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रविवार, 23 मई 2010

मंगलोर विमान दुर्घटना और सरकार मीडिया मिश्रित संवेदनहीनता

पहले श्री संजय बेंगानी जी का ये लेख पढ़े जिसके बाद मैं ये पोस्ट लिखने को प्रेरित हुआ . मैंने बस उन्ही के मुद्दों में और चीज़े जोड़ी हैं

http://www.tarakash.com/joglikhi/?p=1724

ये भी शुक्र मानिये कि इसमें ज्यादा हिन्दू या ज्यादा मुस्लिम ही मरे नहीं तो शायद ये इसे इतिहास की साम्प्रदायिक विमान दुर्घटना घोषित करते .
इस दुर्घटना पर जो सरकार तंत्र का रवैया देखा वो बेहद दुखदायी लगा . दूरदर्शन को खबर की कम और सोनिया गाँधी के फर्जी संवदेना सन्देश को दिखाने की ज्यादा होड़ मची थी , बस ये खबर दिखी तो शुरू में तो " मंगलोर में विमान दुर्घटना , सोनिया ने अफ़सोस जताया " बेमतलब का ड्रामा , चाहे सोनिया गाँधी को इस खबर के बारे में पता ना हो उस समय तक . जैसे ये दीवाली और होली की शुभकामना देने वाला समय हो . सब चापलूसी लगती हैं .

कोढ़ में खाज तो मुझे आज की एयर इंडिया की प्रेस कोंफ्रेंस लगी जिसमे एक सुन्दर महिला ( श्रीमती हरप्रीत ) को सिर्फ फेस वैल्यू के हिसाब से जिम्मा मिला था बोलने का (मुझे ऐसा लगा )वो चेहरे से इतनी खुश और तरोताजा दिखी की लगा कि जैसे यहाँ कोई ख़ुशी का अवसर हो , ( अरे यार झूठी एक्टिंग ही कर लो उदास होने की ) . उनके चेहरे पर इतने प्रेस के रूबरू होने की ख़ुशी ज्यादा झलक रही थी जो इतने संवेदन शील मुद्दे पर किसी जिम्मेदार व्यक्ति से अपेक्षित नहीं होती हैं . कई बाते सुनकर तो दुःख और हंसी भी रही थी . जैसे वो कह रही थी की हमने सारे इंतजाम कर लिए हैं डॉक्टर्स की टीम और दुसरे जरुरी स्टाफ के लिए पहले ही होटल वगैरह और हॉस्पिटल बुक कर लिए हैं जैसे कोई ख़ुशी का समारोह हो .

वो जिस तरह के इंतजाम बता रही थी उसमे सात घायल लोगो जो पहले ही दाखिल हैं उन्हें क्या लाभ होना हैं क्योंकि ये बोझ तो हम सबको पता हैं परिवार वाले खुद ही उठाएंगे और प्रेस कोंफ्रेंस में सरकार . सरकार तो कसाब के इंतज़ाम में मरी जा रही हैं . जहाज पूरा जल चुका हैं और डेड बॉडी परिवार वाले खुद ही सँभालते हैं हमेशा , क्या हमें शहीदों के साथ हुए उदाहरण याद नहीं हैं . फिर ये मैडम पता नहीं कौन सा इंतज़ाम किसलिए करवा रही थी . लगता हैं सरकार के लोग इस मामले में भी इन्तेजाम के नाम पर पैसा खाने को रणनीति बनाने में जुट गए हो .

कोंग्रेस सरकार तो वैसे ही लीपापोती करने में माहिर हैं , खूब ड्रामा कर रही हैं . पहले प्रफुल्ल पटेल जी का इस्तीफ़ा देने वाली परम्परा में बढ़ना , मनमोहन जी का इस्तीफ़ा अस्वीकारना और हम गरीब जानता के मुह पर दो दो लाख फेंक कर मारना कि जैसे अपनी जेब से दे रहे हो और बस सरकार पाक साफ़ . असल मुद्दे पता नहीं क्यों पीछे छोड़ देते हैं प्रधानमंत्री और सोनिया गाँधी जी के लोग कि इतनी बड़ी दुर्घटना पर किसी कि सुई जितनी जिम्मेदारी नहीं इसका मतलब एक भारतीय कही मर जाये तो दो लाख मिलने से हर चीज़ खत्म होगईअधिकतर वैसे ऐसा श्रीमती शीला दीक्षित जी बहुत करती हैं जैसे कि लोग सिर्फ दो लाख रुपये लेने के मरे हैंदुर्घटना होने के बाद सबसे पहली खबर मुआवजा बाँटने की आती हैं ।

और ऊपर से कुछ गैर जिम्मेदार लोग मानवीय दुर्घटना में भी धार्मिकता का कोण देख लेते हैंमेरा मन तो अब भी मीडिया को धन्यवाद दे रहा हैं कि कही इन्होने इस कोण से चीज़े देखि होती कि पायलेट हिन्दू था मुस्लिम ।, अगर हिन्दू तो साम्प्रदायिक अगर मुस्लिम तो जुनूनी जेहादीअगर ईसाई तो विदेशी हाथ हो सकता हैं ऐसी ऐसी फर्जी रिपोर्टएक भारतीय कही खो गया एक धार्मिक भारतीय जो हिन्दू भी हैं मुस्लिम भी हैं ईसाई भी हैं वो कही सच में खो गया हैं
वैसे सच कहूँ तो सुरेश चिपलूनकर जी जो बातें कोंग्रेस और मीडिया के बारे में करते हैं वो कभी कभी सौ प्रतिशत सच लगती हैंसारी खबरे खबरे ना होकर प्रायोजित कार्यक्रम लगते हैं

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...