कुछ फिल्म और गीत हमेशा लीक से हटकर बनाये जाते हैं । इन्ही में से एक हैं फिल्म " दास विदानिया "। ये फिल्म हालीवुड फिल्म द बकेट लिस्ट से प्रेरित हैं ।
शीर्षक कुछ अजीबो गरीब हैं । असल में रूसी भाषा में do svidaniya का मतलब अलविदा होता हैं । इस फिल्म का अलविदा वाला गाना एक तरह से क्लाइमेक्स भी हैं । थोडा इसकी कहानी आपको बता दूँ जिससे आप lyrics की पृष्ठभूमि को समझ सकें ।
इस फिल्म का नायक विनय पाठक ( फेम खोंसला का घोंसला और भेजा फ्राय ) एक Multi-national company में Manager होता हैं । उसका छोटा भाई लव मैरिज करने के कारन इससे अलग रहता हैं । इसकी शादी नहीं होती हैं । इनकी मम्मी अक्सर बीमार भी रहती हैं । इसका बॉस सौरभ शुक्ला हमेशा बस इसे तंग करता रहता हैं साथ में कम्पनी कर्मचारी भी कोई ज्यादा सहयोग नहीं देते हैं ।
कहानी में और बड़ी मुसीबत होती हैं जब इसे पता चलता हैं की इसे कैंसर हैं । यहाँ पर इस फिल्म का ये अलविदा वाला गीत शुरू होता हैं , हालाँकि ये आगे भी थोडा थोडा दोहराया जाता हैं . अपनी पिटी पिटाई जिंदगी में बदलाव लाने के लिए ये चार पांच चीज़ें मरने से पहले करने की सोचता हैं जैसे पुरानी मित्र को आई लव यू बोलना , एक बड़ी कार लेना , विदेश यात्रा , बॉस को बेईज्ज़त करना और बेस्ट फ्रेंड से मिलना ।
ये सारे अरमान पूरे करता हैं पर दोस्त के पास जब विदेश जाता हैं तो दोस्त की पत्नी सोचती हैं की ये शायद केंसर का इलाज़ करने आया हैं तो बेचारा दोस्त का घर छोड़ देता हैं । वहां एक रूसी लड़की इसकी पिटाई कर देती हैं , तभी यह अलविदा वाला गाना शुरू होता हैं । इसके बाद ये आत्महत्या करने के लिए नदी में डूबने की कोशिश करता हैं की तभी यही रूसी लड़की इसकी जान बचाती हैं और इसकी दोस्त बन जाती हैं । फिल्म वैसे सबको पसंद नहीं आ सकती हैं ।
गीत के बोल ये हैं , ( स्वर कैलाश खेर का हैं )
जग सूना सूना ठहरा सा , मेरा सपना अपना गहरा गहरा सा
सारे शहर की जगमग के भीतर हैं अँधेरा
हर मुस्कान के पीछे छुपा हुआ गम का चेहरा
यही हैं सच तो हर पल को जी लूँ मैं जीभर के
और हंस हंस के ये कह दूँ दुखों के पत्थर से
अलविदा अलविदा अलविदा अलविदा
कोई वक्त के आगे हारा हारा सा
कोई प्यार में फिरता मारा मारा सा
दिल के रिश्तों में क्यूँ दर्द हमेशा मिलता हैं
और क्यूँ काँटों पर ही फूल सुखों का खिलता हैं
यही हैं सच तो मैं इस सच को ही अपनाऊंगा
मर भी जाऊँगा तो मैं प्यार अमर कर जाऊंगा
अलविदा अलविदा अलविदा अलविदा अलविदा अलविदा
जिंदगी ना मिल अजनबी बनके
बंदगी शामिल हर दुआ बनके
मरने से पहले वो अपने सारे बिल आदि पूरे जमा करा देता हैं । एक आखिरी सपना अख़बार में नाम छपना - इसके लिए वो एडवांस में अखबार में पैसा देता हैं अपनी मृत्यु के बाद रस्म पगड़ी के विज्ञापन का । इस तरह वो संतुष्ट होकर मर जाता हैं ।