मंगलवार, 5 जनवरी 2010

बापूजी के साधकों के लिए धैर्य रखने वाले क्षण

हालाँकि बापूजी की कृपा से सभी साधक शांतचित स्वाभाव के हैं । गुजरात पुलिस के गुंडा राज में पिछले हफ्ते जिस प्रकार से सिर्फ़ सामान्य साधक ही नही बल्कि कई हफ्ते एकांत साधना का व्रत लेकर मौन मन्दिर में साधना करने वाले पवित्र साधक अन्यायपूर्ण ,बर्बर हिंसा का शिकार हुए , अब पता चला कि कैसे रावन ने ऋषि मुनिओं पर अत्याचार करने का साहस किया होगा क्योंकि जब अपना धर्म कर्म से बिल्कुल नाता तोड़ लेता तो सबसे पहले वो धार्मिक बन्दों में दोष देखेगा और उनसे वैर करेगा , हिंसा पर उतारू हो जाएगा ।

कुछ साधकों का यह वर्णन है कि थाने जो व्यवहार हुआ वह सरकार कभी आतंकवादियों से भी नही करती है । एक सिपाही ने शराब पी पी कर जो तांडव किया वो गालियाँ और हिंसा अगर देश द्रोहिओं के ख़िलाफ़ की जाती तो दोष में क्षेत्रवाद , आतंकवाद और संसद पर हमले जैसे घटनाये न होती । शायद राज्य और केन्द्र सरकार सो रही है । पर इतना अन्याय किसी का भी दिल तोड़ देने के लिए काफी है ।

पहले सत्य साईं बाबा फ़िर शकाराचार्य जी और अब बापूजी , कितनी घृणित मनोदशा है कई लोगों की जिससे वो संतो को भी अपने हिसाब से मापने लग जाते हैं । बापूजी की सहनशीलता भी अतुलनीय है । वो तो अपने उच्च समाधी सुख को छोड़कर संसार में आए हैं। मीडिया और कुछ गिने चुने लोग शायद गुरु की महत्ता से अनभिग्य है । जिन साधकों ने इश्वर प्राप्ति के लिए अपना सर्वस्व छोड़कर साधना का मार्ग पकड़ा , क्या प्रभु उन्हें ऐसे हालात में देखकर द्रवित नही हुआ होगा ।

!! राम !!

!! हरि ॐ !!

बापूजी सबका भला करें ।

रविवार, 3 जनवरी 2010

चेतन भगत- एक महान लेखक श्रेय से वंचित

जो लोग चेतन भगत को नहीं जानते उनके लिए मैं बताना चाहता हूँ की I.I.T. delhi से इंजीनियरिंग I.I. M. ahmedabad से MBA करने के बाद Deutche Bank Investment Banker में बारह साल जॉब करने के बाद 2009 में फुल टाइम लेखक बन गए । उन्होंने पिछले पांच साल में तीन किताबें लिखी हैं । 2004 में लिखी पहली किताब ( five point someone ) भारत के इतिहास में अंग्रेजी में सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक हैं । one night @ call centre और three mistakes of my life उनकी दूसरी और तीसरी किताब हैं ।

उनके बारे में लगभग सभी इंजिनियर और professionals जानते हैं । क्योंकि उनके सभी प्रशंसक इन्ही क्षेत्रों से हैं , इसीलिए वो अपने ब्लॉग पर अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा टिप्पणियां पाते हैं जैसे जब ये आमिर खान और विधु विनोद चोपड़ा ने उन्हें पब्लिसिटी स्टंट बताया तो दो दिन के अन्दर ही 800 लोगो ने अपने कमेंट्स में उन्हें समर्थन दिया जबकि अमिताभ जी को भी अभी अधिकतम किसी पोस्ट के लिए सात सौ कमेंट्स भी नहीं मिले हैं ।

अत्यंत प्रतिभाशाली चेतन फिल्म मेकर्स को नहीं जानते थे । दो साल से उन्हें सिर्फ दस लाख रुपये देकर कोंट्रेक्ट साईन करवाया गया था की फिल्म में सिर्फ उनके पात्र होंगे और दो या तीन प्रतिशत ही कहानी उनकी होगी और चेतन का नाम फिल्म में होगा । इसमें दुखद यह ही किउन्हें कभी फ़ाइनल कहानी बताई ही नहीं गयी । चेतन के घरवालों ने जब फिल्म देखी तो पाया कि जब फिल्म ख़तम हो रही थी तो छोटे से फॉण्ट में बस लिखा गया " based on the novel- five point someone" । उसमे कही चेतन का नाम नहीं था । इसे देखकर तो चेतन की माताजी रो पड़ी की की एक एतिहासिक फिल्म के क्रेडिट के लिए कैसे उसके बेटे को पहले ही फंसा लिया गया ।

जिन्होंने भी इस बुक को पढ़ा होगा और फिल्म देखी होगी उन्हें पता चलेगा कि आमिर और विधु ने कितना कूटनीतिक काम किया । पर वो बड़े खिलाडी हैं अपने गेम के । सबसे बड़ी और रोचक बात यह हैं कि आमिर खान कह rahe हैं कि उन्होंने किताब नहीं पढ़ी हैं और निर्माता ने उन्होंने नहीं पढने के लिए कहा हैं ।

पर यही लाइफ हैं " Might is Right"

अपने विनम्र स्वभाव के लिए जाने वाले चेतन ने अपने ब्लॉग पर इतना ही लिखा हैं

"I don’t really want to talk about anything else in this matter. I thank you all for your support. I’ve gained a lot of credibility and love, all of us stood up for what we believed in, and I think my country knows who wrote this film’s story now anyway.
I am aware of the many opinions and statements the makers and Mr Khan have made about me and the kind of person I am, but I don’t have any issues with that. I also thank the media, for bringing the issue out clearly, and helping me present my side in a fair manner."

"Like I said, I don’t need anything. Even if I have no more movies made on my stories or nobody wants to read my books and columns, I’ll happily join ISKCON and dedicate my life to Krishna."

गुरुवार, 31 दिसंबर 2009

एक कविता- कह देना कुछ ख़ास नहीं

ये कविता मैंने इन्टरनेट से ही ली । इसके exact लिंक का मुझे अभी पता नहीं हैं । बस मैंने इसे देवनागरी में लिखा हैं जो उम्मीद हैं आपको अच्छी लगेगी । अगर आप में किसी को इसके मूल लेखक के बारे में पता चले तो बता देना जिससे मैं पोस्ट में उनका लिंक डालकर उन्हें इसका पूरा श्रेय दे सकूँ

कोइ तुमसे पूछे कौन हूँ मैं, बस कह देना कोई ख़ास नहीं
एक दोस्त कच्चा पक्का सा , एक झूठ आधा सच्चा सा
दर्द ढके परदे जैसा , वो बहाना है सबसे अच्छा सा
जीवन का एक साथी है, जो दूर हो के पास नहीं है
कोई पूछे कौन हूँ मैं , बस कह देना कोई ख़ास नहीं

हवा का एक वो झोंका है , कभी शांत तो कभी तूफानों सा
शकल देख नजरे झुका ले, सबसे प्यारा कभी बेगानों सा
वो जिंदगी का समंदर, पास है पर किसी को प्यास नहीं ,
कोई पूछे कौन हूँ मैं , बस कह देना कोई ख़ास नहीं

एक साथी जो बिना कहे भी सब कुछ कह जाता है
यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है
यूँ तो उसके होने का कुछ गम नहीं
पर कभी आंसू बनकर बह जाता है
यूँ रहता तो मेरे दिल में ही है
पर आँखों को उसकी तलाश नहीं

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं,
बस कह देना कोई ख़ास नहीं

शनिवार, 19 दिसंबर 2009

वंशावली भाग छः - भगवान के अवतार (दस पूर्णावतार )

भगवान विष्णु के शास्त्रों ने चौबीस अवतार माने हैं । इनमे दस पूर्णावतार हैं और चौदह अंशावतार हैं । मेरी पिछली वंशावली वाली पोस्टों में आप सन्दर्भ ले सकते हैं जिससे पीढ़ी दर पीढ़ी आपको समझने में दिक्कत ना हो । क्रम से वंशावली ये हैं ।

पहला अवतार : ( मत्स्यावतार )
सातवें मनु श्री सत्यव्रत महाराज के समय में भगवान् हरि ने अवतार लियाiके सूर्य इस बार के सूर्य के पुत्र हैं । जब पिछले कल्प के अंत का समय आया तो भगवान् विष्णु ने राजा सत्यव्रत को एक सप्ताह पहले मछली के रूप में आकर कहा की वो एक बड़ी नाव बनाये जिसमे सप्त ऋषि और संसार की समस्त ओषधि आ सके । फिर एक सप्ताह बाद जब सारा संसार जल में डूबने लगा तो विष्णु जी ने अपने मत्स्य रूप को बड़ा किया और उस नाव को अपने सींग से बांधकर कल्प की रात्रि में खड़े रहे । फिर दोबारा से मनु महाराज को नयी सृष्टि प्रारंभ करने का मार्गदर्शन दिया । इससे आगे की कथा आप पुरानों से भी पढ़ सकते हैं ।

दूसरा अवतार ( कच्छपावतार)
ये इस कल्प में राजा बलि के समय में जब समुन्द्रमंथन हुआ तो इंद्र और बलि ने मंदराचल पर्वत को रई की तरह प्रयोग किया और रस्सी की तरह वासुकी नाग को प्रयोग किया । इसमें समस्या यह हुई की मंदराचल पर्वत समुन्द्र के अन्दर धंसता चला गया , जिससे देवताओं और राक्षसों के अनुग्रह पर भगवन ने कछुए का रूप धारण करके मंदराचल को अपनी पीठ पर धारण किया और समुन्द्र मंथन में सहायता करने लगे। वैसे इसी समय विष प्रकट हुआ जिसे भगवान् शिव ने धारण किया और नीलकंठ कहलाये ।

तीसरा और चौथा अवतार (वराह अवतार और नरसिंह अवतार )
कश्यप ऋषि की दो प्रमुख पत्निया थी दिति और अदिति । अदिति के देवता आदि कई पुत्र हुए । दिति के दो राक्षस पुत्र हुए हिरनकश्यप और हिरण्याक्ष । पहले हिरण्याक्ष को मारने के लिए वराह ( सूअर ) का अवतार लिया भगवान् ने और आपने दांतों से जल में समाई पृथिवी को बाहर ले आये और अपने शापित पार्षद जय और विजय को रूप में हिरण्याक्ष और फिर प्रहलाद के पिता हिरन्यकश्यप को नरसिंह बनकर उद्धार कर दिया ।
वैसे यहाँ काबिले गौर हैं सनकादी ऋषियों के श्राप से जय विजय को तीन बार मनुष्य लोक में जन्म लेना पड़ा था
इनका पहला जन्म तो हिरन्यकश्यप और हिरण्याक्ष का हुआ । दूसरा रावन और कुम्भकर्ण और तीसरा यदुवंश में शिशुपाल और दन्तवक्र ( श्री कृष्ण के बुआ के पुत्रों के रूप में ) के रूप में हुआ


पांचवा अवतार (वामन अवतार )
इंद्र के छोटे भाई के रूप में जन्म लिया और पिता कश्यप और माता अदिति से जन्म लिया .
राजा बलि के से तीन पग भूमि मांगने वाले विष्णु जी ने छोटे कद का रूप बनाया और राजा बलि की दानशीलता को अमर बनाया और उन्हें आठवे कल्प में इंद्र बनाने का वरदान दिया । सारा वैभव राजा बलि से जीतकर अपने बड़े भाई इंद्र को सौंप दिया।


छठा अवतार ( भगवान् परशुराम )
रिचिक मुनि के पुत्र जमदग्नि के पुत्र के रूप में एक ब्राह्मण परिवार में जन्म लिया और इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रियों से रहित कर के ब्राह्मणों को दान कर दिया । एक हज़ार भुजाओ वाले सहस्त्रबाहु अर्जुन के हैहयवंश का संहार कर दिया और भगवान् राम के सीता स्वयंवर के बाद साधना के लिए चले गए और अब भगवान् के कल्कि अवतार तक के लिए गुप्त स्थान पर चले गए।

सातवाँ और आठवां अवतार ( राम और कृष्ण अवतार )
सबको इन अवतार के बारे में पहले से ही सारी जानकारी ज्ञात हैं । रावन और कुम्भ कर्ण को भगवान् राम ने संहार का दिया और इनके जय और विजय के तीसरे जन्म में शिशुपाल और दन्तवक्र बनकर आये अपनी बुआ ( कुंती की बहने ) जी के पुत्रों का भगवान् कृष्ण ने समाप्त कर उद्धार कर दिया ।

नवां अवतार ( भगवान् बुध )
लगभग चार सो इसा पूर्व ( 400 B. C. ) में भगवान् बुध के रूप में नौवा अवतार हुआ । इनके बारे में भी सभी को पता हैं

दशम अवतार ( भगवान् कल्कि )
कलयुग के आखिरी समय में लगभग तीन लाख पचपन हज़ार साल बाद उत्तर प्रदेश के संभल ग्राम में पंडित विष्णु यशा के घर में अंतिम अवतार होगा । इनके बारे में भी पुरानो में विस्तृत जानकारी उपलब्ध हैं ।
इस अवतार से कई लोग जुड़े हैं जैसे माता वैष्णो देवी जो भगवान् राम को पति रूप में ना पाकर उनके कल्कि रूप में पति रूप में स्वीकारेंगी । राम की पीढ़ी के राजा मरू और भीष्म पितामह के ताऊ देवापी भी उस समय प्रगट होंगे । भगवान् परशुराम और ज्ञानी याज्ञवल्कय भगवान् के गुरु और मार्गदर्शक होंगे । यह संक्षेप में इस अवतार का वर्णन हैं ।

अगर मुझसे लिखने में कोई त्रुटी हो गयी हो तो कृपया मार्गदर्शन करें जिससे मैं उसमे सुधार कर सकूँ .
चौदह अंशावतारों का वर्णन किसी दूसरी पोस्ट में समय आने पर करूँगा

सोमवार, 14 दिसंबर 2009

श्री सुरेशानंद जी का वैराग्यपूर्ण भजन -आश्रम की कैसेट "भजन सागर" से



तेरा हीरा जन्म बीता जाए रे , भजन कर गोविन्द का
कल कल करके टाल न भाई बड़े भाग्य से नर देह पाई ,
कर ले जग में नेक कमाई काल बदरिया सर पर छाई ,
फ़िर पीछे पछताए रे , भजन कर गोविन्द का
तेरा हीरा जन्म ...........
राम राम राम राम राम राम राम राम

दो दिन का है रैन बसेरा जिस दम तुझको कल ने घेरा
कोई न होवे साथी तेरा हो जाए शमशान में डेरा ,
तुझे छोड़ अकेला आए रे ,भजन कर गोविन्द का ,
तेरा हीरा जन्म ..............

ठाठ तेरा सब पड़ा रहेगा भजन ही तेरे संग चलेगा
भजन बिना भव कैसे तरेगा ,अवसर बीते हाथ मलेगा ,
तू हाथ पसरे जाए रे , भजन कर गोविन्द का ,
जय सिया राम ..

कुटुंब की खातिर क्यूँ मरता है मेरा मेरा क्यूँ करता है
पाप की गठरी सिर रखता इस झगड़े में क्यूँ पड़ता है
भटक भटक मर जाए रे ,
जय सिया राम ...

यह तो दो दिन का है मेला जाना पड़ेगा तुझे अकेला
छला छली का लगे झमेला आया अकेला चला अकेला
मत कर हाय हाय रे ।
राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम
राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम

रविवार, 13 दिसंबर 2009

सरल कुमार का इंग्लिश प्रेम -हास्य व्यंग्य

सभी युवा भारतीयों में अपने पढ़ाई के आखिरी सालों में अपनी मातृभाषा से गद्दारी करने की बड़ी भयंकर लाइलाज बीमारी पायी जाती है । इसे कभी सुधारी हुई भाषा में इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स या ग्रुप डिस्कशन या Personality Development से भी परिभाषित किया जाता है । सभी कहते हैं की नोकरी और शादी दोनों बंदोबस्त करने हो तो फलां फलां संसथान के लेबल से आपके मार्केट वैल्यू में सेंसेक्स की तरह उफान आ सकता है । हालाँकि कोर्स पूरा करते ही पता नही क्यों "recession" नाम की विदेशी बीमारी आ धमकती है ।
हाँ तो बात सरल कुमार की करें । अपने इंजीनियरिंग फायनल साल में तीन चार होलीवुड फ़िल्म देखने के बाद इंग्लिश के दीवाने दोस्तों ने सरल का भी मन बना लिया की सिर्फ़ छत्तीस घंटे में रोज़गार की अपार संभावनाओं के रस्ते खुलना तय है। वैसे भी इंजीनियरिंग के चार साल लगाने के चार पैसे की नौकरी न मिलने के बाद तो घर बैठना तय था । कम से कम इस इंग्लिश कोर्स से बाद में जो आय होगी उन पाँच छः सौ रुपये में घर में काम करने वाली बाई तो रख सकेंगे
फीस के लिए घर में विश्वास मत सर्व सम्मति से पास हो गया पर बड़ी शर्त ये की छोटे भाई बहनों की इंग्लिश बिना कोर्स कराये ठीक होनी चाहिए । आख़िर कितनी सही सोच थी की जो छोटे भाई बहन अभी रो पीट कर ढंग से हिन्दी बोलना भी नही सीखें है अब इंग्लिश सीखेंगे। पहले दिन ही सारे ओजार खरीद लिए गए , मसलन पेन और नोट बुक क्योंकि इंजीनियरिंग में तो दोस्तों के पेन मारकर और पन्ने फाड़कर ही कम चल गया था । पर यहाँ तो कुछ प्रोफैशनल एप्रोच जैसा ड्रामा करना जरुरी था । impression बनने की बात थी पता नही किसके सामने , या तो मोहल्ले के उन लोगों के सामने जो सरल कुमार की प्रतिभा पर हमेशा शक करते थे या फ़िर कोर्स की उन लड़किओं के सामने जो rejected लड़कों को कभी भी भइया की संज्ञा देकर एक अच्छा भला करियर चौपट कर सकती थी ।
फ़िर धीरे धीरे क्लास जमनी शुरू हो गई । देर रात तक उलटे सीधे अंग्रेज़ी अखबार और पत्रिकाएं जिनके हर शब्द के लिए सरल को "advanced learner oxford dictionary " सर पर रखकर तांडव करना पड़ता है। कोर्स फीस के साथ बिजली बिल को जोड़ लेने को माता पिता का सुझाव कितना पारदर्शी था। पर अभी भी शब्दों की कमी साफ़ थी । किसी नए नए इंग्लिश टीचर ने शब्दों को सीधे अनुवाद की राय देकर जब सरल कुमार की नोट बुक देखि तो अपना ही माथा पकड़ लिया । शब्दों का अर्थ अनर्थ कर रहा था । कुछ शब्दों का अर्थ तो महा -dictionary में भी नही मिला फ़िर हारकर सरल के ही पैर पकड़े और अर्थ पूछा , कुछ शब्द ये है :-

आलूबुखारा :- potato fevera
कान्खाजूरा - ear data
मोरी ( नाली ) -peacocki

फ़िर वो टीचर उस इंस्टिट्यूट में फ़िर दिखाई नही दिया । सरल को अब काफी संभावनाएं नज़र आने लगी थी जैसे अब वो आईएस के पेपर दे देगा , एक आईएस पूरे जिले का हेड होता है । हर साल सिर्फ़ चार सौ भाग्यशाली युवा ही इसे पास करते हैं । एक राज्य में सिर्फ़ सो या डेढ़ सो आईएस होते हैं । कितना सम्मान और ये सब इंग्लिश के कारन । क्या पता क्रिकेट में किस्मत खुल जाए कम से कम ढंग की स्पीच तो हो जाएगी क्रिकेटर इंजमाम उल हक के जैसी
आज आखिरी दिन ख़त्म करके वो घर आया तो छोटे भाई से टीवी का रिमोट छीनकर इंग्लिश न्यूज़ चैनल देखने लगा । ठेठ हरयाणवी में हरियाणा के मुख्यमंत्री जी भाषण दे रहे थे जो सिर्फ़ उनके कार्यकर्ताओं के अलावा किसी को समझ नही आ रहा था । सारे आईएस वहां सिर्फ़ सलामी देने का काम कर रहे थे । या फ़िर बुत की तरह खड़े थे । एक सरपंच आकर धक्का देकर आईएस को कुछ %&#*&*#$#%$ शब्दों का आदान प्रदान करके मुख्यमंत्री जी के गले मिलता है ।
दुःख में आकर सरल ने हिन्दी न्यूज़ चैनल पर लगाया , वहां लालू यादव जी की रेल बजट पेश हो रहा था । इंग्लिश देखकर सरल के सपने हवा हो गए आईएस बनने के । फ़िर दूसरे चैनल पर महारास्त्र को देश से भी बड़ा बताने वाली एक पार्टी के लोगो द्वारा हिन्दी भाषी नेता की pitayee देखी

बस सरल को लगा सब बातें है । पर इतना तय है को सरल कुमार के तीन हज़ार रुपये , बिजली बिल , नौकरी और शादी सब तबाह हो गए.

शनिवार, 12 दिसंबर 2009

कवि गंग का अद्भुत इश्वर प्रेम - जीवन परिचय

मेरे पूज्य सदगुरु बापूजी ने कवि गंग के जीवन काल में हुए अन्याय के बारे में बताया है। उसी को आधार मानकर मैं यह धार्मिक प्रेमिओं के लिए रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ । किसी भी दोष के लिए कृपया मुझे माफ़ करें ।
कवि गंग के बारे में शायद बस धार्मिक और गूढ़ साहित्य प्रेमी ही जानते हैं । वो तानसेन के समकालीन थे और अकबर के दरबार में कविता आदि गाने का काम करते थे । वो तानसेन से बहुत प्रभावशाली थे परन्तु कुछ कारन थे जिनकी वजह से वो इतिहास से बिल्कुल बेदखल कर दिए गए । उसका सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है :-
कवि गंग सिर्फ़ इश्वर निष्ठ कवि थे । भगवान् के अतिरिक्त वो किसी और की प्रशंसा के गीत कभी नही गाते थे । हालांकि सामाजिक मुद्दों पर भी लिखते जैसा मैंने इससे पिछली पोस्ट में उनका एक दोहा लिखकर दर्शाने का प्रयास किया है । पर कभी भी उन्होंने चापलूसी करने जैसी कोई कविता अकबर के लिए नही लिखी । ये वाकई दुर्लभ बात थी क्योंकि उस समय लगभग सभी अपनी आजीविका बढ़ाने के लिए झूठी सच्ची कविताये लिखकर अकबर से इनाम पाते थे। पर कवि गंग ने ऐसा कभी नही किया ।
कवि गंग की एक खास शैली ये थी वो आखिरी पंक्ति में अकबर को संबोधित कर लेते थे । अब एक दिन अकबर ने उन्हें आदेश दिया की कल वो एक कविता बनायें और उसकी आखिरी पंक्ति हो
" सब मिलकर आस करें अकबर की "
मतलब साफ़ था की कवि गंग को अकबर की बड़ाई करनी होगी । अगले दिन कवि गंग ने कविता पढनी शुरू की . उसके अर्थ कुछ ऐसे थे की एक को छोड़कर जो दूसरे को पुकारे उसकी जीभ कट जाए , वो दुश्चरित्र है जो बार बार अपने ईमान बदल लेते है। कवि गंग कहना चाहते थे की वो इश्वर अधीन है , कभी भी अकबर की झूठी चापलूसी नही करेंगे ।
उन्होंने आखिरी पंक्ति शुरू की ,
सारी दुनिया धन को भजे , कवि गंग तो एक गोविन्द भजे
जिसको न भरोसा इश्वर का , वो सब मिलकर आस करे अकबर की ।

बस कहने की जरुरत नही की क्या माहौल बनाया होगा अकबर के चापलूसों ने । फ़िर भी अकबर ने कहा की साफ़ साफ़ कहो । तो कवि गंग ने कहा
एक हाथ घोडा एक हाथ खर ( गधा ) ,
कहना था सा कह दिया करना है सो कर

दुष्ट सत्ता ने आदेश दिया की कवि गंग को हाथी से कुचल दिया जाए । कुचले जाने से पहले महान कवि ने अपनी आखिरी पंक्तियाँ कही
" कभी न रानडे रन चढ़े कभी न बाजी बंध ,
सकल सभा को आशीष है ,विदा होत कवि गंग
कायर कभी रन में नही लड़ते और कभी नही जीतते , भरी सभा को कवि गंग आशीर्वाद देता विदा होता है ।

कृपया कोई भी इसे हिंदू मुस्लिम कोण से न देखे , सिर्फ़ एक राजा और एक प्रतिभाशाली इश्वर प्रेमी कवि के चापलूस न होने को ही इस घटना का आधार माने । मैं भाग्यशाली था जो अपने बापूजी के आश्रम की मासिक पत्रिका " ऋषि प्रसाद " से ये पढ़ पाया ।

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...