प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक श्री जगजीत सिंह की आवाज़ में गाया ये भजन बहुत अच्छा लगता है । हालांकि हमने इस भजन को कई संतो के श्रीमुख से भी सुना है । इश्वर में थोड़ी अच्छी स्थिति के साधकों को तो यह काफी भावुक बना देता है।
इसी भजन की पंक्तियाँ हैं :
सुध लो मेरी गोपाल मैं खोयी गैया तेरी
तुम ढूंढो मुझे गोपाल मैं खोयी गैया तेरी
पांच विकार से हांकी जाए पंच तत्व की ये देहि
बरबस भटकी दूर कहीं अब चैन ना पाऊ अब केहि
ये कैसा मायाजाल मैं उलझी गैया तेरी, सुध लो ....
जमना तट ना नंदन वट ना गोपी ग्वाल कोई दीखे
कुसुम लता ना तेरी छटा ना पांख पखेरू कोई दीखे
अब सांझ भाई घनश्याम मैं व्याकुल गैया तेरी , सुध लो ...
कित पाऊँ तरुवर की छाव जित साजे कृष्ण कन्हैया
मन का ताप शाप भटकन का तुम हो हरि रास रचैया
अब मैं निहारु बाट प्रभुजी मैं गैया तेरी , सुध लो .........
बंसी के सुर नाद से तेरो मधुर तान से मुझे पुकारो
राधा कृष्ण गोविन्द हरिहर मुरली मनोहर नाम तिहारो
मुझे उबारो हे गोपाल मैं खोई गैया तेरी , सुध लो ..........