बुधवार, 14 जुलाई 2010

लड़की तो हमेशा मुक्त ही जन्मती हैं- मेरी कविता एक अलग सन्दर्भ

पहली बार शायद इस तरह के विषय पर कविता लिख पाया । ईश्वर कि कृपा हैं अगर आपको अच्छी लगे तो ।

लड़की तो हमेशा मुक्त ही जन्मती हैं
पूर्ण ब्रह्म में ही सदा उसकी चेतना रमती हैं

तभी शास्त्रों ने कहा होगा की वो पूजा ना करे
ईश्वर उसका अर्धांग और वो पति दूजा ना करे
ना जरुरत उसे व्रत उपवास और सन्यास की
बड़ी बड़ी बातो या ज्ञान के विन्यास की

बांटे सदा प्रेम और सौहार्द के भाव को
भूल जाये अपने अध्यात्म के चाव को
बस सरलता से बहने दे जीवन की नाव को
बस ना भूले अपने लज्जा के गाँव को

इसी परंपरा में तो गोपिओ का जन्म हुआ था
नतमस्तक जिनके आगे देवो का भी अहम् हुआ था
खुद शिव जी को भी गोपी बन रास में आना पड़ा
बस ब्रज कण बनने को ब्रह्मा जी को जाना पड़ा

माँ बहन बेटी बनकर भी वो तो सब बन्धनों से पार हैं
ऐसी निष्काम सेवा करने में तो पुरुष भी लाचार हैं
उसकी विनम्रता में ही
उसका तेज समाया हैं
खुद श्री हरि ने माया से स्त्री को बनाया हैं

virender.zte@gmail.com
!! श्री हरि : !!

2 टिप्‍पणियां:

vandana gupta ने कहा…

वाह वाह वाह्…………………बहुत सुन्दर भाव भरे हैं।

Amita Neerav ने कहा…

वीरेंद्र जी बख़्शे हमें इस तरह की महानता से... हम भी आपकी ही तरह हैं, हमें भी इंसान की तरह ही जीने दें।

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...