आजकल कई बार ईश्वर से बहस हो जाती हैं । जीतना तो खैर उसने ही हैं , क्योंकि मेरे पास उसके जितने ताकतवर संत और ज्ञानी नहीं हैं । पूरी दुनिया उसके समर्थन में खड़ी हैं और मैं कुछ गिने चुने दुखी लोगो की तरफ से प्रतिनिधि बना हुआ हूँ । पर फिर भी कोई बात नहीं , कम से कम हम सच्चे तो हैं जो ईश्वर की झूठी बड़ाई करके कुछ पाने का लोभ लेकर उसकी पूजा नहीं करते । ठीक हैं आप भी इस बहस का लुत्फ़ उठाये और ईश्वर के समर्थन में खड़े हो जाये .........
आज ईश्वर से शिकायत भरा पत्र लिखने का मन हो आया
मदद तो करता नहीं फिर भी बना हुआ हैं मेरा हमसाया
सारा कुछ दांव पर लगाकर ईश्वर को अपनाया था
पर जब दर पर उसके पहुंचा तो लानत देकर भगाया था
उसे तो सुन्दर चेहरे , बड़ी कार वाले लोग ही प्यारे थे
आँखों में आंसू लिए मेरे जैसे तो सदा उसने दुत्कारे थे
ना हमारी आस्था में भौतिकता का जादू था
स्वर्ग की रौनक देख क्यों हमारा मन काबू था
वैरागी होने का झूठा ढोंग भी नहीं किया
जीवन में कुछ मिला नहीं अफ़सोस नहीं भरा
तुझे हम पसंद नहीं तो भी कोई शिकायत नहीं
ना प्यारी हमें भी तेरी गीता या कुरान की आयत नहीं
ना भक्ति ना ज्ञान ना कोई साधक मन चाहिए
नकली जिंदगी ना स्वीकारू मुझे असली मौत चाहिए
ना थी जिनमे गज भर ताकत तुने मीलो उनको बढाया था
मुझमे समन्दर जितना होंसला था पर तुने बूँद बूँद रुलाया था
जिंदगी जीने की अब मुझे हिम्मत मिलती नहीं
जब भी खड़ा हुआ मेरी जमीन हिलती रही
जिंदगी जीने की अब मेरे पास कोई वजह नहीं हैं
सच्चे मन से आवाज आई क्या ईश्वर भी कही हैं
अब हर बार तो मैं धीरज कहा से लाऊ
जहाँ वीरेन को सुकून मिले वो दुनिया बसाऊ
बस आपके श्री चरणों में इतना ही !!!!!!!!!!!!
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