सोमवार, 28 जून 2010

फुटबाल और हमारी वसुधैव कुटुम्बकम कि सोच (व्यंग्य cum यथार्थ )



ये पोस्ट मैंने नीरज बधवार जी की पोस्ट को पढ़ कर लिखी हैं । इसका लिंक नीचे हैं

http://vyanjana.blogspot.com/2010/06/blog-post_26.html

जैसा की आप जानते होंगे की हमारे भारत के फूटबाल कोच ने कहा हैं की हम भी 2018 में विश्वकप में भाग लेंगे परजैसे हमारे काम हैं उसे देखकर तो लगता हैं की 18002 तक भी नहीं स्लोवेनिया और स्लोवाकिया जैसे देश भीकितना अच्छा खेल रहे हैं हम तो हर रोज़ एक टीम चुन लेते हैं कभी जर्मनी कभी अर्जेंटीना कभी ब्राज़ील और उनकेसुख दुःख में बीयर या टिशु पेपर यूज़ करते हैं

उधार कि पसंद ही हमारी महान संस्कृति हैं हमें तो वैसे ही आस पड़ोस के लोगो कि जिंदगी में ही जीवन बितानाहोता हैं अपने घर की तो सुध ही लेने की फ़िक्र नहीं होती ले दे कर एक आलसी खेल क्रिकेट पकड़ रखा हैं जो सुबहनौ से पांच तक खेलते हैं और पांच दिन के बाद ड्रा को भी रोमांचक कह लेते हैं कम्पनिया सारी क्रिकेट पर हीमेहरबान हैं सचिन के साथ के दुसरे विदेशी खिलाडी कब के अलविदा कह चुके हैं पर भारतीय संस्कृति के चलतेसचिन जी शायद पचपन या अठावन में स्वैच्छिक सेवानिवृति लेंगे उससे पहले कोई उन्हें हटाएगा तो "गृह युद्ध " ," राजनीति " , " क्षेत्रवाद " ," जय महाराष्ट्र " जैसे जुमले हवा में लहरायेगे

अर्जेंटीना या ब्राज़ील से रोंदे जाने की नौबत हम पर नहीं आएगी क्योंकि हममे तो सारी प्रतिभा चापलूसी को लेकर हीहोगी शायद ऐसा होगा की ग्यारह खिलाडियो में खेल माफिया के रिश्तेदार भर जायेगे ऐसा नहीं हैं की भारत मेंखेलो को कोई बढ़ावा नहीं दिया जाता बल्कि राजनीति में कितने "खेल " होते हैं ऊपर से खेल को भी हम खेल कीतरह ही लेते हैं बातो में सारी चीजों को गोल गोल घुमाना हमारी संस्कृति हैं

वैसे मेरे ख्याल से तो हमें खुश होना चाहिए की पाकिस्तान का भी यही हाल हैं और इस बार तो हमारा परम मित्र रूसभी नहीं खेल रहा हैं सारे पडोसी देशो को भी अकेला नहीं छोड़ा जा सकता हैं फिर फूटबाल से हाथ पैर टूटने काखतरा हैं आँख वांख फूट गयी तो भारत में तो इलाज़ भी संभव नहीं हैं डेढ़ घंटे का भी कोई खेल होता हैं इतने मेंतो हम वार्म अप होते हैं
फूटबाल कुल मिलाकर हमारे राष्ट्रिय हित में नहीं लगता एक दिक्कत ये भी हैं की हमारे सामान्य ज्ञान केसोफ्टवेयर अपडेट नहीं हैं क्योंकि मेरे आँखे ब्राज़ील कि टीम में पेले और रोनाल्डो को नहीं देख पा रही हैं पता नहींमाराडोना को बेंच पर बिना फूटबाल ड्रेस के बिठाया गया हैं बेकहम भी बेचारा बेंच पर बैठा हैं जब इतने अच्छेखिलाडियो का टीम में स्थान नहीं हैं तो फिर ऐसे फ़िज़ूल गेम पर क्यों एनर्जी बेकार कि जाये अच्छा मेरी चाय ठंडीहो रही हैं मैं चलता हूँ

!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!जय हिंद !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

3 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

हम भी चाय पीने जा रहे हैं...

kunwarji's ने कहा…

videshniti or footbaal....badhiya mel tha par is chaay ne....


kunwar ji,

ZEAL ने कहा…

This is the IRONY !

cricket hi le doobega !

why don't they make it our national game? Why insulting the national game Hockey ?

The crickets of Indian team do not have moral values, nor sense of responsibility and also they do not carry any pride for nation.

They are playing for the sake of money and fame only.

Poor creatures do not know how much sacrifice a nation demands for being in such a high position.

When they will stop flirting and match fixing?

सुबह सुबह फेसबुक पर अपडेट कि हैं सोचा यहाँ भी डाल देता हू । पल पल मुश्किल होती जिंदगी आसान लगती हैं प्रभु तेरी बंदगी जी जी कर भी क्या हासिल ...