काम करने वाली बाई तो रख सकेंगे ।
फीस के लिए घर में विश्वास मत सर्व सम्मति से पास हो गया पर बड़ी शर्त ये की छोटे भाई बहनों की इंग्लिश बिना कोर्स कराये ठीक होनी चाहिए । आख़िर कितनी सही सोच थी की जो छोटे भाई बहन अभी रो पीट कर ढंग से हिन्दी बोलना भी नही सीखें है अब इंग्लिश सीखेंगे। पहले दिन ही सारे ओजार खरीद लिए गए , मसलन पेन और नोट बुक क्योंकि इंजीनियरिंग में तो दोस्तों के पेन मारकर और पन्ने फाड़कर ही कम चल गया था । पर यहाँ तो कुछ प्रोफैशनल एप्रोच जैसा ड्रामा करना जरुरी था । impression बनने की बात थी पता नही किसके सामने , या तो मोहल्ले के उन लोगों के सामने जो सरल कुमार की प्रतिभा पर हमेशा शक करते थे या फ़िर कोर्स की उन लड़किओं के सामने जो rejected लड़कों को कभी भी भइया की संज्ञा देकर एक अच्छा भला करियर चौपट कर सकती थी ।
फ़िर धीरे धीरे क्लास जमनी शुरू हो गई । देर रात तक उलटे सीधे अंग्रेज़ी अखबार और पत्रिकाएं जिनके हर शब्द के लिए सरल को "advanced learner oxford dictionary " सर पर रखकर तांडव करना पड़ता है। कोर्स फीस के साथ बिजली बिल को जोड़ लेने को माता पिता का सुझाव कितना पारदर्शी था। पर अभी भी शब्दों की कमी साफ़ थी । किसी नए नए इंग्लिश टीचर ने शब्दों को सीधे अनुवाद की राय देकर जब सरल कुमार की नोट बुक देखि तो अपना ही माथा पकड़ लिया । शब्दों का अर्थ अनर्थ कर रहा था । कुछ शब्दों का अर्थ तो महा -dictionary में भी नही मिला फ़िर हारकर सरल के ही पैर पकड़े और अर्थ पूछा , कुछ शब्द ये है :-
आलूबुखारा :- potato fevera ( पोटेटो फीवरा )
कान्खाजूरा - ear data ( इयर डेटा )
मोरी ( नाली ) -peacocki (पिकोकी )
फ़िर वो टीचर उस इंस्टिट्यूट में फ़िर दिखाई नही दिया । सरल को अब काफी संभावनाएं नज़र आने लगी थी जैसे अब वो आईएस के पेपर दे देगा , एक आईएस पूरे जिले का हेड होता है । हर साल सिर्फ़ चार सौ भाग्यशाली युवा ही इसे पास करते हैं । एक राज्य में सिर्फ़ सो या डेढ़ सो आईएस होते हैं । कितना सम्मान और ये सब इंग्लिश के कारन । क्या पता क्रिकेट में किस्मत खुल जाए कम से कम ढंग की स्पीच तो हो जाएगी क्रिकेटर इंजमाम उल हक के जैसी ।
आज आखिरी दिन ख़त्म करके वो घर आया तो छोटे भाई से टीवी का रिमोट छीनकर इंग्लिश न्यूज़ चैनल देखने लगा । ठेठ हरयाणवी में हरियाणा के मुख्यमंत्री जी भाषण दे रहे थे जो सिर्फ़ उनके कार्यकर्ताओं के अलावा किसी को समझ नही आ रहा था । सारे आईएस वहां सिर्फ़ सलामी देने का काम कर रहे थे । या फ़िर बुत की तरह खड़े थे । एक सरपंच आकर धक्का देकर आईएस को कुछ %&#*&*#$#%$ शब्दों का आदान प्रदान करके मुख्यमंत्री जी के गले मिलता है ।
दुःख में आकर सरल ने हिन्दी न्यूज़ चैनल पर लगाया , वहां लालू यादव जी की रेल बजट पेश हो रहा था । इंग्लिश देखकर सरल के सपने हवा हो गए आईएस बनने के । फ़िर दूसरे चैनल पर महाराष्ट्र को देश से भी बड़ा बताने वाली एक पार्टी के लोगो द्वारा हिन्दी भाषी नेता की पिटाई देखी
बस सरल को लगा सब बातें है । पर इतना तय है को सरल कुमार के तीन हज़ार रुपये , बिजली बिल , नौकरी और शादी सब तबाह हो गए.