
यह एक हास्य कविता हैं. सब कुछ वही सा हैं जो आमतौर पर किसी के जीवन में लड़की ढूँढने में होता हैं , मेरा दुःख आपका पूरा मनोरंजन करेगा .
कम से कम एक लड़की को तो बर्बादी नहीं छुई थी
फिर भी उसका एक लड़की ढूंढो अभियान चल रहा था
बेवक़ूफ़ दिमाग में ऐश्वर्या को पाने का ख्वाब पल रहा था
तो धीरे धीरे आना जाना लगने लगा
अपनी लुटिया डुबोने को सरल परिश्रम करने लगा .
एक एक कर के उम्मीदे सारी छूटती गयी
नीचे कविता बताएगी की कैसे किस्मत फूटती रही
टुनटुन की एक बहन देखने जो चला गया
सोफे में उसे बैठे देख भैंस होने का भ्रम लगा
पिछले जन्म की कोई हाथी पल्ले पड़ रही थी
बड़े दांतों से क्योंकि शराफत जो झड रही थी
एक बार इतनी काली लड़की का रिश्ता आया
साथ खड़े होने पर जैसे नज़र का टीका लगाया
पतली एक कन्या का जब विकल्प आया था
पंखे बंद करने पर ही उसे ढूंढ पाया था
पढ़ी लिखी एक वधु मिल रही थी
पांचवी फेल वो लड़की इसीलिए बिना दहेज़ मिल रही थी
पता नहीं इतने अच्छे रिश्ते क्यों मिल रहे थे
सरल के अरमान बस धीरे धीरे मर रहे थे
गुज़ारा चलाने को एक दो भैंस पाल रखी थी
पर रिश्ते वालो पर पशु प्रेमी होने की झूठी ढाल रखी थी
टूटी मेरी साईकिल देखकर गाड़ी पटरी से उतर रही थी
हीनभावना मेरी देखकर वो काली लड़की भी निखर रही थी
लड़की के पापा ने पूछा बेटा कितना कमाते हो
शकल तुम्हारी फटीचर पर क्या वेतन भी ऐसा ही पाते हो
मैंने बोला पैकेज तो कम्पनी में ठीक ठाक मिल जाता हैं
रोज की तनख्वाह में मेरा फटा जूता सिल जाता हैं
सैंतीस रुपये का भारी ओवर टाइम भी मिल जाता हैं
मुझे दिखाना पड़ा जैसे मेरा पैसा स्विस बैंक जाता हैं
मुझे यूँ तो अच्छे घरो के रिश्ते आते हैं
बस शकल मेरी देख वो ईद के चाँद हो जाते हैं
आखिर क्यों वो मुझे अपनी बेटी देने से मना करते हैं
क्या हुआ अगर मेरे गुण लगभग उनके नौकर रामू से मिलते हैं
सिर्फ ईश्वर एक सीधी सी लड़की बनाना भूल गया था
विवाहित होने का सपना भंवर में डूब गया था
बस इन्ही बातो को लेकर सरल जी उदास हैं
आएगी कोई प्रिया बस यही "वीरेन " को आस हैं
--
!! श्री हरि : !!
बापूजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे
!! श्री हरि : !!
बापूजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे