राधा कुंड के लिए छटीकरा के लिए ऑटो वगैरह चलते हैं । जो आपको आधे घंटे में राधा कुंड पर पहुंचा देंगे । वहां राधा कुंड , कृष्ण कुंड और ललिता कुंड तीनो एक साथ मिलेंगे । आपको राधाकुंड और कृष्ण कुंड के बीच में मंदिर भी मिलेगा । तीनो कुंदो कि परिक्रमा सिर्फ एक किलोमीटर की हैं । साथ में ही एक इस्कोन का मंदिर भी हैं । परिक्रमा पथ पर भी चार पांच महत्वपूर्ण मंदिर हैं ।

वैसे
राधा कुंड क्यों बना या क्यूँ सबसे पावन हैं इसके पीछे जो रहस्य मैंने सुना हैं की भगवान् कृष्ण ने जब एक राक्षस अरिष्टनेमि ( बैल के वेश में राक्षस ) का वध किया तो राधा जी ने कृष्ण पर गो हत्या के पाप को नष्ट करने को प्रोत्साहित किया । कृष्ण जी ने समस्त तीर्थो का आह्वान किया , सभी तीर्थ आ गए पर तीर्थराज पुष्कर नहीं आये । हालंकि वो अलग कहानी हैं , इसे अभी चर्चा में नहीं लेते हैं ।
तो समस्त तीर्थों के जल में स्नान करने के बाद भी कृष्ण जी का पाप नष्ट नहीं हुआ । कृष्ण ने जहाँ समस्त तीर्थों को आह्वान किया था वह स्थान कृष्ण कुंड बना ।
फिर राधा जी ने अपने पैर के अंगूठे से जमीन में गड्ढा किया , तीर्थों का जल उस में भी आ गया । फिर भगवान् कृष्ण ने इस कुंड में स्नान किया और निवृति पायी । तब से यही प्रसिद्द हैं की राधा कुंड सबसे पवित्र हैं और इसमें स्नान करने से अनायास ही भक्ति प्राप्त होती हैं ।



