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रविवार, 13 फ़रवरी 2011

प्रेम और मधुशाला -नशा जीवन का

मै यहाँ कमेन्ट करने गया था
http://kavyawani.blogspot.com/2011/02/blog-post_13.html
फिर कविता बन गयी , आशा हैं आप लोगो को पसंद आये
अब मेरी कविता आगे पढ़े

बूँद बूँद जिसका मै अमृत समझकर गटक गया
मन मेरा उस विष को पीकर भटक गया
क्या प्यार क्या कसमे क्या वादे कोई झटक गया
ना राम ना काम बस मन कही अटक गया
अब तू ही बचाए तो मै जिन्दा रहूँगा
आखिरी साँस तक वर्ना मरता रहूँगा

एक सुख तेरे प्यार का जिस्म कि नस नस में हैं
और कहा कुछ अब दुनिया मेरे बस में हैं
मुझे नहीं पता कि ये मधु था या विष था
प्यार था या मुझे मिटाने कि साजिश था

दुनिया के लोग कहेंगे कि मै नशा करता था
चुपके से तेरी आँखों में जिया करता था
सांसो का तेरी हर पल अंदर भरता था
तू बता क्यों "वीरेन " तुझ पर मरता था

मेरी ऐसी हालत तेरे नशे से थी या खुद का अहम् था
प्यार मेरा सच्चा था या किसी वासना का वहम था
रग रग में दौडती पीड़ा की सुइया गया मै सहम था
मुझ साधक को रुला दिया कैसा ईश्वर का रहम था

हर दर्द हर चीज़ की एक सीमा होती हैं
ताकत मदिरा के नशे की भी कभी धीमा होती हैं
फिर क्यों ना मेरे लिए साकी को तरस आया
नैनो में क्यों ना उसके प्यार का सावन बरस आया

क्यों झूठे प्यार के इतिहास लिखे जाते हैं
जब पूरे सच्चे लोग तरसाए जाते हैं
क्यों मधुशालाये ही बस बदनाम होती हैं
साजिशो की क्यों राहे ना हराम होती हैं

मै रहू ना रहू पर क्या मेरे ना रहने से सब लुट नहीं जायेगा
कभी मधुशाला ना गया मै पर अतीत मुझे नशेडी कहायेगा
इतिहास ना जाने की हर नशे में झूमता शख्स शराबी नहीं हैं
भुन दिया गया जिसे तंदूर में वो सदा कबाब कही हैं

जिसकी आँखों में सपने सदा के लिए चूर चूर हो गए हो
प्याले से भी कही ज्यादा कांच के टुकड़े दिल में टूट गए हो
परम ब्रह्म के प्रारब्ध के लायक पर जीवत्व सांचे भी फूट गए हो
इंद्र को हराने वाले महाभारत के अर्जुन को जैसे भील लूट गए हो

वही वीरेन जो ज्ञान में कभी रमा करता था
उद्धव सी छटा का स्वामी कृष्ण पर हंसा करता था
गोपियों को परम निर्गुण जो बनाने जो कभी कृष्ण से अड़ा था
वही लुटकर अब वृन्दावन के नशे में मिटटी पोत खड़ा था

क्या नशा प्यार का और क्या मधुशाला में रखा हैं
हाथ जोड़ लो परमात्मा को सब उसने रचा हैं
मै उसका और वो अब मुझे अपनाने जुटा हैं
परमात्मा "वीरेन " को बस अब बुलाने उठा हैं .

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...