सोमवार, 14 दिसंबर 2009

श्री सुरेशानंद जी का वैराग्यपूर्ण भजन -आश्रम की कैसेट "भजन सागर" से



तेरा हीरा जन्म बीता जाए रे , भजन कर गोविन्द का
कल कल करके टाल न भाई बड़े भाग्य से नर देह पाई ,
कर ले जग में नेक कमाई काल बदरिया सर पर छाई ,
फ़िर पीछे पछताए रे , भजन कर गोविन्द का
तेरा हीरा जन्म ...........
राम राम राम राम राम राम राम राम

दो दिन का है रैन बसेरा जिस दम तुझको कल ने घेरा
कोई न होवे साथी तेरा हो जाए शमशान में डेरा ,
तुझे छोड़ अकेला आए रे ,भजन कर गोविन्द का ,
तेरा हीरा जन्म ..............

ठाठ तेरा सब पड़ा रहेगा भजन ही तेरे संग चलेगा
भजन बिना भव कैसे तरेगा ,अवसर बीते हाथ मलेगा ,
तू हाथ पसरे जाए रे , भजन कर गोविन्द का ,
जय सिया राम ..

कुटुंब की खातिर क्यूँ मरता है मेरा मेरा क्यूँ करता है
पाप की गठरी सिर रखता इस झगड़े में क्यूँ पड़ता है
भटक भटक मर जाए रे ,
जय सिया राम ...

यह तो दो दिन का है मेला जाना पड़ेगा तुझे अकेला
छला छली का लगे झमेला आया अकेला चला अकेला
मत कर हाय हाय रे ।
राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम
राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम

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सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...