प्रिय मित्रो , शायद आप सभी ने कुछ दिन पहले (29।10.2009)एक समाचार अवश्य सुना होगा की मुंबई नगर निगम ने कहा है कि सभी दुकानदारों को मराठी में होर्डिंग लगाने होंगे । ऐसा न होने पर संवैधानिक सजा हो सकती है । दुःख की बात है की छोटे छोटे दूकानदारों जिनमे से अधिकतर उत्तर भारतीय हैं , उन्हें ही इस नियम की आड़ में परेशान किया जाएगा । न कांग्रेस सरकार न बी जे पी आदि पार्टियों ने इसके खिलाफ कोई आवाज़ उठाई ।
इन्ही सब चीज़ों के वजह से शायद हमारे देश में कभी एकता नही होती । हम वास्तव में कभी भी एक देश नही रहे है । देश की एक सोच होती है। एक लक्ष्य होता है और अपने देशवासिओं के लिए समानता सबसे अधिक आवश्यकता होती है। पर कार्यपालिका का सबसे जरुरी अंग सरकार ( जिसके सभी पात्र नेता होते हैं।) कभी भी संवेदना नही दिखाती है ।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के गुंडों की गुंडागर्दी को नज़रंदाज़ किया गया क्योंकि कांग्रेस के कुछ अपने राजनैतिक स्वार्थ थे । अगर ये सब चलता रहेगा तो फ़िर अपने एक देश में रहने का मतलब ही क्या है । संविधान का खुल्ला उल्लंघन करने वालो को राष्ट्र द्रोही माना जाना चाहिए । पर ऐसे फरमान जारी करने वाले स्थानीय लोगो की नज़र में नायक बना दिए जाएंगे और देश की एकता फ़िर खतरे में पढ़ जायेगी । फ़िर कोई बेचारा जनहित याचिका का ब्रह्मास्त्र चला कर देश को बचाने की कोशिश करेगा । पर हम सब उसके प्रयास को हमेशा याद रखेंगे।
!! राम !!
!! हरि ॐ !!
वीरेन्द्र कुमार रावल