हम सबको धन्यवादी होना चाहिए बी आर चोपड़ा जी का और रामानंद सागर जी का जिन्होंने दोबारा से भारतीय संस्कृति के पुरातन काल को बिल्कुल जीवंत कर दिया था । अब जैसे महाभारत के इस आखिरी दृश्य को ही लें।नितीश भारद्वाज बिल्कुल ऐसे लग रहे हैं जैसे वास्तव में कृष्ण ही खड़े हो । भीष्म या मुकेश खन्ना जी इस मौके पर भगवन से विदा मांगते है । नीचे वाला चित्र इसी को चित्रित करता है । सभी शोकाकुल हैं पर अर्जुन तो बिल्कुल ही टूट जाते हैं और फूट फूट कर रोने लगते हैं और हृदय से निकले ये बोल बोलते हैं" पितामह मैं आपको नही जाने दूँगा "

अब आखिरी चित्र के आने से पहले जो आवाज गूंजती है वो हम कभी नही भूल सकते
"महाभारत सा युद्ध न हो , न हो अन्याय की कोई बात
चलो हम हो ले उसके साथ, करें जो कृष्ण के जैसी बात
कर्म है गीता का उपदेश ,महाभारत है शान्ति संदेश