बुधवार, 13 जनवरी 2010

दैनिक कड़ियाँ भाग एक

यह विषय असल में मैंने अपने जीवन कि रोजमर्रा के हालातो से उठे ख्यालो को लिखने के लिए के लिया हैं
और वैसे भी आप सभी जानते हैं कि कुछ बातो को ज्यादा शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता हैंवे बस छोटी हो सकती हैं पर महत्व उनका बहुत अधिक होता हैंमैंने सोचा कि इन पर कोई बड़ी पोस्ट लिखना संभव ना हो तो कम से कम ऐसी तीन चार बातों को मिलाकर लिखने से कुछ तो प्रासंगिक होगाये दैनिक कडिया Tweeter या माइक्रो पोस्ट जैसी होंगी । इसमें जो बातें थोड़ी व्यंग्य जैसी होंगी उनमे सरल का नाम डाल दूंगा और बाकि तो जीवन में घटी हुई बातों में किसी के नाम कि आवश्यकता ही नहीं होंगी . जिंदगी में बीते रोज के सुख दुःख के अनुभव मैं दैनिक कडिया के क्रमशः भागों में पोस्ट करता रहूँगा .


कई ऑटो / टैक्सी वाले अधिक से अधिक सवारी भरने के चक्कर में बिलकुल अधर्म पर उतर जाते हैं . ऑटो में ठूंस ठूंस कर भरी सवारियो के बीच बस हमारा धैर्य कई बार जवाब दे जाता हैं , आँखों से दुनिया की झलक पाने के लिए सवारिओं के बीच में से दुनिया की झलक मिल जाती हैं और हमारे मन को नरक की


फोटोग्राफर कहता हैं आपका फेस ठीक नहीं हैं , सरल कहता हैं कि मुझे पता हैं , फोटोग्राफर चिढ जाता हैं कि बेवक़ूफ़ फिर अब तक कुछ किया क्यों नहीं ठीक करने के लिए । सरल सफाई देता हैं टाइम नहीं मिला हालाँकि वो जानता हैं कि वो पूरी दुनिया का सबसे खाली व्यक्ति हैं ।


पता नहीं क्यूँ 3500 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ के नीचे दबी कंपनी अगर सरल को 1414 रुपये और 56 पैसे का इन्क्रीमेंट दे तो हो सकता हैं आर्थिक मंदी का शिकार हो सकती हैंपर एक सवाल सरल के मन में उठता हैं की आज अगर कम्पनी लाभ में हैं लेकिन बाजार की आर्थिक मंदी के कारन मेरी सेलरी नहीं बढ़ा रही हैं लेकिन अगर एक साल बाद आर्थिक तेजी गयी तो क्या कंपनी घाटे में रहने कारन फिर सेलरी नहीं बढ़ाएगीबेमतलब का झूठा तूफ़ान सिर्फ कम्पनिओं ने अपने फायदे के लिए फैलाया हुआ हैं


एक आशंका जताई जा रही हैं की हमारे देश में सोचे समझे तरीके से स्वायिन फ्लू को फैलाया गयापूरे दो महीने चैनलो और सरकारों ने हमें जानबूझकर दवाईयों के नाम बतायेखुद बहार से आने वाले लोगो पर कोई फुलप्रूफ चेकिंग जैसा काम नहीं कियाऊपर से हमें समाचारों में निश्चित रहने को कहा गया की फलां फलां अमेरिकेन कम्पनी से बात हो गयी हैं , दवाई की कोई कमी नहीं होने दी जायेगीजबकि T B या कैंसर से इससे भी जयादा लोग मरते हैंपर बाहरी दवाई कम्पनी से मिली सरकार और मीडिया चैनल पैसा खा चुके थेऔर जब पूरा माहौल तैयार हो गया तो कोई टेंसन लेने को तैयार नहींअब तो मरीजों की संख्या भी शायद लाखों लोगों को पार कर चुकी हैं फिर कोई सरकार या चैनल संवेदनशील क्यूँ नहीं होतातब तो सात आठ मरीजों के लिए भी प्रेस कांफ्रेंस होती थीहमारे बेशर्म स्वास्थ्य विभाग ने कहा था की हमें कोई चिंता नहीं बस एक दो हफ्तों में हम नियंत्रण पा लेंगेपता नहीं जैसे हमारे देश में सरकार हैं भी या नहीं

कसाब को तो आप सभी जानते ही हैंउस को देश में LIVE टेलीकास्ट के जरिये सबने देखा थावो अंतिम अकेला आतंकवादी जो बचा थाउसने खुद गुनाह कबूल किया थादेश पर हमला जैसा सबसे बड़ा अपराध , जिसके देश के सब नागरिक चश्मदीद गवाह और उसे मुजरिम साबित करने के लिए सरकार ने उसकी ही सेवा में पन्द्रह करोड़ रुपये और एक वकील लगा दिएजबकि एक आम नागरिक कभी भी अपने रोज के झगड़ों के लिए वकील की फीस नहीं दे सकता हैंइस केस में साबित करने के लिए पता नहीं अभी क्या बचा हैं

ऐसी ही कुछ दिल को छूने वाली बातें आपके साथ शेयर करता रहूँगा । शीर्षक दैनिक कड़ियाँ ही रहेगा बस भाग का क्रम बढ़ता रहेगा ।



कोई टिप्पणी नहीं:

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...