गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

प्रार्थना - इष्टदेवो से

कभी कभी मुझे लगता हैं कि हम सब सारे सुख आनंद और संतुष्टि ही चाहते हैं और इसके लिए हमने अलग अलग साधन बनाये हैं । सारा जीवन हम इसी लिए तो दम मारकर काम करने में लगे रहते हैं । इसके लिए हमारे जीवन में प्रार्थना अहम् भाग हैं । मैंने अपनी सारी प्रार्थनाओं को text रूप देने की कोशिश की हैं । मैं शुरुवात करता हूँ यहाँ से :-


हे श्री हरि !
आप बताएं की मैं आपके भक्तो की लिस्ट में स्थान रखता हूँ की नहीं । हे प्रभु अगर नहीं तो प्लीज़ मुझे अपनी इस favourite list में डाल लीजिये । अगर आप नहीं डालेंगे तो मेरा तो सारा जीवन व्यर्थ माना जाएगा । हे प्रभु , हमें भी शीघ्रातिशीघ्र कोई बहाना बनाकर बस मुक्त कर दीजिये । हममे कहाँ ताकत हैं । बल्कि जो दुःख आपने पहले दिए हम तो उन्हें ही झेलने के काबिल नहीं थे । हे इश्वर बस अब तो दया करो .

हे गुरु जी !
क्या मैं आपके सतशिष्यो की लिस्ट में हूँ या नहीं । मैं जानता हूँ की इतनी बड़ी उपलब्धि के मैं योग्य नहीं हूँ । ऊपर से कर्म भी उस तरह के नहीं हैं की आपको पसंद आ सकूँ । ना ही पूरी श्रधा और तत्परता हैं , फिर भी बस आपकी दया के सहारे ही पार होना चाहता हूँ । हे बापूजी , मुझे बस आप स्वीकार कर ले तो जीवन के महान और वास्तविक उद्देश्य की प्राप्ति हो जाए और फिर कुछ पाना शेष ना रहे । और जन्म जन्मान्तरण का झमेला समाप्त हो जाए। हालाँकि यह सत्य हैं की मैं इस कृपा के योग्य नहीं हूँ ।

हे शिव !
हे भोलेनाथ , कृपया ऋषि अगस्त्य जैसो की सूची में मुझे शामिल कर लीजिये जिन पर आपने करुना कर राम भक्ति का दान कर दिया । आप जैसे सहज ही कृपा कर देने वाले इष्टदेव तो कोई दुसरे हो ही नहीं सकते क्योंकि आप मेरे इष्टदेव का करुण प्राकट्य हैं ।

हे माता महालक्ष्मी ,
मैं ये तो नहीं कहता की मुझे धन के भण्डार दे , या सारी सृष्टि का वैभव दे । ये सब तो आप बिना भक्ति के भी दे देती हैं पर उसके बाद फिर ये सब व्यर्थ हो जाता हैं क्योंकि देह तो अवश्य नष्ट होंगी । मुझे तो बस इतनी ही कृपा देना की मैं कभी भी आपके वशीभूत होकर अपने इष्टदेव श्री हरि से विमुख ना हो जाऊं । बस जैसे आपके आधार श्री हरि नारायण हैं वैसे ही हम भी उन्हें ही वरण करें ।

हे माता पार्वती,
हे जगदम्बा , आप सिर्फ अपनी दृढ इच्छा शक्ति का दान करें जो भगवान् शिव को पाए बिना कभी संतुष्ट नहीं होती हैं ।

हे माता सरस्वती , श्री गणेश , श्री शेषनाग जी
आप तीनो मुझे इश्वर का गान , चिंतन , साहित्य रचने वाली बुद्धि प्रदान करे , जैसे आप लोग उनका गुणगान करते नहीं थकते वैसे ही मेरी उनमे दृढ आस्था रहे ।

हे नारद जी
इश्वर के नाम का सतत जाप और निर्बाध गति के स्वामी श्री नारद जी आप मुझ पर प्रसन्न हो । और आपकी योग्यता को हम तुच्छ लोग भी पा सकें ऐसी हमें कृपा प्राप्त कराये।

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सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...