
ब्रह्मजी के नौ मानस पुत्रो में से एक ऋषि अत्री को हम सब जानते हैं । उनकी पत्नी सती अनसूया को भी सभी धार्मिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति जानते ही हैं । इनमे ब्रह्म जी के अंश से चंद्रमा का जन्म हुआ । देवगुरु ब्रहस्पति की पत्नी तारा और चन्द्रमा से बुध का जन्म हुआ । बुध और इला से पुरुरवा का जन्म हुआ ।
इला एक शापित स्त्री थी । जो वास्तव में एक पुरूष था । वो महाराजा मनु का पुत्र था और उसका नाम था राजा सुद्युम्न । वो राजा एक बार एक वन में शिकार खेलने गया । शिव जी और माता पार्वती उस वन में विहार कर रहे थे । माता पार्वती के संकोच को दूर करने के लिए शिव जी ने कहा कि शिव जी के अलावा कोई भी पुरूष इस वन में प्रवेश करेगा वो स्त्री हो जाएगा ।
तब भगवन शिव के श्राप से राजा सुद्युम्न एक स्त्री हो गए और इनका पड़ा इला । इला और बुध का पुत्र हुआ -पुरुरवा । पुरुरवा और अप्सरा उर्वशी के विवाह से विजय आदि छः पुत्र हुए ।
अब यहाँ से यदुवंश और पुरुवंश शुरू होता है
पुरुरवा और उर्वशी के विजय और आयु आदि छः पुत्र हुए ,
आयु के पुत्र हुए नहुष जो एक बार इंद्र भी बन गए थे पर देवी शची और सप्तर्षि के श्राप के कारन पदच्युत हो गए थे । नहुष के बेटे हुए ययाति , ययाति के देवायनी से दो पुत्र हुए यदु और तुर्वशु । ययाति के शर्मिष्ट से पुरु आदि तीन पुत्र हुए । पुरु सबसे छोटे थे । यदुवंश में श्री कृष्ण हुए और पुरुवंश में अर्जुन हुए ।
यदुवंश
यदु से बारहवी पीढ़ी में में विदर्भ हुए । विदर्भ से इक्कीसवीं पीढ़ी में सात्वत्त हुए । सात्वत्त के पुत्र हुए वृशनी और अन्धक । अन्धक पीढ़ी में देवकी जी हुई । वृशनी के पड़ पोते का नाम भी वृशनी ही था । इस पडपोते के दो बेटे हुए । चित्ररथ और श्वाफल्क । श्वाफल्क से तीन पीढ़ी बाद सत्यकी हुए ।
चित्ररथ से आठ पीढ़ी बाद वासुदेव जी हुए और उनके पुत्र हुए
भगवान् श्री कृष्ण
भगवन श्री कृष्ण >प्रद्युम्न >अनिरुद्ध >वज्रनाभ
अब इससे आगे का आप ख़ुद भी ग्रंथों से सन्दर्भ ले सकते हैं । वैसे यदुवंश अभी भी चल रहा है यादवों या अहीरों के नाम से ।
अर्जुन वंश
राजा पुरु से ही शुरू करते हैं । पुरु की उन्नीस वे पीढ़ी में रैभ्य का जन्म हुआ । रैभय से दुष्यंत , और फ़िर दुष्यंत
और शकुन्तला से राजा भरत । भारत ने दत्तक पुत्र भरद्वाज को राजा बनाया जो बहुत विवादस्पद था राज परिवार के लिए , परन्तु भारत ने योग्यता के अनुसार चुनाव किया ।
भरद्वाज के ब्रह्तक्ष्त्र ,उनके हस्ती ( हस्तिनापुर इन्ही के नाम से बना ) हस्ती के अज्मीध फ़िर चार पीढ़ी बाद कुरु
जिनके नाम से आगे वाली सारे पीढ़ी कुरुवंश या कौरव कही जाने लगी । फ़िर कुरु से चौदह पीढ़ी बाद शांतनु और देवापी दोनों भाई हुए । देवापी बड़े थे पर वो तपस्या के लिए चले गए । जब भगवान् कल्कि जन्म लेंगे तब वे फ़िर प्रगट होंगे। शांतनु के बेटे भीष्म पितामह ,चित्रांगद और विचित्रवीर्य हुए ।
विचित्रवीर्य >पांडू >अर्जुन >अभिमन्यु >परीक्षित >जन्मेजय
फ़िर जन्मेजय के बाद छब्बीसवीं पीढ़ी में रजा क्षेमक अन्तिम राजा हुए .




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