मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010

मेरा जीवन कोरा कागज़

जया भादुड़ी पर फिल्माया ये गीत दर्द के नगमो में से एक हैंये गीत उनके लिए जिन्हें जिंदगी में अधूरे विकल्प से ही जीवन बिताना होता हैं । 1974 में बनी इस "कोरा कागज़ " फिल्म के शीर्षक गीत को आवाज़ दी हैं किशोर कुमार नेइस फिल्म की कहानी ये हैं की एक घमंडी और अमीर माँ की बेटी जया अपने अहम के कारन अपने संवेदनशील प्रोफेसर पति विजय आनंद से अलग हो जाती हैं दस पन्द्रह साल अलग रहने के बाद जया भ्दुदी की मनोदशा व्यक्त करती ये पंक्तिया हैं


मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया
जो लिखा था आसुओं के संग बह गया

एक हवा का झोंका आया टूटा डाली से फूल
ना पवन की ना चमन की किसी की हैं ये फूल
खो गयी खुशबू हवा में कुछ रह गया ,मेरा जीवन .........

उड़ते पंछी का ठिकाना मेरा ना कोई जहाँ
ना डगर हैं ना खबर हैं जाना हैं मुझको कहाँ
बन के सपना हमसफर का साथ रह गयामेरा जीवन .......

1 टिप्पणी:

Kaviraaj ने कहा…

बहुत अच्छा ।

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सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...