ये दोनों भजन मैंने यू ट्यूब पर सुने हैं । इनकी गायिका का नाम तो मुझे नहीं पता हैं । वैसे ये जगद्गुरु कृपालुजी की शिष्या हैं । आशा हैं श्री राधा कृष्ण के भक्तो को ये भक्ति बढ़ाने में सहायक होंगे । भजनों के असली लिंक ये हैं
पहला भजन - राधा मेरी गति पति , राधा पति मेरी गति
http://www.youtube.com/watch?v=hszR_JUkNxw
दूसरा भजन - जोई नन्द नंदन सोई वृन्दावन
http://www.youtube.com/watch?v=iikLpvdOndQ&feature=related
इन भजनों की विशेषता हैं कि एक ही पंक्ति को कीर्तन पद्धति की तरह दोहराया गया हैं । Sequence भी आगे पीछे हो सकती हैं
पहला भजन
राधा मेरी गति मति , राधा पति मेरी रति ,
राधा पति मेरी गति, वारो कोटि रति पति ,
श्यामा श्याम सुख राशी,
राधा मेरी गति मति,राधा पद मेरी गति
राधा पद मेरी रति
हो तो हो युगल दासी ,
राधा मेरी ठकुरानी , वृन्दावन रजधानी
ब्रह्म करे अगवानी , मैं तो राधा की दीवानी
दूसरा भजन
जोई नंदनंदन सोई वृन्दावन ,मेरी धन नन्द नंदन वृन्दावन
जोई श्री राधा सोई राधा वर , मेरो धन श्री राधा राधा वर
करत बिहार कुंजबन गहबर लाड लड़ावत प्रेम सरोवर
कुसुम चुनत दोउ कुसुम सरोवर
युगल रूप दिखलाओ गुरुवर , कोटिन्ह प्राण निछावर तुम पर
हरि गुरु कृपा सदा सब ही पर जोई श्री गिरिधर सोई श्री गुरुवर
प्रथम नमन गुरुवर पुनि गिरिधर हरि गुरु कृपा सदा सब ही पर
अंत करण पात्र पावन कर , जोई श्री राधा सोई श्री राधा वर
जोई नंदनंदन सोई वृन्दावन ,मेरी धन नन्द नंदन वृन्दावन
शनिवार, 20 फ़रवरी 2010
गीत - मैं तेरी छोटी बहना ( फिल्म सौतन )
अस्सी के दशक में बनी सौतन फिल्म के गीत बहुत अच्छे हैं . एक गाना बहुत प्रसिद्ध हैं " जिंदगी प्यार का गीत हैं "।
दूसरा गाना जो राजेश खन्ना की दूसरी पत्नी पद्मिनी कोल्हापुरे अपनी सौतन टीना मुनीम के लिए गाती हैं और गाना खत्म होने के बाद पद्मिनी आत्महत्या कर लेती हैं । गीत के बोल ये हैं ,
मै तेरी छोटी बहना रे समझ ना मुझको सौतन
श्याम तेरे हैं तेरे रहेंगे मै तो उनकी जोगन
वहम का सागर अँधा सागर जिसका नहीं किनारा हैं
वहम ने जग में सबको डुबोया किसको पार उतारा
तेरा मन साजन का घर तू हैं उनकी धडकन
समझ ना मुझको सौतन
जिन राहों से वो गुजरे बस उन कदमो कि धूल को पूजा
मैंने उनको ईश्वर समझा दोष बता क्या और हैं दूजा
मैं पतझड़ कि सूखी पाती आन पड़ी तेरे आँगन
समझ ना मुझको सौतन
(अब पद्मिनी जहर खा लेती हैं और आखिरी पंक्तिया बोलती हैं )
अंतिम आज विदाई लेने लाडली बहना आई हूँ
मन में कोई मैल ना रखना इतना कहने आई हूँ
मेरी दुआ हैं लाख जन्म तक तू हो उनकी दुल्हन
इस के बाद पद्मिनी की मृत्यु हो जाती हैं । इसके बाद टीना मुनीम पद्मिनी के शव पर रोती हैं , फिर पृष्ठभूमि में पद्मिनी की भावनाओ को व्यक्त करता गीत उभरता हैं
अंतिम आज विदाई लेके लाडली बहना जाती हैं
मन में कोई मैल ना रखना बिनती करते जाती हूँ
मेरी दुआ हैं लाख जन्म तक तू हो उनकी दुल्हन
इसके बाद टीना मुनीम पद्मिनी के बच्चे को राजेश खन्ना की गोद में से अपनी गोद में ले लेती हैं।
दूसरा गाना जो राजेश खन्ना की दूसरी पत्नी पद्मिनी कोल्हापुरे अपनी सौतन टीना मुनीम के लिए गाती हैं और गाना खत्म होने के बाद पद्मिनी आत्महत्या कर लेती हैं । गीत के बोल ये हैं ,
मै तेरी छोटी बहना रे समझ ना मुझको सौतन
श्याम तेरे हैं तेरे रहेंगे मै तो उनकी जोगन
वहम का सागर अँधा सागर जिसका नहीं किनारा हैं
वहम ने जग में सबको डुबोया किसको पार उतारा
तेरा मन साजन का घर तू हैं उनकी धडकन
समझ ना मुझको सौतन
जिन राहों से वो गुजरे बस उन कदमो कि धूल को पूजा
मैंने उनको ईश्वर समझा दोष बता क्या और हैं दूजा
मैं पतझड़ कि सूखी पाती आन पड़ी तेरे आँगन
समझ ना मुझको सौतन
(अब पद्मिनी जहर खा लेती हैं और आखिरी पंक्तिया बोलती हैं )
अंतिम आज विदाई लेने लाडली बहना आई हूँ
मन में कोई मैल ना रखना इतना कहने आई हूँ
मेरी दुआ हैं लाख जन्म तक तू हो उनकी दुल्हन
इस के बाद पद्मिनी की मृत्यु हो जाती हैं । इसके बाद टीना मुनीम पद्मिनी के शव पर रोती हैं , फिर पृष्ठभूमि में पद्मिनी की भावनाओ को व्यक्त करता गीत उभरता हैं
अंतिम आज विदाई लेके लाडली बहना जाती हैं
मन में कोई मैल ना रखना बिनती करते जाती हूँ
मेरी दुआ हैं लाख जन्म तक तू हो उनकी दुल्हन
इसके बाद टीना मुनीम पद्मिनी के बच्चे को राजेश खन्ना की गोद में से अपनी गोद में ले लेती हैं।
गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010
प्रार्थना - इष्टदेवो से
कभी कभी मुझे लगता हैं कि हम सब सारे सुख आनंद और संतुष्टि ही चाहते हैं और इसके लिए हमने अलग अलग साधन बनाये हैं । सारा जीवन हम इसी लिए तो दम मारकर काम करने में लगे रहते हैं । इसके लिए हमारे जीवन में प्रार्थना अहम् भाग हैं । मैंने अपनी सारी प्रार्थनाओं को text रूप देने की कोशिश की हैं । मैं शुरुवात करता हूँ यहाँ से :-
हे श्री हरि !
आप बताएं की मैं आपके भक्तो की लिस्ट में स्थान रखता हूँ की नहीं । हे प्रभु अगर नहीं तो प्लीज़ मुझे अपनी इस favourite list में डाल लीजिये । अगर आप नहीं डालेंगे तो मेरा तो सारा जीवन व्यर्थ माना जाएगा । हे प्रभु , हमें भी शीघ्रातिशीघ्र कोई बहाना बनाकर बस मुक्त कर दीजिये । हममे कहाँ ताकत हैं । बल्कि जो दुःख आपने पहले दिए हम तो उन्हें ही झेलने के काबिल नहीं थे । हे इश्वर बस अब तो दया करो .
हे गुरु जी !
क्या मैं आपके सतशिष्यो की लिस्ट में हूँ या नहीं । मैं जानता हूँ की इतनी बड़ी उपलब्धि के मैं योग्य नहीं हूँ । ऊपर से कर्म भी उस तरह के नहीं हैं की आपको पसंद आ सकूँ । ना ही पूरी श्रधा और तत्परता हैं , फिर भी बस आपकी दया के सहारे ही पार होना चाहता हूँ । हे बापूजी , मुझे बस आप स्वीकार कर ले तो जीवन के महान और वास्तविक उद्देश्य की प्राप्ति हो जाए और फिर कुछ पाना शेष ना रहे । और जन्म जन्मान्तरण का झमेला समाप्त हो जाए। हालाँकि यह सत्य हैं की मैं इस कृपा के योग्य नहीं हूँ ।
हे शिव !
हे भोलेनाथ , कृपया ऋषि अगस्त्य जैसो की सूची में मुझे शामिल कर लीजिये जिन पर आपने करुना कर राम भक्ति का दान कर दिया । आप जैसे सहज ही कृपा कर देने वाले इष्टदेव तो कोई दुसरे हो ही नहीं सकते क्योंकि आप मेरे इष्टदेव का करुण प्राकट्य हैं ।
हे माता महालक्ष्मी ,
मैं ये तो नहीं कहता की मुझे धन के भण्डार दे , या सारी सृष्टि का वैभव दे । ये सब तो आप बिना भक्ति के भी दे देती हैं पर उसके बाद फिर ये सब व्यर्थ हो जाता हैं क्योंकि देह तो अवश्य नष्ट होंगी । मुझे तो बस इतनी ही कृपा देना की मैं कभी भी आपके वशीभूत होकर अपने इष्टदेव श्री हरि से विमुख ना हो जाऊं । बस जैसे आपके आधार श्री हरि नारायण हैं वैसे ही हम भी उन्हें ही वरण करें ।
हे माता पार्वती,
हे जगदम्बा , आप सिर्फ अपनी दृढ इच्छा शक्ति का दान करें जो भगवान् शिव को पाए बिना कभी संतुष्ट नहीं होती हैं ।
हे माता सरस्वती , श्री गणेश , श्री शेषनाग जी
आप तीनो मुझे इश्वर का गान , चिंतन , साहित्य रचने वाली बुद्धि प्रदान करे , जैसे आप लोग उनका गुणगान करते नहीं थकते वैसे ही मेरी उनमे दृढ आस्था रहे ।
हे नारद जी
इश्वर के नाम का सतत जाप और निर्बाध गति के स्वामी श्री नारद जी आप मुझ पर प्रसन्न हो । और आपकी योग्यता को हम तुच्छ लोग भी पा सकें ऐसी हमें कृपा प्राप्त कराये।
हे श्री हरि !
आप बताएं की मैं आपके भक्तो की लिस्ट में स्थान रखता हूँ की नहीं । हे प्रभु अगर नहीं तो प्लीज़ मुझे अपनी इस favourite list में डाल लीजिये । अगर आप नहीं डालेंगे तो मेरा तो सारा जीवन व्यर्थ माना जाएगा । हे प्रभु , हमें भी शीघ्रातिशीघ्र कोई बहाना बनाकर बस मुक्त कर दीजिये । हममे कहाँ ताकत हैं । बल्कि जो दुःख आपने पहले दिए हम तो उन्हें ही झेलने के काबिल नहीं थे । हे इश्वर बस अब तो दया करो .
हे गुरु जी !
क्या मैं आपके सतशिष्यो की लिस्ट में हूँ या नहीं । मैं जानता हूँ की इतनी बड़ी उपलब्धि के मैं योग्य नहीं हूँ । ऊपर से कर्म भी उस तरह के नहीं हैं की आपको पसंद आ सकूँ । ना ही पूरी श्रधा और तत्परता हैं , फिर भी बस आपकी दया के सहारे ही पार होना चाहता हूँ । हे बापूजी , मुझे बस आप स्वीकार कर ले तो जीवन के महान और वास्तविक उद्देश्य की प्राप्ति हो जाए और फिर कुछ पाना शेष ना रहे । और जन्म जन्मान्तरण का झमेला समाप्त हो जाए। हालाँकि यह सत्य हैं की मैं इस कृपा के योग्य नहीं हूँ ।
हे शिव !
हे भोलेनाथ , कृपया ऋषि अगस्त्य जैसो की सूची में मुझे शामिल कर लीजिये जिन पर आपने करुना कर राम भक्ति का दान कर दिया । आप जैसे सहज ही कृपा कर देने वाले इष्टदेव तो कोई दुसरे हो ही नहीं सकते क्योंकि आप मेरे इष्टदेव का करुण प्राकट्य हैं ।
हे माता महालक्ष्मी ,
मैं ये तो नहीं कहता की मुझे धन के भण्डार दे , या सारी सृष्टि का वैभव दे । ये सब तो आप बिना भक्ति के भी दे देती हैं पर उसके बाद फिर ये सब व्यर्थ हो जाता हैं क्योंकि देह तो अवश्य नष्ट होंगी । मुझे तो बस इतनी ही कृपा देना की मैं कभी भी आपके वशीभूत होकर अपने इष्टदेव श्री हरि से विमुख ना हो जाऊं । बस जैसे आपके आधार श्री हरि नारायण हैं वैसे ही हम भी उन्हें ही वरण करें ।
हे माता पार्वती,
हे जगदम्बा , आप सिर्फ अपनी दृढ इच्छा शक्ति का दान करें जो भगवान् शिव को पाए बिना कभी संतुष्ट नहीं होती हैं ।
हे माता सरस्वती , श्री गणेश , श्री शेषनाग जी
आप तीनो मुझे इश्वर का गान , चिंतन , साहित्य रचने वाली बुद्धि प्रदान करे , जैसे आप लोग उनका गुणगान करते नहीं थकते वैसे ही मेरी उनमे दृढ आस्था रहे ।
हे नारद जी
इश्वर के नाम का सतत जाप और निर्बाध गति के स्वामी श्री नारद जी आप मुझ पर प्रसन्न हो । और आपकी योग्यता को हम तुच्छ लोग भी पा सकें ऐसी हमें कृपा प्राप्त कराये।
बुधवार, 17 फ़रवरी 2010
लुव कुश रामायण ( रामानंद सागर निर्मित रामायण में से भजन )
यह भजन हमें सिखाता हैं कि जो स्वयं जगदम्बा श्री लक्ष्मी हैं । सब वैभवो और ऐश्वर्यों कि स्वामिनी हैं , वो खुद मनुष्य रूप में कितने अभाव और समाज की अन्याय पूर्ण व्यवस्थाओं का सामना करती हैं ।
लुव कुश कहते हैं
काल चक्र ने घटना क्रम में ऐसा चक्र चलाया
राम सिया के जीवन में फिर घोर अँधेरा छाया
अवध में ऐसा , ऐसा इक दिन आया
निष्कलंक सीता पे प्रजा ने मिथ्या दोष लगाया
चल दी सिया जब तोड़ नेह नाते मोह के
पाषाण हृदयों में ना अंगारे जगे विद्रोह के
ममतामई माओं के आँचल भी सिमट कर रह गए
गुरुदेव ज्ञान और नीति के सागर भी खट कर रह गए
ना रघुकुल ना रघुकुल नायक
कोई ना सिया का हुआ सहायक
मानवता को खो बैठे सब सभ्य नगर के वासी
तब सीता को हुआ सहायक वन का एक सन्यासी
उन ऋषि परम उदार का बाल्मीकि शुभ नाम
सीता को आश्रय दिया ले आये निज धाम
रघुकुल में कुलदीप जलाये , राम के दो सुत सिय ने जाए
फिर लव कुश कहते हैं " श्रोतागण जो एक राजा की पुत्री हैं एक राजा की पुत्रवधू हैं और एक चक्रवर्ती राज़ा की पत्नी हैं ।वही महारानी सीता वनवास के दिनों में अपने दुःख कैसे काटती हैं । फिर स्वाभिमान की रक्षा करते हुए किसी से सहायता मांगे बिना अपना काम वो स्वयं करती हैं । स्वयं वन से लकड़ी काटती हैं, स्वयं अपना धान कूटती हैं , स्वयं अपनी चक्की पीसती हैं । और अपनी संतान को स्वावलम्बी बनने कि शिक्षा कैसे देती , आप उसकी एक करुण झांकी देखिये :-
जनकदुलारी कुलवधू दशरथ जी की राजरानी हो के दिन वन में बिताती हैं
रहते थे घेरे जिसे दास दासी आठो याम दासी बनी अपनी उदासी को छुपाती हैं
धर्म प्रवीना सती परमकुलीना सब विधि दोष हीना जीना दुःख में सिखाती हैं
जग माता हरिप्रिया लक्ष्मीस्वरूपा सिया कूटती हैं धान भोज स्वयं बनाती हैं
कठिन कुल्हाड़ी ले के लकडिया काटती हैं, करम लिखे को पर काट नहीं पाती हैं
फूल भी उठाना भारी जिस सुकुमारी को था दुःख भरे जीवन का बोझ वो उठाती हैं
अर्धांगिनी रघुवीर की वो धरी धीर भरती हैं नीर नीर जल में मिलाती हैं
पिस के प्रजा के आप वादों के कुचक्र में वो पीसती हैं चाकी स्वाभिमान को बचाती हैं
पालती हैं बच्चों को वो कर्मयोगिनी की भांति स्वावलम्बी स्वाभिमानी सबल बनाती हैं
ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुःख देते निठुर नीयति को दया भी नहीं आती हैं
हो उस दुखिया के प्राणों से प्यारे हम ही सुत श्री राम तिहारे
सीता माँ की आँखों के तारे लव कुश हैं पितु नाम हमारे
हे पितु भाग्य हमारे जागे राम कथा कही राम के आगे
भजन - लुव कुश द्वारा श्रीराम को उलाहना (सन्दर्भ फिल्म सम्पूर्ण रामायण से )
इस भजन या गीत कि पंक्तियाँ एक पुरानी फिल्म " सम्पूर्ण रामायण " फिल्म से ली गयी हैं हैं। इस फिल्म में दारा सिंह हुनमान बने थे । भजन कि पृष्ठभूमि ये हैं कि जब लव कुश को पता चला कि श्री राम अश्वमेध यज्ञ कर रहे हैं तो वे दोनों अयोध्या पहुँच कर भजन के रूप में स्त्रिओं की दुर्दशा का वर्णन करते हैं । भजन जन शुरू होता हैं तो उस समय मंत्रोच्चार चरम पर होता हैं । पर जैसे ही लव कुश के स्वर तीव्र होते हैं तो सभी और स्वयं श्री हरि भगवान् राम उठकर लव कुश का करुणापूर्ण भजन सुनते हैं ।
भजन ये हैं
हम रामचंद्र की चन्द्र कला में भी कलंक दिखलाते हैं
नारी के आसुओं से लिखी रामायण तुम्हे सुनाते हैं
इन तारो से अंगारों से झंकार नई सुनवाते हैं
ये श्लोक नहीं अत्याचारों के अग्निवेद हम गाते हैं
भारत की सीताओं के दुखड़े जब तक होंगे चूर्ण नहीं
हे राम तुम्हारी रामायण तब तक होगी सम्पूर्ण नहीं
जब पुरुष परीक्षाये लेगा नारी में दोष निकालेगा
सती पर विश्वास नहीं करके , अग्नि में उन्हें डालेगा
नारी पर ज्वाला की ये लपटे होंगी भूर्ण नहीं
हे राम तुम्हारी रामायण तब तक होंगी सम्पूर्ण नहीं
जब राम राज्य के निर्माता , धोबी की बात में आयेंगे
भारत भविष्य की माता को धोखे से वन में ठुकरायेंगे
तब तक कवि बाल्मीकि की लेखनी होगी परिपूर्ण नहीं
हे राम तुम्हारी रामायण
पुरुषों की नीति अनीति बनी चलती हैं,नारी के पावन जीवन को छलती हैं
तो सृष्टि सभ्यता की संध्या ढलती हैं,जब स्वयं ज्वाल में जगदम्बा जलती हैं
ज्वाल में जगदम्बा जलती हैं,
भजन ये हैं
हम रामचंद्र की चन्द्र कला में भी कलंक दिखलाते हैं
नारी के आसुओं से लिखी रामायण तुम्हे सुनाते हैं
इन तारो से अंगारों से झंकार नई सुनवाते हैं
ये श्लोक नहीं अत्याचारों के अग्निवेद हम गाते हैं
भारत की सीताओं के दुखड़े जब तक होंगे चूर्ण नहीं
हे राम तुम्हारी रामायण तब तक होगी सम्पूर्ण नहीं
जब पुरुष परीक्षाये लेगा नारी में दोष निकालेगा
सती पर विश्वास नहीं करके , अग्नि में उन्हें डालेगा
नारी पर ज्वाला की ये लपटे होंगी भूर्ण नहीं
हे राम तुम्हारी रामायण तब तक होंगी सम्पूर्ण नहीं
जब राम राज्य के निर्माता , धोबी की बात में आयेंगे
भारत भविष्य की माता को धोखे से वन में ठुकरायेंगे
तब तक कवि बाल्मीकि की लेखनी होगी परिपूर्ण नहीं
हे राम तुम्हारी रामायण
पुरुषों की नीति अनीति बनी चलती हैं,नारी के पावन जीवन को छलती हैं
तो सृष्टि सभ्यता की संध्या ढलती हैं,जब स्वयं ज्वाल में जगदम्बा जलती हैं
ज्वाल में जगदम्बा जलती हैं,
इश्वर प्रार्थना और भजन
हरि हर शरणम्
हे हरिमैं आपकी शरण हूँ । अब समय आ गया है की आप मेरा उद्धार कर दें । अब मुझमे इतनी ताकत नहीं बची किदुनिया से संघर्ष करू या आपकी इस शरीर से सेवा कर सकूँ । आप ही तो कहते हो कि जब मुझे कोई पुकारता है तो मैं आ जाता हूँ । इस संसार में अपनी इच्छा पूर्ति करते करते मैं तंग आ चुका हूँ ।
आप तो सब जानते हैं फिर क्यों जानकार भी अनजान बने हुए हैं । कुछ लोग जो धर्म में नए नए हैं हैं वो भी कहते हैं की वो अपने इष्ट से बात करते हैं । हमें तो प्रभु कोई पूर्वाग्रह नहीं की आप गुरु ,कृष्ण या हरि या शिव बनकर आये अगर आप चाहते हैं की आप मुझे कुछ और बनकर दर्शन देना चाहते हैं तो हम अपनी कल्पना को वैसा
बस बार बार यही दुआ करते हैं की कभी तो हम पर दया करो । बनाने को भी तैयार हैं । हम तो अपनी सोच आप पर लाद ही नहीं रहे हैं
आपके लिए बस सिर्फ ये ही पंक्ति याद आती है
" झूमे झुके कभी न बरसे कैसे हो तुम घनश्याम
कब लोगे शरण मेरे राम
चलते चलते मेरे पग हारे आई जीवन की श्याम
कब लोगे शरण मोरे राम
कहते हैं तुम हो दया के सागर
फिर क्यूँ खाली मेरी गागर
सुन के जो बहरे हो जाओगे
आप ही छलिया कहलाओगे
मेरी बात बने न बने हो जाओगे तुम बदनाम
हे राम हे राम
मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010
जिंदगी प्यार का गीत हैं
लता मंगेशकर की आवाज़ में पद्मिनी कोल्हापुरे पर फिल्माया ये गीत वाकई जिंदगी के उतार चढाव दिखाता हैं ।
गीत के बोल हैं
जिंदगी प्यार का गीत हैं , इसे हर दिल को गाना पड़ेगा
जिंदगी गम का सागर भी हंस के उस पार जाना पड़ेगा
जिसका जितना हो आँचल यहाँ पर उसको सौगात उतनी मिलेगी
फूल जीवन में ना खिले तो कांटो से भी निभाना पड़ेगा
हैं अगर दूर मंजिल तो क्या रास्ता भी मुश्किल हैं तो क्या
रात तारों भरी ना मिले तो दिल का दीपक जलाना पड़ेगा
जिंदगी एक पहेली भी हैं सुख दुःख की सहेली भी हैं
जिंदगी एक वचन भी तो हैं जिसे सबको निभाना पड़ेगा
(किशोर कुमार के स्वर में)
गीत के बोल हैं
जिंदगी प्यार का गीत हैं , इसे हर दिल को गाना पड़ेगा
जिंदगी गम का सागर भी हंस के उस पार जाना पड़ेगा
जिसका जितना हो आँचल यहाँ पर उसको सौगात उतनी मिलेगी
फूल जीवन में ना खिले तो कांटो से भी निभाना पड़ेगा
हैं अगर दूर मंजिल तो क्या रास्ता भी मुश्किल हैं तो क्या
रात तारों भरी ना मिले तो दिल का दीपक जलाना पड़ेगा
जिंदगी एक पहेली भी हैं सुख दुःख की सहेली भी हैं
जिंदगी एक वचन भी तो हैं जिसे सबको निभाना पड़ेगा
(किशोर कुमार के स्वर में)
ज़िन्दगी एक अहसास हैं टूटे दिल की कोई आस हैं
ज़िन्दगी एक बनवास हैं काट कर सबको जाना पड़ेगा
ज़िन्दगी बेवफा हैं तो क्या अपने रूठे हैं हमसे तो क्या
हाथ में हाथ ना हो तो क्या साथ फिर भी निभाना पड़ेगा
ज़िन्दगी एक मुस्कान हैं दर्द की कोई पहचान हैं
ज़िन्दगी एक मेहमान हैं छोड़ संसार जाना पड़ेगा
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सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...
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सबसे पहले तो आप का धन्यवाद जो आपने अपना कीमती समय ख़राब करने की ठान ही ली हैं । दूसरा सरल कुमार जी बेचारे महत्वाकांक...