आज एक साधक इंदु बहन की पोस्ट पढ़ी कृष्ण दर्शन पर .उसका लिंक ये हैं
अब मेरे जैसा कृष्ण से गहरी खुंदक खाया इन्सान कैसे उसकी बड़ाई सहन कर लेता आदतवश फिर कलम बगावत कर उठी उस काले कलूटे के लिए जो सुन्दर भी नहीं हैं , पर फिर भी दुनिया दीवानी हैं भला राधा जी जैसा गौरवर्ण चेहरा भी धोखा खा गया इसके छल में तो फिर हम जैसो को सावधान रहना चाहिए . हम अपना दिल क्यों उसको दे जो कुछ औकात रखता ही नहीं हैं . क्यों उसे सर पर चढ़ाये जिसे हमारी भावनाओ की कद्र ही नहीं हैं .
भ्रम ही तो हैं कृष्ण ,
दुनिया का हमें कुछ पता नहीं
और वो कुछ पता देता नहीं.
पास जाओ तो गायब हो जाता हैं ,
दूर जाओ तो पीछे लग जाता हैं.
उस छलिये से कैसा ये नाता हैं
धोखा देना हमें उसे बहुत भाता हैं
धोखा देना हमें उसे बहुत भाता हैं
सूने मन का वो ना सहारा हुआ
फिर भी भक्त होकर मैं आवारा हुआ
राधा को पाना भी जिसे गंवारा ना
हुआ
उस कपटी कृष्ण का मैं दीवाना हुआ
बस ऐसा सी ही कुछ शिकायत जैसा हैं
प्यार की दुनिया का ये रब कैसा हैं
धुंधला बादल सा वो क्यों फट नहीं जाता हैं
उफनी नदी का किनारा क्यों कट नहीं जाता हैं
ईश्वर बना कृष्ण क्यों मेरे दर पर नहीं आता हैं
प्यार में जो हाथ बढाओ तो काट खाता हैं
कितनी परेशानी दी होगी तभी मुझसे सजा पाता हैं
कलम में घुसकर "वीरेन " की बस लिखा जाता हैं
3 टिप्पणियां:
बढ़िया रचना ...
भक्ति का ये भी एक रंग है और आप उसमे डूबे हैं ये उसे पता है इसीलिये तो आपसे खेल खेलता है……………आखिर उसे भी तो कोई चाहिये उसके जैसा ।
thanks aap sabhi ka
vandna ji , thanks 4 regular motivation
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