
वैसे तो मज़ाक सा भी है और गंभीर विषय भी कि जब भी कोई छोटा या बड़ा , पुरूष या स्त्री तपस्या करता है तो हमारे हिंदू धर्म की मान्यता है कि इंद्र जी का सिंहासन हिल जाता है। क्या सब देवताओं के अधिपति इंद्र इतने कमजोर है या सबसे पहले उनका नम्बर आता है।
इस का कारन बहुत ही simple है . हमारी सृष्टि में चौदह लोक माने जाते है , और मनुष्य लोक बीच में आता है । जब कोई व्यक्ति तपस्या करता है तो देवता के potential के हिसाब से उसे फल मिलता है ।
पर त्रिदेव सब देवताओं से पृथक है । अगर आपको स्वर्ग तक का सुख चाहिए तो इंद्र जी की पूजा करिए । इंद्र पद या इससे आगे के लोको या फ़िर मुक्ति और भक्ति चाहिए तो इन तीनो देवो के अधीन है ब्रह्मा ,विष्णु महेश ।
अब आपने देखा होगा इंद्र का सिंहासन तभी डोलता है जब कोई व्यक्ति इन तीन में से किसी एक की तपस्या करता है। अब उस व्यक्ति को स्वर्ग तो चाहिए नही । पर पुन्य इतने हो जाते है की कुछ भी इसे मिल सकता है । परन्तु क्योंकि हम सब जीवों में एक परमात्मा है तो वो हमेशा संदेश देता है की कही कुछ घट रहा है जो सात्विक लोग उन्हें आसपास के अच्छे माहौल की ख़बर हो जाती है ।
इंद्र जी सबसे बड़े सात्विक और पुण्यात्मा है , तो उनकी चेतना किसी भी अच्छी चीज़ , या तप से या पुन्य से प्रभावित हुए बिना नही रह सकती क्योंकि तप करने वाला व्यक्ति उनसे भी आगे निकल जाता है।
इसीलिए इंद्र जी का सिंहासन हिल जाता हुआ दिखाई देता है पर ये सांकेतिक होता है ।
ये इतना आम नही है जो टी वी सीरियल में दिखाया जाता है । बहुत दुर्लभ लोग ही इस करते हैं जैसे ध्रुव , माता पार्वती , विश्वामित्र जैसे लोग ।
हमें ये सब बातें थोड़े अभ्यास और धैर्य से समझ में आ जाती हैं