रविवार, 14 मार्च 2010

ब्रज यात्रा -भाग ३ वृन्दावन (मुख्य मंदिर )

वृन्दावन एक नाम हैं जो किसी भी हरिभक्त को सिर्फ एक बार के दर्शन से मोह लेता हैंदुनिया का कोई तीर्थस्थल हो पर जब आप वृन्दावन जाते हो तो बस वहीँ के होकर रह जाते हैंतभी तो वहां की टी शर्ट्स लोकप्रिय रहती हैं जिन पर लिखा होता हैं , I lost my heart in Vrindavan , सबसे पहली बात कि वृन्दावन जाये कैसेइसके लिए वैसे मेरी ब्रज यात्रा की भाग एक और दो पोस्ट भी पढ़ेअगर आपको सिर्फ वृन्दावन जाना हैं तो बस दिल्ली की तरफ से आगरा आते हुए छटीकरा उतारे जो एक common स्थान हैं राधा कुंड, या गिरिराज जी जाने के लिएछटीकरा से आपको auto मिल जायेगा जो चार या पांच रुपये में वृन्दावन में हरिकुंज चौराहे पर छोड़ देगाअब धर्मशाला कहाँ लेनी चाहिए ये बताता हूँ

देखिये अगर आपको सारा वृन्दावन ही घूमना हैं तो हरिकुंज चौराहा जो लगभग वृन्दावन के बीच में पड़ता हैं और यहाँ से सबसे पहला मंदिर पड़ेगा बांके बिहारी जी का मंदिरहरिकुंज में धर्मशाला लेने पर आप रिक्शा के काफी पैसे बचा सकते हैं , और अगर आपको सिर्फ और सिर्फ इस्कोन टेम्पल या साधारण भाषा में अग्रेजों के मंदिर के दर्शन या वृन्दावन की नौ किलोमीटर की परिक्रमा करनी हैं तो हरिकुंज चौराहे से एक किलोमीटर पहले ही बोल दे की आपको इस्कोन टेम्पल उतरना हैंआप वृन्दावन के बड़े से गेट के सामने उतर सकते हैं , ये सब साथ साथ हैं
वहां काफी धर्मशालाएं हैं जो लगभग उचित दर रूम देती हैं
अब बात करते हैंमंदिर के दर्शन की

एक - बांके बिहारी मंदिर :
वृन्दावन का यही सबसे प्रमुख मंदिर हैंआप वृन्दावन आते हैं तो सिर्फ इसी मंदिर के लिए और कृष्ण जी को चार सौ साल पहले ठाकुर हरिदास जी ने यहाँ प्रगट किया थामंदिर में बहुत तंग गलियों से होकर पहुंचना पडता हैंहरिकुंज चौराहे से आप पैदल दस मिनट में पहुँच सकते हैंमंदिर में भगवान् कृष्ण की सांवली मूर्ति हैं जो लगभग हर पांच मिनट बाद परदे बदलती रहती हैंत्योहारों के दिन अगर आपको एक मिनट के दर्शन हो जाए तो आप वाकई भाग्यशाली हैंमैं एक बार इतनी भीड़ में सिर्फ दस सेकंड ही दर्शन कर पाया था

दो -सेवाकुंज ,मीरा जी मंदिर , शाहजी मंदिर, निधिवन -
बांके बिहारी मंदिर के सबसे पास पड़ता हैं सेवा कुञ्जयह श्रधा और विश्वास हैं की कृष्ण भगवान् और श्री राधाजी यहाँ हर रात को रास के लिए आते हैंयहाँ अगर रात को कोई जीवित व्यक्ति या प्राणी गलती से रहा जाए या तो उसकी मृत्यु हो जायेगी या गूंगा बहरा जो जायेगायहाँ छोटी छोटी झाडिया हैं और इतने बन्दर कि आपको डर लगे पर वे कहते कुछ नहीं हैंअंदर एक छोटा मंदिर हैंललिता सखी के आग्रह पर बनाया गया भगवान् कृष्ण द्वारा बनाया गया ललिता कुंड भी हैंपर यहाँ आपको बहुत सन्नाटा लगेगासब बिलकुल शांत
यहाँ से बिलकुल निकलते ही दो गली छोड़ कर मीरा बाई का मंदिर हैं जहाँ मीरा जी कभी रहती थीमंदिर एकदम शांत हैंआपको बिलकुल सब मौन लगेगासेवाकुंज से निकलते ही किसी से पता पूछ ले क्योंकि गलिया थोड़ी जटिल हैं और आपसे ये मंदिर छूट भी सकता हैंमीरा जी के मंदिर से थोडा आगे शाह जी का बड़ा मंदिर हैं और इसके बिलकुल सामने ही निधिवन कि गली हैंनिधिवन और सेवाकुंज लगभग एक जैसे हैं पर निधिवन में आपको इतना सनाटा नहीं मिलेगायहाँ लगभग हर तरह से अच्छा लगने वाला माहौल हैंबन्दर भी नहीं हैं और रस्ते में जगह जगह छोटे छोटे चार पांच मंदिर आपके आपको उत्साहित करते रहेंगेयहाँ का शाम का कीर्तन बहुत दिव्य हैं , जरुर भाग ले

तीन -यमुना जी और केशी घाट
यहाँ निधिवन से पैदल यमुना नदी के दर्शन करें और वही केशी घाट भी हैं जहाँ भगवान् कृष्ण ने केशी राक्षस को मारा थाशाम को यहाँ जमुना जी कि आरती होती हैंवैसे वहां नाव का भी प्रबंध हैं

चार - रंगनाथ मंदिर , श्री दाऊ जी मंदिर , गोदाविहार मंदिर , गोविन्द नामदेव, मीरा भजनाश्रम, लालाबाबू मंदिर , गोपेश्वर महादेव मंदिर
ये सभी मंदिर वृन्दावन के आखिरी छोर पर पड़ते हैंअगर आप निधिवन में हैं तो वहा से पैदल रंगनाथ जी मंदिर में जा सकते हैंपन्द्रह मिनट का रास्ता हैं
रंगनाथ मंदिर में अगर आप पहली बार जा रहें हैं तो गाइड ले क्योंकि ये इतना बड़ा और जानकारियों से भरा मंदिर हैं कि आप चौंक जाएँगेबड़े बड़े गेट और मंदिर का क्षेत्र पूरे वृन्दावन में इस मंदिर के जितना किसी का नहीं हैंइस मंदिर में एक सो आठ पुजारी हैंआधे सुबह और आधे शाम को आरती में सहाय होते हैंमंदिर में लगा शुद्ध सोने का पांच सो किलोग्राम का खम्भा आप को चौंका सकता हैं । अन्दर एक कमरा हैं जिसमे इस मंदिर के निर्माता लक्ष्मीदास द्वारा दिए गए उपहारों कायहाँ एक से एक कीमती उपहार हैं जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकतेअन्दर एक शीशमहल मंदिर हैं जो पूरा कांच का बना हुआ हैंअन्दर और साइड में भगवान् के विविध रूपों के कई मंदिर हैंवैसे इसे घूमने में एक घंटा लग जाता हैं

इसके बाद मंदिर के बायीं तरफ गोविन्द नामदेव मंदिर हैं जो राजा मानसिंह ने अकबर के समय बनवाया थापर बाद में ओरंगजेब ने इर्ष्या वश मंदिर की चार मंजिले तुडवा दीअब भी मूल मंदिर की तीन मंजिलें बची हैंयह बहुत विहंगम मंदिर जो आप एक बार देखना पसंद करेंगे

रंगनाथ जी मंदिर के दाहिने तरफ चलने पर ब्रह्मसरोवर हैं जो काफी सुखद दर्शन का आभास देता हैंइसके लगभग साथ ही लालाबाबू द्वारा बनवाया गया मंदिर हैंइस मंदिर की निर्माण कहानी इसकी दीवारों पर लिखी हैंमैंने अपने गुरु बापूजी से इसके निर्माण की कहानी सत्संग में सुनी थीइस मंदिर के दर्शन से पहले आप चाहे तो रंगनाथ जी मंदिर के सामने बलराम जी के दाऊ मन्दिर और मीरा जी भजन के स्थान भजनाश्रम के भी दर्शन कर सकते हैंयहाँ विधवा ओरते सतत कीर्तन करती हैं

लालाबाबू मन्दिर के बाद आप गोदाविहार मंदिर में जा सकते हैं जो तीन चार घर छोड़ कर ही हैंयह मंदिर सबसे अलग हैंशायद ही कोई देवी देवता हो जिसकी मूर्ति इसमें ना होआप एक बार इस मंदिर में जरुर जायेमैंने पुरानो में कथा सत्संगो में जितने देवी देवताओं के बारे में सुना हैं वे सब इसमें हैं और महापुरुषों यहाँ तक कि देशभक्तों के स्मारक भी यहाँ बनाये गए हैंकेंद्र में भगवान् श्री हरि और माता लक्ष्मी की बड़ी मूर्ति हैं और हनुमानजी और गरुड़ जी इनके द्वारपाल हैंमंदिर रंगनाथ जितना बड़ा तो नहीं हैं पर आप लगभग उतना ही समय लगा सकते हैं जितना आपने रंगनाथ मंदिर में लगाया हो

इस मन्दिर से थोड़ी दूर हैं गोपेश्वर महादेव का प्रसिद्ध मंदिर , यहाँ भगवान् शिव ने भगवान् श्री कृष्ण की रासलीला में शामिल होने के लिए गोपी रूप धारण किया थाइस मंदिर के बाद आप अपनी यात्रा को इस क्षेत्र से लगभग विराम दे सकते हैं

पांच - इस्कोन टेम्पल (अंग्रेजों का मंदिर ) या कृष्ण बलराम मंदिर
बांके बिहारी मंदिर के बाद अगर कोई मंदिर सबसे प्रसिद्ध हैं तो वो शायद इस्कोन टेम्पल ही हैंमंदिर में महामंत्र
हरे कृष्ण ...हरे हरे की गूंज आपको अन्दर तक भक्तिमय कर देगीआप कैसे भी व्यक्ति हो अगर आप एक बार यहाँ आये हैं तो शायद ही ऐसा हो की वृन्दावन आप आये और यहाँ ना येमंदिर के प्रवेश द्वार के पास बना श्रील प्रभुपाद का मंदिर बड़ा ही दर्शनीय हैंफिर मुख्य मंदिर हैं जिसमे राधा कृष्ण , कृष्ण बलराम और गौर निताई की अलौकिक मूर्तियाँ हैंबस जब आप यहाँ बैठेंगे तो सहज ही आपका मन कहेगा की इन अंग्रेजो को यहाँ क्या मिलता हैं जो सारी सुख सुविधा छोड़कर जो इस छोटे से गाँव में आकर बस गए हैंशाम का पांच से आठ बजे तक का कीर्तन जिसने भी सुना होगा वो अवश्य ही दीवाना हो गया होगा .
मंदिर में पीछे ही धर्मशाला और भोजनालय हैंदोनों ही बहुत साफ़ सुथरे हैंअगर आपको सिर्फ इसी एक दो और मंदिर के दर्शन करने हो इस्कोन मंदिर में ही रुकना चाहिए नहीं तो फिर हरिकुंज चौराहे पर धरमशाला ढूंढ सकते हैं

वैसे कई और भी मंदिर हैं जैसे पागल बाबा का मंदिर , सुदामा जी की कुटिया, स्नेह्बिहारी मंदिरपर मैंने सिर्फ पहली पोस्ट होने के कारन थोड़ी थोड़ी सामग्री डाली हैंअगर श्री राधा जी की दया रही तो और भी वृन्दावन के बारे में जानकारी दूंगावैसे वृन्दावन में इतने मन्दिर हैं कि सारी जिंदगी बीत जाएगी दर्शन करते करतेअभी के लिए इतना ही , अगली पोस्ट में मथुरा जन्मभूमि के लिए समर्पण होगा .

सोमवार, 8 मार्च 2010

कुछ शेरो शायरी

ये एक मेल में दोस्त ने भेजी थी , सोचा था आप के साथ शेयर करूँ ।

चेहरे कि हसी से हर गम छुपाओ,
बहुत कुछ बोलो पर कुछ ना बताओ...
खुद ना रूठो कभी, पर सबको मनाओ
ये राज़ हैं ज़िन्दगी का, बस जीते चले जाओ

वाह प्रभु क्या तेरी लीला हैं :
चूहा बिल्ली से डरता हैं,
बिल्ली कुत्ते से डरती हैं,
कुत्ता आदमी से डरता हैं,
आदमी बीवी से डरता हैं,
बीवी चूहे से डरती हैं.



कौन किसको दिल में जगह देता हैं
पेड़ भी सूखे पत्ते गिरा देता हैं
वाकिफ हैं हम दुनिया के रिवाजों से
दिल भर जाये तो हर कोई भुला देता हैं


आखिर में उन दोस्तों के लिए जिनको मैं मेल वेल या अच्छी बातें भेजता रहता हूँ
एक दोस्त ने मुझ से पूछा ,
तुम सबको ईमेल / मेसेज भेजते हो - तुम्हे क्या मिलता हैं ?
मैंने हस कर कहा, देना लेना तो व्यापार हैं,
जो देकर कुछ ना मांगे, वो ही तो प्यार हैं।

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...