सोमवार, 23 अगस्त 2010

इश्वर से खुंदक खायी हुई कविता .

मेरे कई ऑनलाइन साधक दोस्त हैं जो इश्वर की चापलूसी में ज्यादा व्यस्त रहते हैं . अब मेरे जैसे घमंडी व्यक्ति से तो कुछ सहन होता नहीं हैं , इसीलिए उनके विरोध में खड़ा हो जाता हु की क्यों ईश्वर की झूठी बड़ाई कर रहे हो भाई . इसी विषय को लेकर एक कविता रच डाली , आशा हैं आपको बिलकुल पसंद नहीं आएगी ( इससे मुझे क्या )


उस ईश्वर से इतना क्यों प्यार हैं
ना जिसे सच्चो की दरकार हैं
वृन्दावन का ग्वाला हमें ना कुछ समझता हैं
तभी तो ऊंची ऊंची धर्म-दुकानों पर सजता हैं
मेरे प्यार पर वो कभी पिघला नहीं
कैसा मानू कि वो छलिया नहीं

आँखे उसके लिए रो रो कर सूज गयी थी
इंतज़ार करते करते जब हिम्मत टूट गयी थी
संसार कि हर ख़ुशी जब रूठ गयी थी
उस ग्वाले के हाथो मेरी किस्मत फूट गयी थी

ना मेरी भावनाओ को वो कभी मान दे पाया
सिर्फ मैंने उससे माँगा था अपना हमसाया
मेरे प्यार को भी उसने कर दिया पराया
दुखती मेरी नस नस में दर्द भर आया

तब क्यों ना ईश्वर को अपने परम होने का ज्ञान हुआ
भोली राधा जी को बस छोड़ देना उसे आसान हुआ
ना उसे कभी हमारे प्यार कि कद्र थी
जलते हमारे सारे दिन और राते सर्द थी

जब भी उस कृष्ण की कोई चापलूसी करने आएगा
सच कहता हु ना मेरे व्यंग्य से बच जायेगा
मेरी हस्ती कुछ नहीं पर उसकी भी तो रहने ना दूंगा
मेरा हक़ तो ना मिल पाया उसके हक़ भी तो ना दूंगा

वो एक भ्रम और दुखियो को भुला बैठा व्यापारी हैं
गरीबो का जल नहीं अमीरों की मदिरा स्वीकारी हैं
अगर प्यारा हैं तो दूर क्यों रहता हैं
जिम्मा उसका हैं फिर मेरा मन क्यों वियोग सहता हैं

कही कभी किसी रोज़ रहा चलता मिल जायेगा
सच कहू तो बिना डांट खाए ना हिल पायेगा
तब मैं इतना रुलाऊंगा कि हाथ जोड़ लेगा
आखिर में अपना मुह मेरी ओर मोड़ देगा .
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!! श्री हरि : !!
बापूजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे

3 टिप्‍पणियां:

दीपक बाबा ने कहा…

मन के उदगार अच्छे व्यक्त किये आपने...

vandana gupta ने कहा…

अरे वाह वाह वाह्……………इतनी डाँट खाने के बाद किसकी हिम्मतघोगी जो मूँह मोडेगा अब तो उसे आना ही पडेगा और वचन भी निभाना पडेगा।
रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ.

SANJEEV RANA ने कहा…

bahut badhiya saral kumar ji
ab fir se aapko follow kar raha hu

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...