इस कड़ी में ये मेरी दूसरी कविता हैं । असल में पहले सोचा कि इन्हें भागो में ब्लॉग में ना डालू पर समरूप होने के कारन कविता कि मौलिकता नष्ट नहीं होती और पढने वाले के विचारो में तादात्मय स्थापित रहता हैं । अब क्योंकि मन में भावुकता ज्यादा हैं तो सोचा प्यार के विषय पर शायद काफी कविताये लिख सकता हूँ। वैसे ये सब कुछ अनुभव पर आधारित हैं । आशा हैं आपको थोड़ी बहुत तो पसंद आएगी ही भले ही आपने प्यार को महसूस किया हो या ना किया हो ।
इस कविता का पहला भाग ये हैं, जिसने नहीं पढ़ा हो कृपया लिंक देखे
http://saralkumar.blogspot.com/2010/03/blog-post_9229.html
कोई और मुझे अब भाती नहीं , और वो मुझे अपनाती नहीं
मेरी जिंदगी घडी भर उसके बिना कटी नहीं
पर उसकी नज़र मेरी तरफ उठी ही नहीं
मुझे लगता हैं कि मेरे प्यार में ये कमी हैं
कि आँखों में दुखो से भी ज्यादा नमी हैं
उसके आंसू पोंछने की शायद सजा मिल गयी हैं
उसको सहारा देते देते मेरी जमीन हिल गयी हैं
यूँ तो मेरे हालात पर लगभग सब लोग तरस खाते हैं
पर ज्ञान के चरम बिन्दु इसे पञ्च तत्वों का मोह बताते हैं
प्यार का सागर जब उसके लिए बह उठा
तो प्यार बंटता देख ईश्वर भी कह उठा
अब तेरे दिल में सिर्फ मेरे लिए प्यार नहीं
वीरेन अब मुझसे होगा तेरा उद्धार नहीं
ईश्वर जानता हैं कि वो मुझे चाहती ही नहीं
उसके दिल में मेरे लिए कोई प्रेम पाती भी नहीं
फिर क्यों मैं एकतरफा प्यार में मर गया हूँ
फूल अर्थी पर चढ़कर जैसे सज गया हूँ
पता नहीं गलती से किस रस्ते पर मुड गया हूँ
बीच चौराहे पर जैसे अकेला लुट गया हूँ
संसार में जैसे मुझे कुछ कमाना नहीं हैं
जिंदगी में मुझे अब कुछ पाना नहीं हैं
सब ख़त्म ऐसे हुआ कि रो पड़ता हूँ
बिछुड़ा अपनों से कि खो सकता हूँ
मेरी आँखों के आंसू मुझसे सहन नहीं होते
क्यों कभी सच्चे प्यार नसीब में नहीं होते
दर्द से भरी इस दुनिया में कभी गरीब ना होते
ईश्वर अगर आप हमारे इतने करीब ना होते
अभी बस थोड़ी ही पंक्तिया ही बना पाया हूँ । आगे और भागो में बनाने और आपको भेजने कि कोशिश करूँगा .
शुक्रवार, 2 अप्रैल 2010
बुधवार, 31 मार्च 2010
महापंचायतो के खिलाफ न्यायालय का एक ऐतिहासिक फैसला ( क्या हालात सुधरेगे ?"
कृपया पहले अगर आप हरदीप जी कि ये ब्लॉग पोस्ट पढेंगे तो थोडा पूरक सामग्री भी आपको मिलेगी ।
http://hardeeprana.blogspot.com/2010/03/blog-post_31.html
लेखक की संवेदना गहरी मानवीय संवेदना हैं . हरदीप ने इस पोस्ट में सही विश्लेषण किया जिसमे मुझे कहना पड़ा
" समर्थ को नहीं दोष गोसाई :
हमारे देश के संविधान या कानून में सच में ही अजीब हैं और फिर इसमें फंसते सिर्फ असहाय लोग ही हैं ।
इसी कड़ी में कहना पड़ेगा की पांच सात मजदूरों को सोयी अवस्था में अपनी B M W कार से कुचलने वाले तो एश में हैं और संसद और देश की आन पर हमले वालो को बचने के लिए मानव अधिकार का पेंच ढूंढ लिया जाता हैं .
ये तो बेचारे गाँव के कुछ लोग जिन्हें हमारे समाज के आधुनिक होने का पता नहीं हैं . इनको क्या पता की हमारे न्यायलय ने तो लड़के से लड़के की शादी तक को मान्यता दे दी हैं . इन पंचायत के लोगो को बस कहा जा सकता हैं किसी झूठी तथाकथित खानदानी इज्ज़त के लिए मजबूर हुए होंगे . उनका अपराध तो बिलकुल अक्षम्य हैं फिर दुःख ये हैं की गाँव के लोगो से नेताओ को सिर्फ वोट चाहिए और खुद नेता चाहते हैं कि लोग पिछड़े ही रहे . जब सो डेढ़ सो पुलिस वाले गुडगाँव में मुख्यमंत्री के कहने पर हज़ारो होंडा कर्मचारियो को कुत्तो कि तरह पीट सकते हैं तो क्या पांच लोगो से एक पति पत्नी को नहीं बचा सकते थे . खबर हमने सुनी थी कि जब इनको बचने के लिए उच्च न्यायलय से आदेश थे फिर किसकी इतनी हिम्मत हुई कि सबके सामने दो लोगो को मार दिया गया ।
जब संविधान में लिखा हैं कि बालिग लड़का लड़की शादी कर सकते हैं फिर भी पुलिस वालो के सामने कैसे उन्हें मार दिया गया . क्या गृह मंत्रालय कि कोई जिम्मेदारी नहीं बनती , आठ हज़ार कि तन्खवाह वाला सिपाही बेचारा कैसे पंचायतो कि भीड़ से निपट सकता हैं . एक भी छोटे से छोटे से नेता ने उस समय इसकी बुराई नहीं कि क्योंकि चुनाव का डर था . और गैरत ऐसी कि अब भी न्यायलय के इस निर्णय का समर्थन भी नहीं .
गोत्र और अंतरजातीय विवाद में हमारे हरियाणा में इतने इतने काण्ड हुए हैं कि मन तौबा कर जाये पर दिक्कत ये हैं कि इन्ही महापंचायतो के मतदान निर्णय से नेता जीतते और हारते हैं . इसीलिए मुख्यमंत्री तो क्या प्रधानमंत्री जिन्हें ऑस्ट्रेलिया में हुए एक मुसलमान पर हमले से रात को नींद नहीं आई अपने ही दिल्ली से तीन तरफ से सटे हरयाणा में हो रहे नरसंहारो पर कुम्भकरण बन जाते हैं । जिस परिवार के लोग मरते हैं वो जानते हैं कि जिंदगी क्या होती हैं । हर चीज़ में कायरो कि तरह बस न्यायलय को बलि का बकरा बनाया जाता हैं । अरे क्या अपने सामने मरती जिंदगी में हर बार सुप्रीम कोर्ट मदद करेगा .
हमारे देश में तीन चार विचारधाराओं के लोग एक साथ जी रहे हैं । एक तो हमारे जैसे पिछड़े हैं जहाँ गोत्र तक का ध्यान एक सामान्य शादी में रखा जाता हैं , बिलकुल सच कहूँगा स्वयं मुझे अपने रिश्ते के लिए गोत्र विवाद के चलते योग्य लड़की नहीं मिल पा रही हैं . कही मम्मी का गोत्र मिलता हैं कही दादी का । अपना खुद को तो खैर कभी हो ही नहीं सकता हैं ।
एक दूसरा समाज हैं जो हाई फाई लोग जो लिव इन और गे marriage करके भी आराम से रहते हैं । यहाँ कोई पंचायत नहीं हैं क्योंकि इनके पास पैसा पॉवर मीडिया और विदेशी लिंक हैं । शायद इसीलिए मेरे मुह से निकला समर्थ को नहीं दोष गोसाई । एक छोटा सा सा सच्चा उदहारण । एक हमारे युवा भारतीय नेता हैं श्री सचिन पायलट । वो तो बिलकुल परिपक्व हैं और उनके अपने प्रोफाइल में पूरी अच्छी छवि भी दिखती हैं ।, हर कोण से वो एक आधुनिक चेहरा हैं । इतने उदार कि इन्होने हर पिछड़ी सोच को दरकिनार करते हुए एक मुस्लिम लड़की (जो कि फारूख अब्दुल्ला कि बेटी हैं) से शादी कर ली । अब देखिये ये गुर्जर नेता हैं और मैं भी गुर्जर समाज से सबंधित रखता हूँ । हमारे बड़े बूढ़े इन्हें बेमतलब इन्हें गुर्जर नेता बेमतलब इन्हें गुर्जर कि शान आदि आदि नमो से नवाज देते हैं । पर अगर हम इनकी तरह अंतर धर्म तो क्या अगर अंतरजातीय विवाह तो क्या गोत्र का ध्यान रखे बिना अगर हम शादी कर लेते हैं तो हमारा सामाजिक बहिष्कार तय हैं पर सचिन जी कभी नहीं कहते कि वो गुर्जर नेता हैं । इतना द्विअर्थी मापदंड हैं कि बस निराशा ही हाथ लगती हैं .
!! श्री हरि : !!
बापूजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे
http://hardeeprana.blogspot.com/2010/03/blog-post_31.html
लेखक की संवेदना गहरी मानवीय संवेदना हैं . हरदीप ने इस पोस्ट में सही विश्लेषण किया जिसमे मुझे कहना पड़ा
" समर्थ को नहीं दोष गोसाई :
हमारे देश के संविधान या कानून में सच में ही अजीब हैं और फिर इसमें फंसते सिर्फ असहाय लोग ही हैं ।
इसी कड़ी में कहना पड़ेगा की पांच सात मजदूरों को सोयी अवस्था में अपनी B M W कार से कुचलने वाले तो एश में हैं और संसद और देश की आन पर हमले वालो को बचने के लिए मानव अधिकार का पेंच ढूंढ लिया जाता हैं .
ये तो बेचारे गाँव के कुछ लोग जिन्हें हमारे समाज के आधुनिक होने का पता नहीं हैं . इनको क्या पता की हमारे न्यायलय ने तो लड़के से लड़के की शादी तक को मान्यता दे दी हैं . इन पंचायत के लोगो को बस कहा जा सकता हैं किसी झूठी तथाकथित खानदानी इज्ज़त के लिए मजबूर हुए होंगे . उनका अपराध तो बिलकुल अक्षम्य हैं फिर दुःख ये हैं की गाँव के लोगो से नेताओ को सिर्फ वोट चाहिए और खुद नेता चाहते हैं कि लोग पिछड़े ही रहे . जब सो डेढ़ सो पुलिस वाले गुडगाँव में मुख्यमंत्री के कहने पर हज़ारो होंडा कर्मचारियो को कुत्तो कि तरह पीट सकते हैं तो क्या पांच लोगो से एक पति पत्नी को नहीं बचा सकते थे . खबर हमने सुनी थी कि जब इनको बचने के लिए उच्च न्यायलय से आदेश थे फिर किसकी इतनी हिम्मत हुई कि सबके सामने दो लोगो को मार दिया गया ।
जब संविधान में लिखा हैं कि बालिग लड़का लड़की शादी कर सकते हैं फिर भी पुलिस वालो के सामने कैसे उन्हें मार दिया गया . क्या गृह मंत्रालय कि कोई जिम्मेदारी नहीं बनती , आठ हज़ार कि तन्खवाह वाला सिपाही बेचारा कैसे पंचायतो कि भीड़ से निपट सकता हैं . एक भी छोटे से छोटे से नेता ने उस समय इसकी बुराई नहीं कि क्योंकि चुनाव का डर था . और गैरत ऐसी कि अब भी न्यायलय के इस निर्णय का समर्थन भी नहीं .
गोत्र और अंतरजातीय विवाद में हमारे हरियाणा में इतने इतने काण्ड हुए हैं कि मन तौबा कर जाये पर दिक्कत ये हैं कि इन्ही महापंचायतो के मतदान निर्णय से नेता जीतते और हारते हैं . इसीलिए मुख्यमंत्री तो क्या प्रधानमंत्री जिन्हें ऑस्ट्रेलिया में हुए एक मुसलमान पर हमले से रात को नींद नहीं आई अपने ही दिल्ली से तीन तरफ से सटे हरयाणा में हो रहे नरसंहारो पर कुम्भकरण बन जाते हैं । जिस परिवार के लोग मरते हैं वो जानते हैं कि जिंदगी क्या होती हैं । हर चीज़ में कायरो कि तरह बस न्यायलय को बलि का बकरा बनाया जाता हैं । अरे क्या अपने सामने मरती जिंदगी में हर बार सुप्रीम कोर्ट मदद करेगा .
हमारे देश में तीन चार विचारधाराओं के लोग एक साथ जी रहे हैं । एक तो हमारे जैसे पिछड़े हैं जहाँ गोत्र तक का ध्यान एक सामान्य शादी में रखा जाता हैं , बिलकुल सच कहूँगा स्वयं मुझे अपने रिश्ते के लिए गोत्र विवाद के चलते योग्य लड़की नहीं मिल पा रही हैं . कही मम्मी का गोत्र मिलता हैं कही दादी का । अपना खुद को तो खैर कभी हो ही नहीं सकता हैं ।
एक दूसरा समाज हैं जो हाई फाई लोग जो लिव इन और गे marriage करके भी आराम से रहते हैं । यहाँ कोई पंचायत नहीं हैं क्योंकि इनके पास पैसा पॉवर मीडिया और विदेशी लिंक हैं । शायद इसीलिए मेरे मुह से निकला समर्थ को नहीं दोष गोसाई । एक छोटा सा सा सच्चा उदहारण । एक हमारे युवा भारतीय नेता हैं श्री सचिन पायलट । वो तो बिलकुल परिपक्व हैं और उनके अपने प्रोफाइल में पूरी अच्छी छवि भी दिखती हैं ।, हर कोण से वो एक आधुनिक चेहरा हैं । इतने उदार कि इन्होने हर पिछड़ी सोच को दरकिनार करते हुए एक मुस्लिम लड़की (जो कि फारूख अब्दुल्ला कि बेटी हैं) से शादी कर ली । अब देखिये ये गुर्जर नेता हैं और मैं भी गुर्जर समाज से सबंधित रखता हूँ । हमारे बड़े बूढ़े इन्हें बेमतलब इन्हें गुर्जर नेता बेमतलब इन्हें गुर्जर कि शान आदि आदि नमो से नवाज देते हैं । पर अगर हम इनकी तरह अंतर धर्म तो क्या अगर अंतरजातीय विवाह तो क्या गोत्र का ध्यान रखे बिना अगर हम शादी कर लेते हैं तो हमारा सामाजिक बहिष्कार तय हैं पर सचिन जी कभी नहीं कहते कि वो गुर्जर नेता हैं । इतना द्विअर्थी मापदंड हैं कि बस निराशा ही हाथ लगती हैं .
!! श्री हरि : !!
बापूजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे
दैनिक कडिया भाग पांच ( गुडगाँव विशेष )
गुडगाँव वैसे तो कहने को साइबर सिटी हैं । पर कई जगहों पर इतनी समस्या हैं कि आप का मन बस बिलकुल तौबा कर ले । जमीनों के रेट इतने महंगे हैं की बिना कर्जा लिए एक आम मध्यम वर्गीय मकान नहीं खरीद सकता । यह सारा काम कभी कभी लगता हैं की भ्रष्टाचारो की वैतरणी में गोता लगी रही सरकारों के कारन लगता हैं । सरकारों ने पैसे के लालच में हर जगह बस फ्लैट बनाने वाले कम्पनियों को जमीन उपलब्ध करवाई हैं . इसमें सबसे दुखद ये हैं की ये जमीन कृषि योग्य थी .
विदेशो की तर्ज़ पर S E Z बनाने वाले भूल गए की चीन में दस S E Z हैं और सारे समुद्र के पास और बंजर और बेकार भूमि पर । मतलब उन्होंने हमारी तरह कृषि योग्य भूमि को प्रयोग में नहीं लाया । गुडगाँव के सारे मूल निवासी जिनके पास बेचने के लिए जमीन नहीं हैं उनका दिल शहरी चकाचौंध को देखकर टूट जाता हैं . अंदर गुडगाँव में जो पुराने निवासी और आस पास के गाँव में जो लोग रहते हैं ।
जिनके पास जमीन हैं उनका तो लगभग उद्धार जमीन बेचने से हो गया हैं । या फिर कई तो बस सिर्फ किराये के मकान की आमदनी ( जो बीस पच्चीस हज़ार आराम से हो जाती हैं ) से ही एश कर रहे हैं । उन बन्दों को कोई काम नहीं होता । सुबह जब हम कम्पनी के लिए निकलते हुए इन्हें देखते हैं तो दुःख होता हैं की देखो कुछ करने की जरुरत नहीं । ये लोग सुबह राजनीति पर चर्चा कर रहे होते हैं और शाम को भी बिलकुल उसी पोज़ में बैठे मिलेंगे । पूरे दिन की कोई आऊट पुट नहीं । पर फिर भी हमारे जितनी ही इनकी आमदनी और खर्चे होते हैं , शायद कइयो कि तो हमसे कई गुना ज्यादा आमदनी हैं ।
पर फिर भी यहाँ फ्लैट के रेट भी बहुत ज्यादा हैं । सबसे ज्यादा हंसी तो विज्ञापनों में लगे रेट को देखकर आती हैं । पैंतीस लाख रुपये में तो तीन बी एच के मिलता हैं । इसे भी मेरे कई अमीर मित्र reasonable कहकर बस मेरा मन दुखी करते हैं । तीस चालीस हज़ार की सेलरी वाला भी कितनी कोशिश कर ले बिना लोन लिया बेचारा यहाँ घर नहीं बना सकता ।
और साफ़ सफाई के हिसाब से कई जगह तो बस दुर्दशा ही हैं . डी एल एफ ही हैं जिसके सहारे पूरे गुडगाँव को जाना जा रहा हैं जैसे ही आप इसे छोड़ देंगे आपको रियल भारत दिखेगा जैसे पूरे वातावरण में हमेशा धूल रहेगी । जैसे मरुस्थल में रहती हो । हमारे कई दुसरे राज्यों के दोस्त कभी समझ ही नहीं पाते कि गुडगाँव में इतनी धूल आती कहाँ से हैं ।
और एक वास्तविक समस्या गुडगाँव से मानेसर ( जयपुर हाइवे ) पर आपको आपको कोई दस किलोमीटर का यु टर्न हैं । यह भी अब दो घंटे मुख्यमंत्री के आदेश पर खोला जाता हैं हीरो होंडा चौक पर । अब हीरो होंडा चौक को ही ले , जो लोग रोज़ मानेसर जाते हैं उन्हें पता होगा । यहाँ पता नहीं क्यों लगभग हर रोज़ सीवेरेज़ का पानी इतना हो जाता हैं की हाइवे की सारी गाड़िया दो फुट पानी में खड़ी हो जाती हैं । और गलती से जल्दी के चक्कर में सर्विस लेन में चले गए तो बस भगवान् ही मालिक हैं आपका । इस समस्या की तरफ पता नहीं प्रशासन का ध्यान क्यों नहीं जाता । वहां से गुजरते हुए जाम लगता हैं और आप बिलकुल बदबू से बेहाल हो जाते हैं । सबसे बुरा हाल उन कम्पनी कर्मचारियो का होता हैं जो बेचारे अपनी कम्पनी की बस का यहाँ इंतज़ार करते हैं ।
विदेशो की तर्ज़ पर S E Z बनाने वाले भूल गए की चीन में दस S E Z हैं और सारे समुद्र के पास और बंजर और बेकार भूमि पर । मतलब उन्होंने हमारी तरह कृषि योग्य भूमि को प्रयोग में नहीं लाया । गुडगाँव के सारे मूल निवासी जिनके पास बेचने के लिए जमीन नहीं हैं उनका दिल शहरी चकाचौंध को देखकर टूट जाता हैं . अंदर गुडगाँव में जो पुराने निवासी और आस पास के गाँव में जो लोग रहते हैं ।
जिनके पास जमीन हैं उनका तो लगभग उद्धार जमीन बेचने से हो गया हैं । या फिर कई तो बस सिर्फ किराये के मकान की आमदनी ( जो बीस पच्चीस हज़ार आराम से हो जाती हैं ) से ही एश कर रहे हैं । उन बन्दों को कोई काम नहीं होता । सुबह जब हम कम्पनी के लिए निकलते हुए इन्हें देखते हैं तो दुःख होता हैं की देखो कुछ करने की जरुरत नहीं । ये लोग सुबह राजनीति पर चर्चा कर रहे होते हैं और शाम को भी बिलकुल उसी पोज़ में बैठे मिलेंगे । पूरे दिन की कोई आऊट पुट नहीं । पर फिर भी हमारे जितनी ही इनकी आमदनी और खर्चे होते हैं , शायद कइयो कि तो हमसे कई गुना ज्यादा आमदनी हैं ।
पर फिर भी यहाँ फ्लैट के रेट भी बहुत ज्यादा हैं । सबसे ज्यादा हंसी तो विज्ञापनों में लगे रेट को देखकर आती हैं । पैंतीस लाख रुपये में तो तीन बी एच के मिलता हैं । इसे भी मेरे कई अमीर मित्र reasonable कहकर बस मेरा मन दुखी करते हैं । तीस चालीस हज़ार की सेलरी वाला भी कितनी कोशिश कर ले बिना लोन लिया बेचारा यहाँ घर नहीं बना सकता ।
और साफ़ सफाई के हिसाब से कई जगह तो बस दुर्दशा ही हैं . डी एल एफ ही हैं जिसके सहारे पूरे गुडगाँव को जाना जा रहा हैं जैसे ही आप इसे छोड़ देंगे आपको रियल भारत दिखेगा जैसे पूरे वातावरण में हमेशा धूल रहेगी । जैसे मरुस्थल में रहती हो । हमारे कई दुसरे राज्यों के दोस्त कभी समझ ही नहीं पाते कि गुडगाँव में इतनी धूल आती कहाँ से हैं ।
और एक वास्तविक समस्या गुडगाँव से मानेसर ( जयपुर हाइवे ) पर आपको आपको कोई दस किलोमीटर का यु टर्न हैं । यह भी अब दो घंटे मुख्यमंत्री के आदेश पर खोला जाता हैं हीरो होंडा चौक पर । अब हीरो होंडा चौक को ही ले , जो लोग रोज़ मानेसर जाते हैं उन्हें पता होगा । यहाँ पता नहीं क्यों लगभग हर रोज़ सीवेरेज़ का पानी इतना हो जाता हैं की हाइवे की सारी गाड़िया दो फुट पानी में खड़ी हो जाती हैं । और गलती से जल्दी के चक्कर में सर्विस लेन में चले गए तो बस भगवान् ही मालिक हैं आपका । इस समस्या की तरफ पता नहीं प्रशासन का ध्यान क्यों नहीं जाता । वहां से गुजरते हुए जाम लगता हैं और आप बिलकुल बदबू से बेहाल हो जाते हैं । सबसे बुरा हाल उन कम्पनी कर्मचारियो का होता हैं जो बेचारे अपनी कम्पनी की बस का यहाँ इंतज़ार करते हैं ।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...
-
सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...
-
सुबह सुबह लोग भक्ति के संगीत में डूबने का नाटक करते हुए उस भगवान् को बेवक़ूफ़ बनाते हैं जो हम सबसे ज्यादा चालाक हैं और...
-
सबसे पहले तो आप का धन्यवाद जो आपने अपना कीमती समय ख़राब करने की ठान ही ली हैं । दूसरा सरल कुमार जी बेचारे महत्वाकांक...