दोस्ती ईश्वर का सबसे नजदीक का भाव हैं . मुझे अपने सारे दोस्तों में ईश्वर दीखता हैं इसीलिए उनसे कुछ भी छिपा नहीं सकता। दोस्त इसीलिए भी थोड़े पास होते हैं क्योंकि जो बात कुछ लोग घर में नहीं बता सकते वो दोस्त के सामने दिल खोलकर बता सकते हैं और हर सच्चा दोस्त कभी भी आपकी गलती तक पर शर्मिंदा नहीं होने देगा ओर बोल देगा की हालात ऐसे हैं तुम्हारी गलती नहीं हैं। मेरी एक सहृदय और परम विदुषी दोस्त हैं जो आजकल मुझसे बहुत नाराज़ चल रही हैं , जो गलती मैंने की ही नहीं हैं वो कुछ अपनी समझ से मानकर मुझसे बात करना बंद कर चुकी हैं । अब ऐसे हालात में पिटी पिटाई जिंदगी में कविता के अलावा कुछ सूझा ही नहीं । अब सरल मन को जटिल समाधान समझ नहीं आते । उसकी नाराज़गी को समर्पित एक कविता हैं । आप भी कभी नाराज़ दोस्त को मनाना चाहो तो मेरी रचित इस कविता को अपने दोस्त को मोडिफाई करके सुना सकते हो , कोई कोपी राइट नहीं हैं । किसीकी जिंदगी बच जाये इससे बड़ी रोयलिटी कुछ नहीं हैं । और देखो मेरा क्या हैं मन बुद्धि परमात्मा ने दिए , तन मातापिता ने तो मेरा अपना क्या हैं जो मैं हकदार बनू । काश वो दोस्त इसे पढ़े और मुझे उस गलती के लिए माफ़ कर दे जो मैंने की ही नहीं हैं .
तेरी आंख में आंसू हो तो मनाऊंगा
जो तुझे पसंद वही शब्द कह पाउँगा
तुम्हे रूठना ही हैं तो मुझे एक बार बोलो तो सही
भड़ास अपने मन की तुम मुझ पर खोलो तो सही
मुझसे तुम बात ना करो तो तुम्हारा क्या जायेगा
पर पहले ही उजड़ी इस दुनिया में सरल मर जायेगा
तुम्हारे उस प्रिय को मैं कहा जानता हूँ
बस तुम्ही से जो सुना वो ही मानता हूँ
मेरे साथ सारे अन्यायों की तुम्हे तो हर बात पता हैं
जिसने सबकी जिंदगी जोड़ी उसका भी भाग्य खफा हैं
ईश्वर के विधान से मैंने कहाँ कुछ पाया हैं
जीना तो दूर रहा मरना भी नहीं हो पाया हैं
तुम्हारे लिए तो मैं पूरी खुली किताब हूँ
तुम्हारी ना पढ़ पाया बस इसीलिए ख़राब हूँ
तुम ही कह दो की मैं नालायक हूँ
दुखो को निभाने में महानायक हूँ
जिंदगी जब मेरी मेरी बनते बनते टूट गयी थी
मंजिल जब हाथ में आते ही किस्मत रूठ गयी थी
उन्ही घडी में तो तुमसे थोडा सहारा माँगा था
तुने भी बस सबकी तरह आवारा माना था
दुःख तुने दिया तभी सहन कर पाया था
एक तू थी सिर्फ जिसे बहन कह पाया था ।
मुझे तो पता नहीं की इसके बाद वो और नाराज़ तो नहीं होगी इस विवाद को सार्वजानिक करने के लिए । अब तो मैं साबित कर ही रहा हूँ कि मुझमे सब ब्लैक होल की तरह समाता नहीं हैं कुछ प्रगट भी तो होता हैं । मैंने ख़ास ध्यान उसी बिन्दु पर दिया जिसको लेकर हमारा झगडा हुआ हैं ।
रविवार, 23 मई 2010
शनिवार, 22 मई 2010
कैरियर उत्थान के लिए दृढ उपवास ( हास्य व्यंग्य )
महीनो से सरल कुमार को थोडा जटिल महंगाई दरो ने मारा हुआ था । अब ऐसे मूर्ख टी वी तो देखते नहीं जहाँ शीला दीक्षित जी के सेन्स ऑफ़ ह्यूमर से संचालित बयानों से महंगाई रोकने की बात साबित होती हैं । सरकार के पूरे आंकड़े इनके पास नहीं होते तो ऐसे आलसी और पलायनवादी लोग अपनी परंपरा का निर्वाह करते हुए अपने " ईश्वरचंद" जी के पास जाते हैं । अब ईश्वर जी के पास तो आर्थिक मंदी के मारे हुए बिजनेसमैन आगे लेन में लगे हैं तो सोचा की शोर्ट कट वे से ही एंट्री मारी जाये । अब भगवान् कैसे गरीब लोगो को फर्स्ट लेन में शरण में ले क्योंकि उनके मंदिरों का खर्चा इस महंगाई में बेचारे गरीब नहीं उठा सकते हैं खैर संगमरमर और ऐ सी का रेट बढ़ गया हैं और भगवान् गर्मी में नहीं मर सकते और गोबर के लीपे फर्शो का अब जमाना नहीं रहा ।
तो सरल और खिज्जू दोनों दोस्तों ने सोचा की व्रत वगैरह के कुछ क्रेश कोर्स ले लिए जाये जिससे शाम को व्रत ख़त्म होते ही अपने व्रत के फलस्वरूप वरदान रुपी लिस्ट पहले ही तैयार करके तकिये के नीचे रख लेंगे जिससे वैसी कुछ भूल ना हो जाये हिरन्यकश्यप के जैसी वरदान मांगने में थी ।
तो दिन शुरू हुआ महान उपवास का जिसमे सुबह साबूदाने की खीर खाने होती हैं । अब क्योंकि व्रत करने वाला कमजोर ना हो जाये या खुश्की ना जो जाये तो दो ग्लास जूस अनार के व्रत के निमित ले लिए जिससे भक्ति में कोई दिक्कत ना हो ।
अब जैसे ही कम्पनी में गए दोनों तो कुछ खाना तो नहीं था क्योंकि ईश्वर प्रेम के इतने भूखे थे की कुछ सुहा ही नहीं रहा था । बस हर बार जो भी कुछ खाने के लिए पूछता था तो स्पष्ट कर देते नहीं भाई आज फलाहार पर हैं या दूध एक दो ग्लास ले सकते हैं । जब दो सेब और आधा दर्जन केले अपने अन्दर के ईश्वर को भेंट में दिए तो मन में भक्ति से आई प्रसन्नता चेहरे की आध्यात्मिक तेजस्विता को और बढ़ा रही थी ।
अब इनके पेट में समाये ईश्वर के आनंद की अनुभूति से जो माहौल बना तो कम्पनी की कुछ सरल हृदय कन्याओ से सहन नहीं हुआ और वो इनकी भक्ति की भूख को शांत करने के लिए "व्रत स्पेशल" के कुछ चिप्स के पैकेट ले आई जो व्रत में आजकल खाए जाते हैं । सरल और खिज्जु को अपने पिछड़े पन पर दुःख हुआ की एक तो व्रत रखा जीवन में और वो भी बिना कायदे कानून के । एक ये लडकिया हैं जो बेचारी व्रत वाले दिन अपने बैग पूरे व्रत वाले खाने से ठूंस ठूंस कर लाती हैं की कही भक्ति में कोई कमी ना रहे व्रत में सिर्फ वही चीज़े प्रचुर मात्र में लायी जो व्रत के लिए बनायीं गयी हैं . तो उन्होंने व्रत के लिए कन्याओ द्वारा लाये गए सारे चिप्स भक्ति भाव से ग्रहण किये । साथ में कोल्ड ड्रिंक मिल जाता तो गर्मी से राहत मिल जाती । अब देखो इसी को तो व्रत कहते हैं जिसमे आपको प्यास सहनी पड़े ।
शाम होते होते व्रत के नाम पर जो भ्रष्टाचार मचाना था उसका अब कलाईमेक्स आना था । रेस्टारेंट की स्पेशल व्रत थाली मंगा ली गयी जिसमे हफ्ते भर का राशन एक बार में आने की सम्भावना थी । हालाँकि वो थाली एक सामान्य व्यक्ति नहीं खा सकता था ईश्वर प्रेम और दृढ भक्ति भाव के चलते दोनों दोस्त व्रत में कोई चूक नहीं होने देना चाहते थे । वो सिर्फ वही खाते जो शास्त्रों में व्रत वाले के लिए विधान में लिखा हैं । आधा एक घंटा थाली को चाट देने वाली हद तक जाकर ही साँस लिया ।
शाम को सोते हुए दूध और बादाम एक सात्विक पेय माना जाता हैं । अब जिनकी रग रग में सत्वगुण हो वो कैसे ना इस अल्पाहार को किसी फलाहार के साथ ना ले । जब बिस्तर पर लेते तो शायद कठिन उपवास के करण थकान भी ज्यादा थी तो जल्दी नीद आ गयी ।
सरल के स्वप्न में भगवान् आये , " बेटा तुम्हारी आज की भक्ति से मैं बहुत प्रसन्न हूँ क्योंकि तुमने कोई भी नियम नहीं तोडा सिर्फ व्रत के लिए निर्धारित वस्तु ही ग्रहण की । पर आगे से ऐसे कड़े उपवास मत करना क्योंकि मुझे आज सिर्फ दो बन्दों के कारण आठ बन्दों के हिस्से का खाना अरेंज करने में बड़ी दिक्कत हुई । पर तुम्हारी भक्ति की भूख के कारण सब सहन करना पड़ा । वरदान यही हैं की जब तक ये धरती हैं तब तक तुम्हे कोई व्रत करने की जरुरत नहीं मैं वैसे ही राज़ी हूँ । जब कोई दिक्कत हो फ़ोन कर देना मैं बिना व्रत के ही तैयार हूँ मदद करने के लिए । तुम्हारे जैसे व्रत अगर आधी दुनिया रखने लग जाए तो बाकि आधी दुनिया को तो वैसे ही खाने की कमी के करण व्रतरखना पड़ेगा , उनके पास व्रत रखने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा या फिर चारा खाकर ही गुज़ारा करना पड़ेगा ।
सरल की नींद खुली तो बदहजमी की वजह से अब ईश्वर प्रशाद के तौर पर इनो लेनी पड़ी । अब ऐसे कठोर व्रत वाले व्यक्ति को इतना तो सहना तो पड़ेगा ही । आपने भी व्रत रखने में ऐसे काफी दुःख सहे होंगे । कृपया साँझा करे .
तो सरल और खिज्जू दोनों दोस्तों ने सोचा की व्रत वगैरह के कुछ क्रेश कोर्स ले लिए जाये जिससे शाम को व्रत ख़त्म होते ही अपने व्रत के फलस्वरूप वरदान रुपी लिस्ट पहले ही तैयार करके तकिये के नीचे रख लेंगे जिससे वैसी कुछ भूल ना हो जाये हिरन्यकश्यप के जैसी वरदान मांगने में थी ।
तो दिन शुरू हुआ महान उपवास का जिसमे सुबह साबूदाने की खीर खाने होती हैं । अब क्योंकि व्रत करने वाला कमजोर ना हो जाये या खुश्की ना जो जाये तो दो ग्लास जूस अनार के व्रत के निमित ले लिए जिससे भक्ति में कोई दिक्कत ना हो ।
अब जैसे ही कम्पनी में गए दोनों तो कुछ खाना तो नहीं था क्योंकि ईश्वर प्रेम के इतने भूखे थे की कुछ सुहा ही नहीं रहा था । बस हर बार जो भी कुछ खाने के लिए पूछता था तो स्पष्ट कर देते नहीं भाई आज फलाहार पर हैं या दूध एक दो ग्लास ले सकते हैं । जब दो सेब और आधा दर्जन केले अपने अन्दर के ईश्वर को भेंट में दिए तो मन में भक्ति से आई प्रसन्नता चेहरे की आध्यात्मिक तेजस्विता को और बढ़ा रही थी ।
अब इनके पेट में समाये ईश्वर के आनंद की अनुभूति से जो माहौल बना तो कम्पनी की कुछ सरल हृदय कन्याओ से सहन नहीं हुआ और वो इनकी भक्ति की भूख को शांत करने के लिए "व्रत स्पेशल" के कुछ चिप्स के पैकेट ले आई जो व्रत में आजकल खाए जाते हैं । सरल और खिज्जु को अपने पिछड़े पन पर दुःख हुआ की एक तो व्रत रखा जीवन में और वो भी बिना कायदे कानून के । एक ये लडकिया हैं जो बेचारी व्रत वाले दिन अपने बैग पूरे व्रत वाले खाने से ठूंस ठूंस कर लाती हैं की कही भक्ति में कोई कमी ना रहे व्रत में सिर्फ वही चीज़े प्रचुर मात्र में लायी जो व्रत के लिए बनायीं गयी हैं . तो उन्होंने व्रत के लिए कन्याओ द्वारा लाये गए सारे चिप्स भक्ति भाव से ग्रहण किये । साथ में कोल्ड ड्रिंक मिल जाता तो गर्मी से राहत मिल जाती । अब देखो इसी को तो व्रत कहते हैं जिसमे आपको प्यास सहनी पड़े ।
शाम होते होते व्रत के नाम पर जो भ्रष्टाचार मचाना था उसका अब कलाईमेक्स आना था । रेस्टारेंट की स्पेशल व्रत थाली मंगा ली गयी जिसमे हफ्ते भर का राशन एक बार में आने की सम्भावना थी । हालाँकि वो थाली एक सामान्य व्यक्ति नहीं खा सकता था ईश्वर प्रेम और दृढ भक्ति भाव के चलते दोनों दोस्त व्रत में कोई चूक नहीं होने देना चाहते थे । वो सिर्फ वही खाते जो शास्त्रों में व्रत वाले के लिए विधान में लिखा हैं । आधा एक घंटा थाली को चाट देने वाली हद तक जाकर ही साँस लिया ।
शाम को सोते हुए दूध और बादाम एक सात्विक पेय माना जाता हैं । अब जिनकी रग रग में सत्वगुण हो वो कैसे ना इस अल्पाहार को किसी फलाहार के साथ ना ले । जब बिस्तर पर लेते तो शायद कठिन उपवास के करण थकान भी ज्यादा थी तो जल्दी नीद आ गयी ।
सरल के स्वप्न में भगवान् आये , " बेटा तुम्हारी आज की भक्ति से मैं बहुत प्रसन्न हूँ क्योंकि तुमने कोई भी नियम नहीं तोडा सिर्फ व्रत के लिए निर्धारित वस्तु ही ग्रहण की । पर आगे से ऐसे कड़े उपवास मत करना क्योंकि मुझे आज सिर्फ दो बन्दों के कारण आठ बन्दों के हिस्से का खाना अरेंज करने में बड़ी दिक्कत हुई । पर तुम्हारी भक्ति की भूख के कारण सब सहन करना पड़ा । वरदान यही हैं की जब तक ये धरती हैं तब तक तुम्हे कोई व्रत करने की जरुरत नहीं मैं वैसे ही राज़ी हूँ । जब कोई दिक्कत हो फ़ोन कर देना मैं बिना व्रत के ही तैयार हूँ मदद करने के लिए । तुम्हारे जैसे व्रत अगर आधी दुनिया रखने लग जाए तो बाकि आधी दुनिया को तो वैसे ही खाने की कमी के करण व्रतरखना पड़ेगा , उनके पास व्रत रखने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा या फिर चारा खाकर ही गुज़ारा करना पड़ेगा ।
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