जया भादुड़ी पर फिल्माया ये गीत दर्द के नगमो में से एक हैं । ये गीत उनके लिए जिन्हें जिंदगी में अधूरे विकल्प से ही जीवन बिताना होता हैं । 1974 में बनी इस "कोरा कागज़ " फिल्म के शीर्षक गीत को आवाज़ दी हैं किशोर कुमार ने । इस फिल्म की कहानी ये हैं की एक घमंडी और अमीर माँ की बेटी जया अपने अहम के कारन अपने संवेदनशील प्रोफेसर पति विजय आनंद से अलग हो जाती हैं । दस पन्द्रह साल अलग रहने के बाद जया भ्दुदी की मनोदशा व्यक्त करती ये पंक्तिया हैं
मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया
जो लिखा था आसुओं के संग बह गया
एक हवा का झोंका आया टूटा डाली से फूल
ना पवन की ना चमन की किसी की हैं ये फूल
खो गयी खुशबू हवा में कुछ न रह गया ,मेरा जीवन .........
उड़ते पंछी का ठिकाना मेरा ना कोई जहाँ
ना डगर हैं ना खबर हैं जाना हैं मुझको कहाँ
बन के सपना हमसफर का साथ रह गयामेरा जीवन .......
मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010
शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010
दैनिक कड़ियाँ भाग दो
बचपन से लेकर आज तक कई बयान या खबरे हमें बहुत ही बोर करती हैं ।हमें पता नहीं इनकी आदत सी हो जातीहैं । पर सच में ये हमारे देश का दुर्भाग्य हैं की हमें ये सब झेलना पड़ता हैं
जैसे
कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं ।
हालाँकि सेना हटाकार देखें कितना कश्मीर हमारा हैं । और जो सेना के अधिकार क्षेत्र में हैं वह भी चालीस प्रतिशत से ज्यादा नहीं हैं ।
पाकिस्तान से विदेश सचिव स्तरीय वार्ता शुरू
पता नहीं साथ सत्तर साल से किसको बेवक़ूफ़ बनाया जा रहा हैं
पाकिस्तान को मुह तोड़ जवाब देंगे ।
फिर दे क्यों नहीं रहे हो
भारतीय टीम के प्रदर्शन ने देश को निराश किया ।
क्या सिर्फ ग्यारह लोग जो एक तरह से बिज़नस मैन ही हैं या चलती फिरती कम्पनी हैं । वाकई हमारे सुख दुःख में जिम्मेदार हैं । ऐसी मूर्खता हमारे देश में ही होती हैं । हम सब जानते हैं कि क्रिकेट पेशेवर खेल हैं , क्रिकेट बोर्ड का सरकार से कोई सम्बन्ध नहीं हैं फिर उनकी हार से देश को क्या घाटा हैं । जीत गए तो ठीक पर हार गए मुह छोटा करने कि क्या जरुरत हैं । ओलम्पिक खेल लगभग सीधे देश की सरकार या प्रतिष्ठा से जुड़े हैं क्योंकि इसमें देश के लोगों से प्राप्त income tax से ही सरकार ग्रांट देती हैं । क्रिकेट तो एक पैसा भी सरकार से नहीं लेता हैं । यह तो लगभग एक कम्पनी की तरह काम करता हैं ।
सरकार महंगाई पर काबू पा लेगी ।
पूरे पचास साल में जितना बेहूदापन इस बयान को लेकर हुआ हैं वो अपने आप में रिकॉर्ड हैं । सबसे ज्यादा गैर जिम्मेदार बयान इसी मुद्दे को लेकर होते हैं । सरकार पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाने के लिए बहाने बनाती हैं की कच्चे तेल की कीमत बढ़ गयी , कच्चे तेल की कीमत अगर पांच प्रतिशत बढती हैं तो सरकार पांच रुपये बढ़ा देगी लेकिन अभी एक साल पहले आर्थिक मंदी के वजह से कच्चे तेल की कीमत पचास प्रतिशत गिरी तो सरकार ने बस पांच रुपये ही घटाए । और एक महत्वपूर्ण बात यह हैं की जब तेल की कीमत बढती हैं तो सब चीज़ों के कीमत बढती हैं क्योंकि सारा सामान वाहनों से ही लाया जाता हैं । लेकिन जब तेल की कीमत घटती हैं तो भी दूसरी चीज़ों की कीमत घटती नहीं हैं क्योंकि इस पर नियंत्रण का काम सरकार का हैं और वो कभी भी इस पर नियंत्रण नहीं करती हैं , बस एक तरफ़ा तेल कम्पनिओं को फायदे के हित के लिए नीतियां अपनाती हैं .
जैसे
कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं ।
हालाँकि सेना हटाकार देखें कितना कश्मीर हमारा हैं । और जो सेना के अधिकार क्षेत्र में हैं वह भी चालीस प्रतिशत से ज्यादा नहीं हैं ।
पाकिस्तान से विदेश सचिव स्तरीय वार्ता शुरू
पता नहीं साथ सत्तर साल से किसको बेवक़ूफ़ बनाया जा रहा हैं
पाकिस्तान को मुह तोड़ जवाब देंगे ।
फिर दे क्यों नहीं रहे हो
भारतीय टीम के प्रदर्शन ने देश को निराश किया ।
क्या सिर्फ ग्यारह लोग जो एक तरह से बिज़नस मैन ही हैं या चलती फिरती कम्पनी हैं । वाकई हमारे सुख दुःख में जिम्मेदार हैं । ऐसी मूर्खता हमारे देश में ही होती हैं । हम सब जानते हैं कि क्रिकेट पेशेवर खेल हैं , क्रिकेट बोर्ड का सरकार से कोई सम्बन्ध नहीं हैं फिर उनकी हार से देश को क्या घाटा हैं । जीत गए तो ठीक पर हार गए मुह छोटा करने कि क्या जरुरत हैं । ओलम्पिक खेल लगभग सीधे देश की सरकार या प्रतिष्ठा से जुड़े हैं क्योंकि इसमें देश के लोगों से प्राप्त income tax से ही सरकार ग्रांट देती हैं । क्रिकेट तो एक पैसा भी सरकार से नहीं लेता हैं । यह तो लगभग एक कम्पनी की तरह काम करता हैं ।
सरकार महंगाई पर काबू पा लेगी ।
पूरे पचास साल में जितना बेहूदापन इस बयान को लेकर हुआ हैं वो अपने आप में रिकॉर्ड हैं । सबसे ज्यादा गैर जिम्मेदार बयान इसी मुद्दे को लेकर होते हैं । सरकार पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाने के लिए बहाने बनाती हैं की कच्चे तेल की कीमत बढ़ गयी , कच्चे तेल की कीमत अगर पांच प्रतिशत बढती हैं तो सरकार पांच रुपये बढ़ा देगी लेकिन अभी एक साल पहले आर्थिक मंदी के वजह से कच्चे तेल की कीमत पचास प्रतिशत गिरी तो सरकार ने बस पांच रुपये ही घटाए । और एक महत्वपूर्ण बात यह हैं की जब तेल की कीमत बढती हैं तो सब चीज़ों के कीमत बढती हैं क्योंकि सारा सामान वाहनों से ही लाया जाता हैं । लेकिन जब तेल की कीमत घटती हैं तो भी दूसरी चीज़ों की कीमत घटती नहीं हैं क्योंकि इस पर नियंत्रण का काम सरकार का हैं और वो कभी भी इस पर नियंत्रण नहीं करती हैं , बस एक तरफ़ा तेल कम्पनिओं को फायदे के हित के लिए नीतियां अपनाती हैं .
बृज यात्रा भाग दो - राधा कुंड
पिछली पोस्ट में मैंने बताया था कि ब्रज में सर्वोपरि स्थान राधाकुंड का हैं । आपको दिल्ली कि तरफ से अगर प्रवेश करना हो तो फरीदाबाद कि तरफ से नेशनल हाईवे नम्बर दो या जी टी रोड पर मथुरा या आगरा कि कोई भी बस आपको छटीकरा उतार देगी । छटीकरा से आप वृन्दावन ( छः किलोमीटर ) या राधाकुंड ( पन्द्रह किलोमीटर ) या गिरिराज जी ( बीस किलोमीटर )जा सकते हैं । मथुरा के लिए यहाँ उतरने कि जरुरत नहीं हैं क्योंकि वो इसी हाइवे वाले रोड पर और आठ किलोमीटर आगे हैं।
राधा कुंड के लिए छटीकरा के लिए ऑटो वगैरह चलते हैं । जो आपको आधे घंटे में राधा कुंड पर पहुंचा देंगे । वहां राधा कुंड , कृष्ण कुंड और ललिता कुंड तीनो एक साथ मिलेंगे । आपको राधाकुंड और कृष्ण कुंड के बीच में मंदिर भी मिलेगा । तीनो कुंदो कि परिक्रमा सिर्फ एक किलोमीटर की हैं । साथ में ही एक इस्कोन का मंदिर भी हैं । परिक्रमा पथ पर भी चार पांच महत्वपूर्ण मंदिर हैं ।

वैसे
राधा कुंड क्यों बना या क्यूँ सबसे पावन हैं इसके पीछे जो रहस्य मैंने सुना हैं की भगवान् कृष्ण ने जब एक राक्षस अरिष्टनेमि ( बैल के वेश में राक्षस ) का वध किया तो राधा जी ने कृष्ण पर गो हत्या के पाप को नष्ट करने को प्रोत्साहित किया । कृष्ण जी ने समस्त तीर्थो का आह्वान किया , सभी तीर्थ आ गए पर तीर्थराज पुष्कर नहीं आये । हालंकि वो अलग कहानी हैं , इसे अभी चर्चा में नहीं लेते हैं ।
तो समस्त तीर्थों के जल में स्नान करने के बाद भी कृष्ण जी का पाप नष्ट नहीं हुआ । कृष्ण ने जहाँ समस्त तीर्थों को आह्वान किया था वह स्थान कृष्ण कुंड बना ।
फिर राधा जी ने अपने पैर के अंगूठे से जमीन में गड्ढा किया , तीर्थों का जल उस में भी आ गया । फिर भगवान् कृष्ण ने इस कुंड में स्नान किया और निवृति पायी । तब से यही प्रसिद्द हैं की राधा कुंड सबसे पवित्र हैं और इसमें स्नान करने से अनायास ही भक्ति प्राप्त होती हैं ।
राधा कुंड के लिए छटीकरा के लिए ऑटो वगैरह चलते हैं । जो आपको आधे घंटे में राधा कुंड पर पहुंचा देंगे । वहां राधा कुंड , कृष्ण कुंड और ललिता कुंड तीनो एक साथ मिलेंगे । आपको राधाकुंड और कृष्ण कुंड के बीच में मंदिर भी मिलेगा । तीनो कुंदो कि परिक्रमा सिर्फ एक किलोमीटर की हैं । साथ में ही एक इस्कोन का मंदिर भी हैं । परिक्रमा पथ पर भी चार पांच महत्वपूर्ण मंदिर हैं ।

वैसे
राधा कुंड क्यों बना या क्यूँ सबसे पावन हैं इसके पीछे जो रहस्य मैंने सुना हैं की भगवान् कृष्ण ने जब एक राक्षस अरिष्टनेमि ( बैल के वेश में राक्षस ) का वध किया तो राधा जी ने कृष्ण पर गो हत्या के पाप को नष्ट करने को प्रोत्साहित किया । कृष्ण जी ने समस्त तीर्थो का आह्वान किया , सभी तीर्थ आ गए पर तीर्थराज पुष्कर नहीं आये । हालंकि वो अलग कहानी हैं , इसे अभी चर्चा में नहीं लेते हैं ।
तो समस्त तीर्थों के जल में स्नान करने के बाद भी कृष्ण जी का पाप नष्ट नहीं हुआ । कृष्ण ने जहाँ समस्त तीर्थों को आह्वान किया था वह स्थान कृष्ण कुंड बना ।
फिर राधा जी ने अपने पैर के अंगूठे से जमीन में गड्ढा किया , तीर्थों का जल उस में भी आ गया । फिर भगवान् कृष्ण ने इस कुंड में स्नान किया और निवृति पायी । तब से यही प्रसिद्द हैं की राधा कुंड सबसे पवित्र हैं और इसमें स्नान करने से अनायास ही भक्ति प्राप्त होती हैं ।
ईश्वर से प्रार्थना
हे हरि !!!!
मुझे लगता था कि आप मेरी प्रार्थना से शायद प्रसन्न हो जाएँगे और मेरे पाप क्षमा करके मुझे दर्शन देंगे । परन्तु अब इतने सालो के बाद अब मेरा हौंसला बिलकुल टूट गया हैं और मैं ये कहने को विवश हुआ हूँ कि
" शायद मेरे पाप ज्यादा थे , मेरी अपेक्षा से ज्यादा मैंने पाप किये होंगे या फिर मेरी प्रार्थनाओ में दम नहीं होगा ,नहीं तो आप तो कभी भी अन्याय नहीं करते । मैं बेवक़ूफ़ पता नहीं क्यूँ सोचता था कि शायद आप मेरी इस बात पर या मेरे इस काम पर प्रसन्न होंगे और आखिरकार बेपर्दा होकर मेरे सामने कहीं से जैसे बादलों में से या कही धुंध से या एक अँधेरे से प्रगट होकर कह देंगे कि बस भाई आज मैं बहुत प्रसन्न हूँ ।

मुझे अब आपके दर्शन का भरोसा टूट चूका हैं । कोई प्रवचन या भक्ति कि कोई विधा अब मुझे उठाने में सही नहीं होगी क्योंकि अब मुझमे आपके लिए वो प्यार रहा नहीं । दुःख इस बात का हैं कि जो समय मैंने आपके बारे में सोचने में बिताया वो समय अगर सदुपयोग करता तो शायद कैरियर में काफी तरक्की होती । आपके डर से मैं दुनिया के भोगो का आनंद तो ना ले सका पर क्षणिक और कमजोर वैराग्य के कारन मैं ना तो धर्म ही निभा सका और अधार्मिक लोगों ने मुझे कभी अपना माना नहीं ।
प्रभु मैंने कोई प्रसिद्धि नहीं चाही थी । बस मुझे शांति मिल जाती । मैंने कोई बड़े वैभव के लिए आपकी शरण ली थी ऐसा नहीं हैं । बस इतना सोचा था कि शायद जब संत बोलते हैं कि आप दयालु हैं और सब कुछ दे देते हैं तो मन ने एक कल्पना रची कि दुखी संसार में जब मेरे पास कोई वजह नहीं हैं जीने कि , तो शायद आप संकल्प मात्र से मुझे अपनी शरण में ले ले । गीता , रामायण और कई ग्रन्थ पढ़े जिससे कि आपमें रूचि हो । आप कि प्रशंसा से भरे सारे ग्रन्थ मुझे हौसला तो दे सके पर यथार्थ में आपके दर्शन करा सके ।
मैं क्या करूँ प्रभु अगर मैं आपको पाने के योग्य नहीं हूँ । पर आपकी वजह से अब मैं ना तो संसार में कोई ज्यादा सफल व्यक्ति हूँ और मेरी धार्मिक यात्रा भी अब मेरी हिम्मत टूटने कि वजह से खत्म हो गयी हैं । मैं बस यही कहना चाहता हूँ कि हे हरि , सबके पास आपको पाने कि ताकत नहीं । कोई और आगे साधक मिले तो उस पर दया कर देना ।
बस इतना ही कह सकता हूँ आपके लिए ( हालाँकि मैं गलत भी हो सकता हूँ )
" हम को खबर भी होने नहीं दी किस मोड़ पर ला के दिल तुने तोडा
अपना बनाना रहा दूर तुने ओरों के हो जाए ऐसा ना छोड़ा
तेरी जफा का चर्चा ही कैसा अपनी वफ़ा पे मैं शर्मा रहा हूँ
.जो प्यार तुने मुझको दिया था वो प्यार तेरा मैं लौटा रहा हूँ
अब कोई तुझको शिकवा ना होगा तेरी जिंदगी से चला जा रहा हूँ "
अगर आपको हम पसंद नहीं थे तो फिर क्यों हमें जन्म दिया । हम तो समर्थ नहीं थे पर आप तो आकर समझा सकते थे । खैरइलाही अजब हैं ये तेरी खुदाई
कि दोनों जहाँ पर हुकूमत हैं तेरी
अँधेरे उजाले में हर जिंदगी हैं
कि कई मुश्किलों में ये जन्नत हैं तेरी
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सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...
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सुबह सुबह लोग भक्ति के संगीत में डूबने का नाटक करते हुए उस भगवान् को बेवक़ूफ़ बनाते हैं जो हम सबसे ज्यादा चालाक हैं और...
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सबसे पहले तो आप का धन्यवाद जो आपने अपना कीमती समय ख़राब करने की ठान ही ली हैं । दूसरा सरल कुमार जी बेचारे महत्वाकांक...