गुरुवार, 25 मार्च 2010

हरि चरणों में अंतिम प्रार्थना ( आर्त भक्त )

हे मेरे इष्टदेव ! हे हरि , हे गुरुदेव!

अब इस संसार कि मुझे कोई चाह नहींहर तरफ तो तेरे प्रोफेशनल लोगो कि भीड़ हैं जिसे आपसे प्रेम करने में भी मतलब चाहिएमुझे तो इन्होने मानसिक रोगी ही समझ रखा हैंऔर इनकी इस समझ को प्रभु आपने भी तो इतना सहारा दिया हैंजब भी ये दुनिया मुझे नोच रही होती हैं तो मैं अंदर से रो रहा होता हूँ , उस वक्त प्रभु आप भी उसी भीड़ का एक हिस्सा होते हैं , और छोटे बच्चे बनकर मेरे हालात पर ताली पीट रहे होते हैंमैं क्या करू प्रभु अपने इस एकतरफा प्यार पर

मेरी बेबसी देखिये प्रभु आपके चतुर्भुजी रूप को देखता हूँ चित्र में कि कहीं से आप साकार होकर जायेंगेपर आप तो उन महंगे महंगे मंदिरों में माता लक्ष्मी के साथ संगमरमर के महलो में रह रहें हैंमेरे साथ यहाँ कुछ भिखारी भी हैं जो बस थोडा खाना खाकर सो गए हैं पर आपको सुना हैं कोई छप्पन भोग चखाया जा रहा हैंमैं कैसे मानु कि इतने अमीर बाप का मैं बेटा हूँतुम तो हर पल सत्ताधीशो को सत्ता देने वाले हो मैं तो सवा गज में सिकुड़ा बैठा हूँ
मुझसे अच्छे तो भ्रष्ट और चरित्रहीन लोग ही हैं जो कम से कम तसल्ली से जी तो रहें हैंमेरा इधर तो जीना हराम हैं ही ऊपर से आपके धाम में भी पता नहीं हमसे आई कार्ड माँगा गया तो उस पर आपके हस्ताक्षर नहीं मिलेंगेवो तो आपके इमानदार पार्षद हैं मुझे धक्का देने में पल कि भी देरी ना लगायेंगेआपने पता नहीं अपना ऑफिस कहाँ खोला हैं कि मैं वही भीख मांग लूचाहे आप ना देखे , प्रभु आप चाहे झिड़क देपर उस मुक्ति के एक रुपये के सिक्के पर मेरे जीवन का सार हैं
मैं पहले समाज में धार्मिक माना जाने लगा थाइसीलिए यहाँ कि दुनिया ने मुझसे थोड़े व्यावहारिक काम छीन लिए । आपके धाम में जाने कि अब ओकात रही नहींबस इसी चिंता में रात दिन घुलते घुलते अधमरा सा हो गया हूँ कि बस " बैकुंठ " एम्बुलेंस बस गयी हैं लेने मैं गुरुमंत्र जपने का नाटक करता हूँ और बेहोश हो जाता हूँले जाओ प्रभु मुझे यहाँ से , मुझमे ताकत और बुद्धि नहीं बची हैंयहाँ तो बस सारे दिमाग वाले प्रोफेशनल लोगों का काम हैं मेरे जैसे दिल से सोचने वाला बुद्धिहीन का नहीं

हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् ,
हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् ,

2 टिप्‍पणियां:

kunwarji's ने कहा…

वयंग्य है तो बहुत सच्चा है!

sir जी, ये (आर्त भक्त) से क्या अभिप्राय है!

ankeshkumarverma ने कहा…

दोस्ती गजल है गाने गुनगुनाने के लिए /
दोस्ती नगमा है सुननेसुनाने के लिए //
दोस्ती ओ जज्बा है जो सबको नहीं मिलता /
क्योंकि आप जैसा चाहिए इसे निभाने के लिए //

ankesh kumar verma

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...