हे मेरे इष्टदेव ! हे हरि , हे गुरुदेव!
अब इस संसार कि मुझे कोई चाह नहीं । हर तरफ तो तेरे प्रोफेशनल लोगो कि भीड़ हैं जिसे आपसे प्रेम करने में भी मतलब चाहिए। मुझे तो इन्होने मानसिक रोगी ही समझ रखा हैं । और इनकी इस समझ को प्रभु आपने भी तो इतना सहारा दिया हैं । जब भी ये दुनिया मुझे नोच रही होती हैं तो मैं अंदर से रो रहा होता हूँ , उस वक्त प्रभु आप भी उसी भीड़ का एक हिस्सा होते हैं , और छोटे बच्चे बनकर मेरे हालात पर ताली पीट रहे होते हैं । मैं क्या करू प्रभु अपने इस एकतरफा प्यार पर ।
मेरी बेबसी देखिये प्रभु आपके चतुर्भुजी रूप को देखता हूँ चित्र में कि कहीं से आप साकार होकर आ जायेंगे । पर आप तो उन महंगे महंगे मंदिरों में माता लक्ष्मी के साथ संगमरमर के महलो में रह रहें हैं । मेरे साथ यहाँ कुछ भिखारी भी हैं जो बस थोडा खाना खाकर सो गए हैं पर आपको सुना हैं कोई छप्पन भोग चखाया जा रहा हैं । मैं कैसे मानु कि इतने अमीर बाप का मैं बेटा हूँ । तुम तो हर पल सत्ताधीशो को सत्ता देने वाले हो मैं तो सवा गज में सिकुड़ा बैठा हूँ ।
मुझसे अच्छे तो भ्रष्ट और चरित्रहीन लोग ही हैं जो कम से कम तसल्ली से जी तो रहें हैं । मेरा इधर तो जीना हराम हैं ही ऊपर से आपके धाम में भी पता नहीं हमसे आई कार्ड माँगा गया तो उस पर आपके हस्ताक्षर नहीं मिलेंगे । वो तो आपके इमानदार पार्षद हैं मुझे धक्का देने में पल कि भी देरी ना लगायेंगे। आपने पता नहीं अपना ऑफिस कहाँ खोला हैं कि मैं वही भीख मांग लू । चाहे आप ना देखे , प्रभु आप चाहे झिड़क दे । पर उस मुक्ति के एक रुपये के सिक्के पर मेरे जीवन का सार हैं ।
मैं पहले समाज में धार्मिक माना जाने लगा था । इसीलिए यहाँ कि दुनिया ने मुझसे थोड़े व्यावहारिक काम छीन लिए । आपके धाम में जाने कि अब ओकात रही नहीं । बस इसी चिंता में रात दिन घुलते घुलते अधमरा सा हो गया हूँ कि बस " बैकुंठ " एम्बुलेंस बस आ गयी हैं लेने । मैं गुरुमंत्र जपने का नाटक करता हूँ और बेहोश हो जाता हूँ । ले जाओ प्रभु मुझे यहाँ से , मुझमे ताकत और बुद्धि नहीं बची हैं । यहाँ तो बस सारे दिमाग वाले प्रोफेशनल लोगों का काम हैं मेरे जैसे दिल से सोचने वाला बुद्धिहीन का नहीं ।
हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् ,
हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् , हरि शरणम् ,
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2 टिप्पणियां:
वयंग्य है तो बहुत सच्चा है!
sir जी, ये (आर्त भक्त) से क्या अभिप्राय है!
दोस्ती गजल है गाने गुनगुनाने के लिए /
दोस्ती नगमा है सुननेसुनाने के लिए //
दोस्ती ओ जज्बा है जो सबको नहीं मिलता /
क्योंकि आप जैसा चाहिए इसे निभाने के लिए //
ankesh kumar verma
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