गुडगाँव वैसे तो कहने को साइबर सिटी हैं । पर कई जगहों पर इतनी समस्या हैं कि आप का मन बस बिलकुल तौबा कर ले । जमीनों के रेट इतने महंगे हैं की बिना कर्जा लिए एक आम मध्यम वर्गीय मकान नहीं खरीद सकता । यह सारा काम कभी कभी लगता हैं की भ्रष्टाचारो की वैतरणी में गोता लगी रही सरकारों के कारन लगता हैं । सरकारों ने पैसे के लालच में हर जगह बस फ्लैट बनाने वाले कम्पनियों को जमीन उपलब्ध करवाई हैं . इसमें सबसे दुखद ये हैं की ये जमीन कृषि योग्य थी .
विदेशो की तर्ज़ पर S E Z बनाने वाले भूल गए की चीन में दस S E Z हैं और सारे समुद्र के पास और बंजर और बेकार भूमि पर । मतलब उन्होंने हमारी तरह कृषि योग्य भूमि को प्रयोग में नहीं लाया । गुडगाँव के सारे मूल निवासी जिनके पास बेचने के लिए जमीन नहीं हैं उनका दिल शहरी चकाचौंध को देखकर टूट जाता हैं . अंदर गुडगाँव में जो पुराने निवासी और आस पास के गाँव में जो लोग रहते हैं ।
जिनके पास जमीन हैं उनका तो लगभग उद्धार जमीन बेचने से हो गया हैं । या फिर कई तो बस सिर्फ किराये के मकान की आमदनी ( जो बीस पच्चीस हज़ार आराम से हो जाती हैं ) से ही एश कर रहे हैं । उन बन्दों को कोई काम नहीं होता । सुबह जब हम कम्पनी के लिए निकलते हुए इन्हें देखते हैं तो दुःख होता हैं की देखो कुछ करने की जरुरत नहीं । ये लोग सुबह राजनीति पर चर्चा कर रहे होते हैं और शाम को भी बिलकुल उसी पोज़ में बैठे मिलेंगे । पूरे दिन की कोई आऊट पुट नहीं । पर फिर भी हमारे जितनी ही इनकी आमदनी और खर्चे होते हैं , शायद कइयो कि तो हमसे कई गुना ज्यादा आमदनी हैं ।
पर फिर भी यहाँ फ्लैट के रेट भी बहुत ज्यादा हैं । सबसे ज्यादा हंसी तो विज्ञापनों में लगे रेट को देखकर आती हैं । पैंतीस लाख रुपये में तो तीन बी एच के मिलता हैं । इसे भी मेरे कई अमीर मित्र reasonable कहकर बस मेरा मन दुखी करते हैं । तीस चालीस हज़ार की सेलरी वाला भी कितनी कोशिश कर ले बिना लोन लिया बेचारा यहाँ घर नहीं बना सकता ।
और साफ़ सफाई के हिसाब से कई जगह तो बस दुर्दशा ही हैं . डी एल एफ ही हैं जिसके सहारे पूरे गुडगाँव को जाना जा रहा हैं जैसे ही आप इसे छोड़ देंगे आपको रियल भारत दिखेगा जैसे पूरे वातावरण में हमेशा धूल रहेगी । जैसे मरुस्थल में रहती हो । हमारे कई दुसरे राज्यों के दोस्त कभी समझ ही नहीं पाते कि गुडगाँव में इतनी धूल आती कहाँ से हैं ।
और एक वास्तविक समस्या गुडगाँव से मानेसर ( जयपुर हाइवे ) पर आपको आपको कोई दस किलोमीटर का यु टर्न हैं । यह भी अब दो घंटे मुख्यमंत्री के आदेश पर खोला जाता हैं हीरो होंडा चौक पर । अब हीरो होंडा चौक को ही ले , जो लोग रोज़ मानेसर जाते हैं उन्हें पता होगा । यहाँ पता नहीं क्यों लगभग हर रोज़ सीवेरेज़ का पानी इतना हो जाता हैं की हाइवे की सारी गाड़िया दो फुट पानी में खड़ी हो जाती हैं । और गलती से जल्दी के चक्कर में सर्विस लेन में चले गए तो बस भगवान् ही मालिक हैं आपका । इस समस्या की तरफ पता नहीं प्रशासन का ध्यान क्यों नहीं जाता । वहां से गुजरते हुए जाम लगता हैं और आप बिलकुल बदबू से बेहाल हो जाते हैं । सबसे बुरा हाल उन कम्पनी कर्मचारियो का होता हैं जो बेचारे अपनी कम्पनी की बस का यहाँ इंतज़ार करते हैं ।
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