मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

ब्रज यात्रा भाग एक - ब्रज परिचय संक्षेप

ब्रज चौरासी सदा से ही प्रेमाभक्ति के साधकों के लिए आदर्श रहा हैं । ब्रज चौरासी कोस में फैला हुआ हैं । चौरासी कोस यानि लगभग दो सौ किलोमीटर का परिमाप (circumference) हैं ब्रज का ।

ब्रज के चार प्रमुख स्थान हैं :-

मथुरा ,वृन्दावन , राधा कुंड और गिरिराज जी । इन्ही के इर्द गिर्द सारे ब्रज के धाम, मंदिर, आश्रम आदि हैं ।

इस पोस्ट के कई भाग होंगे क्योंकि आपको पता हैं की ब्रज के बारे में तो इतनी सामग्री हैं कि शायद एक पूरी जिंदगी बीत जायेगी । इसका एक पहलू ये भी देखिये जिससे कि आपको लगेगा कि मैं सच बोल रहा हूँ ।

अकेले वृन्दावन धाम में ही पांच हज़ार से ज्यादा मंदिर माने जाते हैं । हर पोस्ट में मैं तीन चार धार्मिक स्थलों के बारे में लिखता रहूँगा जिससे आपको सही और विस्तृत जानकारी मिलती रहे । कही कोई सुधार कि गुंजाईश हो तो कृपया मुझे मेल करना ।

वैसे इश्वर के सभी धाम समान होते हैं पर कबीर जी का ये दोहा साक्ष्य मानकर ब्रज को सर्वोपरि माना जाता हैं

" सब घाट मेरा सईंया खाली घट ना कोई

बलिहारी वो घट कि जा घट प्रगट होई "


और एक श्रीकृष्ण भक्त के श्रीमुख से सुना था कि धार्मिक पुण्यता के क्रम से सर्वोपरि स्थान ब्रज का हैं , ब्रज कि मथुरा सब अन्य गैर ब्रज धार्मिक स्थलों से पुण्यदायी हैं । मथुरा से भी ज्यादा पुण्य दाई भूमि भगवान् कृष्ण कि लीलास्थली वृन्दावन हैं और वृन्दावन से भी श्रेष्ठ श्री गिरिराज जी महाराज हैं । और इन सबमे सर्व पुण्यदायक ब्रज का सिरमौर श्री राधाकुंड हैं । अर्थात दुनिया का सबसे अधिक महत्त्व का कोई तीर्थ या धाम हैं तो वो राधा कुंड हैं । खैर अभी पहली पोस्ट हैं अगली पोस्ट में एक एक करके वर्णन करता जाऊंगा ।

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